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बिना नाविक के समंदर के रास्ते हो रही ड्रग्स की स्मगलिंग! पोरबंदर में पुलिस ने पकड़ी 30 लाख की चरस

पोरबंदर समुद्र तट एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह मछली पकड़ना नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी है.

Gujarat Police Charas Seized
बरामद चरस का पैकेट. (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : July 9, 2026 at 1:24 PM IST

3 Min Read
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पोरबंदर (गुजरात): पोरबंदर की न्यू पोर्ट पुलिस ने गोसाबारा तट से लावारिस हालत में 12.270 किलोग्राम चरस बरामद की है. जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 30.67 लाख रुपये आंकी गई है. यह पोरबंदर पुलिस के लिए एक बड़ी कामयाबी है. गोसाबारा, मियानी और चांच जैसे इलाकों का इस्तेमाल कुछ समय से ड्रग्स की तस्करी के लिए किया जा रहा है.

रूटीन गश्त के दौरान मिली लावारिस खेप

गोसाबारा गांव के पास का समुद्र तट लंबे समय से ड्रग्स लैंडिंग पॉइंट के रूप में सुरक्षा एजेंसियों की नजर में रहा है. सुबह रूटीन गश्त के दौरान पुलिस को किनारे पर एक संदिग्ध लावारिस चीज दिखाई दी, जो लहरों के साथ बहकर आई प्रतीत हो रही थी. संदेह होने पर जब उसकी जांच की गई, तो उसके भीतर प्लास्टिक कवर में अच्छी तरह बंधे हुए 10 पैकेट मिले. इन पैकेटों पर अरबी भाषा में कुछ लिखा हुआ था.

FSL और डॉग स्क्वाड की मदद से पुष्टि

मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) और डॉग स्क्वाड को मौके पर बुलाया गया. विस्तृत जांच में पैकेटों के अंदर चरस होने की पुष्टि हुई, जिसका कुल वजन 12 किलो 270 ग्राम निकला. न्यू पोर्ट पुलिस ने इस मामले में एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है. चूंकि यह खेप लावारिस हालत में मिली है, इसलिए पुलिस अब इसके पीछे के नेटवर्क को खंगाल रही है.

तस्करी का नया 'जीपीएस' पैटर्न आया सामने

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, समुद्र के रास्ते ड्रग्स तस्करी का एक नया और शातिर तरीका सामने आया है. अब तस्करों की नावें सीधे किनारे पर नहीं आतीं. वे तट से करीब 5-6 किलोमीटर दूर समुद्र में ही ड्रग्स की खेप को तैरता हुआ छोड़ देते हैं.

इसके बाद व्हाट्सऐप (WhatsApp) के जरिए इसकी जीपीएस लोकेशन स्थानीय नाविकों और एजेंटों के साथ शेयर की जाती है. जो रात के अंधेरे में जाकर इसे उठा लेते हैं. आमतौर पर पाकिस्तान और ईरान से नावों के जरिए ये खेप भारतीय समुद्री सीमा में छोड़ी जाती हैं.

जांच में जुटीं ATS और साइबर सेल

इस रैकेट की जड़ तक पहुंचने के लिए पोरबंदर पुलिस के साथ अब एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) और साइबर सेल भी जांच में जुट गई है. पुलिस गोसाबारा, मियानी और चांच जैसे संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर रख रही है. इसके साथ ही संदिग्ध रूट के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, मोबाइल टावर लोकेशंस और पुराने ड्रग अपराधियों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं. समुद्र में पैनी नजर रखने के लिए तटरक्षक बल की भी मदद ली जा रही है.

ग्रामीणों से अपील

पुलिस ने तटीय इलाके के करीब 10 गांवों में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया है. इसके साथ ही स्थानीय ग्रामीणों को अलर्ट करते हुए पुलिस ने अपील की है कि अगर उन्हें समुद्र तट या आसपास कोई भी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि दिखे, तो तुरंत '100' नंबर पर इसकी सूचना दें. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चंद रुपयों के लालच में देश के युवाओं की जिंदगी बर्बाद न करें, क्योंकि चरस की यह लत नई पीढ़ी को खोखला कर रही है.

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