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गुजरात पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय 'साइबर स्लेवरी' रैकेट का भंडाफोड़ किया, मास्टरमाइंड गिरफ्तार

नीलेश पुरोहित ने 126 से ज़्यादा उप-एजेंटों का एक सुव्यवस्थित नेटवर्क बनाया था, जिनका 30 से ज़्यादा पाकिस्तानी एजेंटों से सीधा संपर्क था।

SLAVERY RACKET
गुजरात पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय 'साइबर स्लेवरी' रैकेट का भंडाफोड़ किया (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : November 18, 2025 at 10:33 PM IST

3 Min Read
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अहमदाबाद: गुजरात के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की एक टीम ने नीलेश उर्फ ​​नील नरपतसिंह पुरोहित को गिरफ्तार किया है, जो एक अंतरराष्ट्रीय रैकेट का मास्टरमाइंड था. वह केके पार्क, म्यांमार और कंबोडिया में चीनी साइबर माफिया द्वारा संचालित स्कैम सेंटरों में साइबर स्लेवरी के लिए लोगों की तस्करी करता था.

पिछले तीन वर्षों में भारत सरकार के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों से लगभग 4000 भारतीयों को थाईलैंड, म्यांमार, मलेशिया और अन्य देशों से साइबर गुलामी से मुक्त कराया गया है और विशेष उड़ानों के माध्यम से वापस लाया गया है. इन सभी पीड़ितों के बयानों में नील पुरोहित का नाम बार-बार आया. इन्हीं बयानों के आधार पर साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की टीम आरोपी तक पहुंची और उसे धर दबोचा.

30 से अधिक पाकिस्तानी एजेंट
नीलेश पुरोहित ने 126 से ज़्यादा सब-एजेंट्स का एक व्यवस्थित नेटवर्क स्थापित किया था, जिसमें 30 से ज़्यादा पाकिस्तानी एजेंट, 100 से ज्यादा चीनी और विदेशी कंपनियों के मानव संसाधन विभाग के साथ सीधा संपर्क शामिल था. इस नेटवर्क के जरिए, भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, नाइजीरिया, मिस्र, कैमरून, बेनिन और ट्यूनीशिया जैसे देशों के 500 से अधिक नागरिकों को हाई सैलरीड डेटा एंट्री जॉब्स लालच देकर म्यांमार, कंबोडिया, वियतनाम और थाईलैंड के साइबर स्कैम सेंटरों में ले जाया गया.

जांच से पता चला है कि आरोपी ने 1000 से अधिक लोगों को भेजने की डीस की थी और अपनी गिरफ़्तारी से एक दिन पहले ही पंजाब से एक युवक को कंबोडिया भेजा था. आरोपी प्रति व्यक्ति 2000 से 4500 डॉलर तक कमीशन लेता था और 30-40 प्रतिशत हिस्सा सब-एजेंट्स को देता था.

अवैध रूप से लोगों को फंसाता था

वह टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर आकर्षक नौकरी के विज्ञापन पोस्ट करके, टिकट और होटल की व्यवस्था करके और फिर थाईलैंड से म्यांमार सीमा पार करके केके पार्क या अन्य चीनी परिसरों में अवैध रूप से लोगों को फंसाता था. वहां पहुंचने पर, उनके पासपोर्ट छीन लिए जाते, मोबाइल फोन जब्त हो जाते और उन्हें फिशिंग, क्रिप्टो स्कैम, पोंजी स्कीम और डेटिंग ऐप्स के जरिए धोखाधड़ी जैसे अपराध करने के लिए मजबूर किया जाता. सहयोग न करने पर उन्हें शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी जाती.

क्रिप्टो वॉलेट के जरिए लेनदेन
इस रैकेट का वित्तीय लेनदेन म्यूल अकाउंट और कई क्रिप्टो वॉलेट के जरिए होता था. आरोपी खुद को घोस्ट बताता था, वर्चुअल नंबर इस्तेमाल करता था और अक्सर दुबई, लाओस, थाईलैंड, म्यांमार और ईरान जाता था. गिरफ्तारी के समय, वह मलेशिया भागने की तैयारी कर रहा था. इस मामले में आरोपी के दो मुख्य साथियों हितेश सोमैया और सोनल फलदू को भी गिरफ्तार किया गया है.

आरोपी के पास से 2 मोबाइल, 1 लैपटॉप और 1 पासपोर्ट जब्त किया गया है. अदालत ने उसे 14 दिन की रिमांड पर लिया है. यह कार्रवाई गुजरात साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक मानी जा रही है, जिसने दक्षिण-पूर्व एशिया में सक्रिय चीनी साइबर माफिया के बड़े नेटवर्क को करारा झटका दिया है.

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