गुजरात : स्टूडेंट ने बनाई सेल्फ चार्जिंग साइकिल, चार्जिंग करने से मिलेगा छुटकारा
इंजीनियरिंग के स्टूडेंट ने एक इलेक्ट्रिक साइकिल डिज़ाइन की है जो खुद पावर जनरेट करती है, जिससे बाहर से चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती.

Published : January 9, 2026 at 7:58 PM IST
भावनगर (गुजरात) : देश में लोग जहां इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने की तरफ बढ़ रहे हैं, वहीं भावनगर में ज्ञानमंजरी इनोवेटिव यूनिवर्सिटी के मैकेनिकल डिपार्टमेंट के एक स्टूडेंट ने एक ऐसी साइकिल बनाई है जिसे चार्ज करने की जरूरत नहीं है. उसे चार्ज करने के झंझट से छुटकारा मिल गया है. हालांकि इसे चार्ज करने के तरीके अलग-अलग हैं, लेकिन उन सभी तरीकों को साइकिल में इंटीग्रेट किया गया है.
एक आइडिया आया और उसने बना दी ऐसी साइकिल
भावनगर ज्ञानमंजरी इनोवेटिव यूनिवर्सिटी के चल रहे एक्सपो में मैकेनिकल डिपार्टमेंट के फर्स्ट सेमेस्टर के स्टूडेंट लाली कृष ने कहा कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों के ज़माने में इलेक्ट्रिक गाड़ियां बन रही हैं, इलेक्ट्रिक गाड़ियों को जिस तरह से हमें मैनुअल तरीके से चार्ज करना पड़ता है, उसमें बैटरी कभी-कभी खत्म हो जाती है या हमें इसे पूरी रात चार्ज करते रहना पड़ता है. इसलिए मैंने सोचा कि हमें कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे हमें इसे चार्ज न करना पड़े या किसी दिन हमें इसे चार्ज करने की जरूरत ही न पड़े.
"साइकिल में मैंने इसके आगे विंड एनर्जी, सोलर एनर्जी और डायनेमो एनर्जी का इंतजाम किया है, यानी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में मैकेनिकल इंजीनियरिंग का इंतजाम किया है. अगर हम इसे इस तरह से देखें, तो साइकिल की कीमत को छोड़कर, कीमत लगभग 10,000 है, जिसमें साइकिल की कीमत शामिल नहीं है. हैंडल के आगे विंड एनर्जी यानी पंखे का इंतजाम किया है. जब मैं ब्रेक लगाता हूं, तो डायनेमो का भी इंतजाम किया है. इसके साथ ही, पीछे के कैरियर में सोलर पैनल का इंतजाम किया है. इन तीनों एनर्जी से बिजली बनती है और बैटरी में स्टोर होती है, यानी साइकिल को कभी चार्ज नहीं करना पड़ता." - लल्ली कृष, स्टूडेंट
स्टूडेंट लल्ली कृष की बनाई साइकिल में सोलर एनर्जी, विंड एनर्जी और डायनेमो एनर्जी का इंतजाम किया है. जाहिर है, किसी भी इलेक्ट्रिक गाड़ी को बैटरी खत्म होने पर चार्ज करना पड़ता है, लेकिन यहां जब युवा साइकिल चलाता है तो पंखा घूमता है, इसलिए विंड एनर्जी बनती है और जब ब्रेक लगाकर साइकिल चलाई जाती है, तो डायनेमो उसके साथ घूमता है, इसलिए उससे डायनेमो एनर्जी मिलती है.
जबकि दिन में सोलर पैनल की वजह से सूरज की रोशनी से सोलर एनर्जी मिलती है. इस तरह, साइकिल तीन तरह की एनर्जी लेकर बनाई गई है. हालांकि, विंड एनर्जी और डायनेमो एनर्जी रात में भी बैटरी को चार्ज करती रहती हैं. इसलिए, ऐसी कोई स्थिति नहीं है जहां बैटरी को चार्ज करने की जरूरत पड़े.
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