दरभंगा DMCH की शर्मनाक तस्वीर, अस्पताल में लावारिस मरीज को फर्श पर घसीटा.. क्या बोले अधीक्षक?
दरभंगा डीएमसीएच में एक लावारिस मरीज को फर्श पर घसीटने की तस्वीर सामने आयी है. रिपोर्ट-वरुण ठाकुर

Published : August 22, 2026 at 9:13 AM IST
दरभंगा: उत्तर बिहार के सबसे बड़े अस्पताल डीएमसीएच (दरभंगा मेडिकल कॉलेज) के इमरजेंसी विभाग में शुक्रवार को मानवता को तार-तार करने वाली तस्वीर सामने आई है. जहां गंभीर हालत में इलाज के लिए पहुंचे एक लावारिस मरीज को ट्रॉली से ले जाने के बजाय सुरक्षाकर्मी द्वारा फर्श पर घसीटकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने का मामला सामने आया है. यह घटना अस्पताल की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है.
तीन दिन से बिना इलाज था युवक: अस्पताल में मौजूद लोगों ने बताया कि, उक्त युवक को करीब तीन दिन पहले पुलिस द्वारा DMCH के इमरजेंसी विभाग में लाया गया था. युवक की पहचान झंझारपुर का रहने वाले के रूप में हुई है. हालांकि, वह अपने बारे में इससे अधिक जानकारी देने की स्थिति में नहीं है. बताया जा रहा है कि तीन दिनों से अस्पताल परिसर में रहने के बावजूद उसका विधिवत दाखिला नहीं किया गया था.

लोगों ने कटाया पुर्जा: अस्पताल परिसर में रहने के बावजूद उसे समुचित इलाज भी नहीं मिल सका. वहीं स्थानीय लोगों और वहां मौजूद कुछ मरीजों के परिजनों द्वारा पांच रुपये का पुर्जा कटाकर उसका इलाज कराने की बात प्रकाश में आई है. इस संदर्भ में प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मरीज को आर्थोपेडिक इमरजेंसी से ट्रायज एरिया की ओर ले जाने के लिए कहा गया था. लेकिन अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही दिखाई.
ट्रॉली के बदले फर्श पर घसीटा: मरीज को वहां पहुंचाने के लिए ट्रॉली मंगाने के बजाय एक सुरक्षाकर्मी ने उसका हाथ पकड़ा और उसे फर्श पर घसीटते हुए ट्रायज एरिया तक ले गया. बताया जाता है कि इमरजेंसी विभाग में कई ट्रॉलियां मौजूद थीं. इसके बावजूद मरीज के लिए ट्रॉली का इस्तेमाल नहीं किया गया. मौके पर मौजूद मरीजों और उनके परिजनों ने जब यह दृश्य देखा, तो वे भी हैरान रह गए.
जमीनी हकीकत पर उठे सवाल: अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को बेहतर और सम्मानजनक स्वास्थ्य सुविधा देने का दावा किया जाता है. लेकिन इस घटना ने व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़ा कर दिया है. मामले में डीएमसीएच अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्रा ने कहा कि इमरजेंसी विभाग में मरीजों की सुविधा के लिए हेल्थ मैनेजर की तैनाती की गई है. मरीजों के लिए ट्रॉली की पर्याप्त व्यवस्था है.

"इस तरह मरीज के साथ व्यवहार किया जाना उचित नहीं है. हेल्थ मैनेजर को मरीज को तत्काल भर्ती कराने और उसका समुचित इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जा रहा है. साथ ही मरीज को फर्श पर घसीटकर ले जाने वाले सुरक्षाकर्मी की पहचान कर उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी." -डॉ. जगदीश चंद्रा, अधीक्षक, डीएमसीएच
लावारिस मरीजों की अनदेखी पर सवाल: अस्पतालों में लावारिस मरीजों के इलाज, दवा और भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की होती है. ऐसे मरीजों की पहचान और देखभाल के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी व्यवस्था किए जाने की बात कही जाती है. इसके बावजूद डीएमसीएच जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान में एक लावारिस मरीज का तीन दिनों तक भर्ती न होना गंभीर सवाल खड़े करता है.
ये भी पढ़ें:
30 करोड़ के अस्पताल में बढ़ गए मरीज लेकिन नहीं बढ़ा मैन पावर, धूल फांक रहीं मशीनें
यहां दिमाग, आंख, कान, नाक का इलाज नहीं होगा; बिहार के 38 करोड़ी 'मॉडल अस्पताल' बीमार

