Explainer: बिहार के 12 सैटेलाइट टाउनशिप के लिए कैसे ली जाएगी जमीन?, जानिए नया फॉर्मूला?
बिहार में 12 सेटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन को लेकर नाराजगी है, क्या ऐसे में सम्राट सरकार का नया फॉर्मूला काम आएगा?. रिपोर्ट रंजीत कुमार

Published : August 24, 2026 at 7:20 PM IST
पटना: बिहार में प्रस्तावित 12 सैटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया को लेकर किसानों की आपत्तियों के बीच राज्य सरकार ने अब सहमति आधारित रास्ता अपनाने का फैसला किया है. नगर विकास एवं आवास विभाग किसानों को जमीन देने के लिए चार विकल्प देगा.
जमीन मालिकों की आपत्ती पर सरकार का फैसला: विभाग की टीम संबंधित क्षेत्रों में जाकर किसानों और भू-स्वामियों से संवाद करेगी और उन्हें टाउनशिप योजना की पूरी जानकारी देने के साथ जमीन देने के उपलब्ध विकल्पों के बारे में बताया जाएगा. किसान जिस प्रक्रिया पर सहमत होंगे, उसी के अनुसार जमीन लेने की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी. सरकार का यह फैसला जमीन मालिकों की आपत्तियों को देखते हुए लिया गया है.
कब शुरू होगी जमीन लेने की प्रक्रिया?: नगर विकास एवं आवास विभाग ने राज्य में प्रस्तावित सभी 12 टाउनशिप की सीमा निर्धारित कर दी है. इनमें पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप की विकास योजना के प्रारूप का प्रकाशन भी किया जा चुका है. पाटलिपुत्र टाउनशिप को 30 सेक्टर में विकसित करने का प्रस्ताव है. योजना के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का अध्ययन किया जा रहा है. इसके बाद जमीन लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि टाउनशिप के विकास का काम आगे बढ़ सके.
किसानों को राजी करने में जुटी सरकार: सरकार की कोशिश होगी सबसे पहले किसानों को लैंड पुलिंग के लिए तैयार करना. यदि किसी सेक्टर में किसान इस व्यवस्था के लिए तैयार नहीं होते हैं तो दूसरे विकल्पों के जरिए जमीन लेने की प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा. विभाग का मानना है कि अलग-अलग विकल्प उपलब्ध रहने से किसानों और भू-स्वामियों की सहमति के अनुसार जमीन लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी. सरकार किसानों को कुल चार विकल्प देगी.

पहला विकल्प - लैंड पुलिंग : जमीन लेने के लिए पहला प्रमुख विकल्प लैंड पुलिंग का होगा. विभाग की ओर से सबसे पहले इसी प्रक्रिया को अपनाने की बात कही गई है. इसके तहत किसी सेक्टर के विकास के लिए किसानों की सहमति से उनकी जमीन को एक साथ लिया जाएगा. इसके बाद उस क्षेत्र में सड़क, नाला, पार्क, सीवरेज और दूसरी जरूरी आधारभूत संरचनाओं का विकास किया जाएगा. जमीन विकसित होने के बाद उसका 55 फीसदी हिस्सा जमीन मालिकों को वापस किए जाने का प्रावधान होगा. किसानों को उनके हिस्से की विकसित जमीन उसी सेक्टर में किसी अन्य स्थान पर भी दी जा सकती है.

दूसरा विकल्प - आपसी समझौता : दूसरा विकल्प समझौते के आधार पर जमीन लेना यानी निगोशिएटेड सेटलमेंट होगा. इसके तहत विभाग किसानों और भू-स्वामियों से बातचीत करेगा और आपसी सहमति के आधार पर जमीन लेने का प्रयास किया जाएगा. इस प्रक्रिया में जमीन मालिकों को कुछ अतिरिक्त लाभ देने का भी प्रावधान रखा गया है. इसके तहत अतिरिक्त एफएआर यानी फ्लोर एरिया रेशियो, टीडीआर यानी ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स और विकास शुल्क में छूट जैसे विकल्प दिए जा सकते हैं. विभाग किसानों से बातचीत कर उनकी सहमति के आधार पर इस व्यवस्था को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा.
तीसरा विकल्प - भूमि अधिग्रहण : तीसरा विकल्प भूमि खरीद या अधिग्रहण का होगा. टाउनशिप में सड़क, नाला, पार्क, स्कूल, कॉलेज समेत सार्वजनिक उपयोग की आधारभूत संरचनाओं के निर्माण के लिए कुछ जमीन ऐसी होगी जिसे वापस करने का विकल्प नहीं होगा. ऐसे मामलों में सबसे पहले किसानों से जमीन बेचने का आग्रह किया जाएगा. यदि किसान जमीन बेचने के लिए तैयार नहीं होते हैं तो लागू नियमों के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी. यानी सार्वजनिक उपयोग की आवश्यक जमीन के लिए खरीद के बाद अधिग्रहण का विकल्प खुला रहेगा.

चौथा विकल्प - हाइब्रिड मॉडल : चौथा और अंतिम विकल्प हाइब्रिड मॉडल होगा. यदि किसी सेक्टर के किसान पहले तीन विकल्पों में से किसी एक व्यवस्था पर सामूहिक रूप से सहमत नहीं होते हैं तो मिश्रित मॉडल अपनाया जा सकेगा. इसमें लैंड पुलिंग, आपसी सहमति से जमीन लेना, भूमि खरीद और भूमि अधिग्रहण जैसी प्रक्रियाओं को एक साथ इस्तेमाल किया जा सकता है. किसी सेक्टर में किसान जिस प्रक्रिया के तहत जमीन देने के लिए तैयार होंगे, उसी के अनुसार जमीन लेने पर विचार किया जाएगा. इस तरह एक ही टाउनशिप या सेक्टर में अलग-अलग जमीन मालिकों के लिए अलग प्रक्रिया अपनाने का विकल्प भी रखा गया है.
योजना के दायरे में 273 गांव: पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप का प्रस्तावित क्षेत्र करीब 81,730 एकड़ में फैला होगा. योजना के दायरे में नौ प्रखंडों के कुल 273 गांव शामिल किए गए हैं. इनमें पुनपुन, नौबतपुर, मसौढ़ी, फतुहा, संपतचक, पटना ग्रामीण, धनरुआ, दनियावां और फुलवारी प्रखंड के क्षेत्र शामिल हैं. इसके अलावा विशेष क्षेत्र के तौर पर दो शहरी क्षेत्रों को भी योजना में शामिल करने का प्रस्ताव है. इनमें नौबतपुर नगर पंचायत का आंशिक क्षेत्र और पुनपुन नगर पंचायत का पूरा क्षेत्र शामिल है.

बिहार में विकसित होंगे आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स: टाउनशिप के भीतर करीब 3,008 एकड़ का कोर एरिया प्रस्तावित है. इसमें पुनपुन प्रखंड के 19 गांव शामिल होंगे. वहीं, टाउनशिप की समेकित योजना में खेल गतिविधियों और खेल से जुड़ी आधारभूत संरचनाओं के लिए कुल 651 एकड़ क्षेत्र निर्धारित किया गया है. इस क्षेत्र में स्पोर्ट्स सिटी, गोल्फ कोर्स और आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित किए जाने का प्रस्ताव है.
हितधारकों के साथ विस्तृत संवाद: नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा है कि विभाग ने योजना को अधिक व्यापक और सहभागी बनाने के उद्देश्य से हितधारकों के साथ विस्तृत संवाद कार्यक्रम तैयार किया है. इसी क्रम में पहला संवाद भी स्थापित किया गया. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विभाग की टीम किसानों और भू-स्वामियों के बीच जाकर योजना के अलग-अलग पहलुओं की विस्तार से जानकारी देगी और उनके सुझावों तथा विचारों को गंभीरता से सुना जाएगा.

"पाटलिपुत्र टाउनशिप जैसी बड़ी योजना की सफलता का आधार व्यापक जनभागीदारी और लगातार संवाद है. विशेष रूप से उन भू-स्वामियों से प्रत्यक्ष बातचीत की जाएगी, जिनकी जमीन योजना के दायरे में आ रही है. उनकी आपत्तियों और सुझावों को समझते हुए सहभागिता और सहमति के साथ योजना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा. किसानों और भू-स्वामियों के साथ संवाद और विमर्श की प्रक्रिया आगे भी लगातार जारी रहेगी."-नीतीश मिश्रा, मंत्री, नगर विकास एवं आवास विभाग
शहरी दबाव को कम करने की मुहिम: बिहार में शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की मंजूरी दी गई है. इन टाउनशिप को आधुनिक और सुनियोजित शहरों के तौर पर विकसित किया जाना है. योजना का उद्देश्य बढ़ते शहरी दबाव को कम करने के साथ लोगों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है. पटना को मॉडल सैटेलाइट टाउनशिप के रूप में विकसित किया जाना है.
टाउनशिप में होंगी ये सुविधाएं: प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप में चौड़ी सड़कें, बेहतर कनेक्टिविटी, पेयजल, सीवरेज, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं के साथ हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे. रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियों के लिए भी स्थान निर्धारित किए जाने का प्रस्ताव है. इन टाउनशिप में आधुनिक आवासीय क्षेत्रों के साथ स्पोर्ट्स और मनोरंजन की सुविधा होगी. पाटलिपुत्र टाउनशिप में प्रस्तावित विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स हब इसी व्यापक शहरी विकास योजना का हिस्सा है.

हुडको से मिलेगा एक लाख करोड़ का वित्तीय सहायता: बिहार सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर वित्त प्रबंधन भी कर लिया है. नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि इन परियोजनाओं के लिए बिहार सरकार ने HUDCO से करीब एक लाख करोड़ रुपये के वित्तीय सहयोग की दिशा में समझौता किया है. इससे बड़े पैमाने पर शहरी आधारभूत संरचना विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
बिहार में विकसित होंगे 12 सैटेलाइट टाउनशिप: सरकार की योजना केवल पाटलिपुत्र टाउनशिप तक सीमित नहीं है. बिहार में प्रस्तावित 12 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप में खेल सुविधाओं के लिए जमीन चिह्नित करने की तैयारी है. यानी आने वाले समय में अलग-अलग शहरों में आधुनिक खेल आधारभूत संरचना विकसित करने का रोडमैप तैयार किया जा रहा है.
प्रमुख शहरों में विकसित होंगे ये सैटेलाइट टाउनशिप: बिहार में आधुनिक शहरी विकास को गति देने के लिए 12 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना है. इनमें पाटलिपुत्र टाउनशिप-पटना, हरिहरनाथपुर-सारण/सोनपुर, मगध टाउनशिप-गया, मिथिला टाउनशिप-दरभंगा, कोसी टाउनशिप-सहरसा, पूर्णिया टाउनशिप-पूर्णिया, अंग टाउनशिप-भागलपुर, तिरहुत टाउनशिप-मुजफ्फरपुर, रोहतास टाउनशिप-रोहतास और सीतापुरम-सीतामढ़ी समेत अन्य प्रस्तावित शहरी केंद्र शामिल हैं. सरकार का उद्देश्य प्रमुख शहरों पर बढ़ते आबादी और बुनियादी ढांचे के दबाव को कम करना तथा नए आर्थिक और कारोबारी केंद्र तैयार करना है.
651 एकड़ में होगा खेल का नया केंद्र: नगर विकास मंत्री ने कहा कि पाटलिपुत्र टाउनशिप में कुल 651 एकड़ क्षेत्र को खेल सुविधाओं के लिए प्रस्तावित किया गया है. इसमें करीब 225 एकड़ में स्पोर्ट्स सिटी, 187 एकड़ में गोल्फ कोर्स और 239 एकड़ में आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित करने की योजना है. यानी टाउनशिप में खेल, प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के लिए एक बड़ा एकीकृत परिसर तैयार किया जाएगा. योजना का उद्देश्य बिहार में अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी को सामने लाना है.
जल्द ही तैयार होगा वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का स्वरूप: इसके आलावे राजधानी पटना में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (WTC) बनाने की तैयारी भी शुरू हो गई है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में NBCC ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के निर्माण का प्रस्ताव पेश किया है. इसके साथ ही राजधानी की कई सरकारी जमीनों के पुनर्विकास की भी योजना है. प्रस्ताव के मुताबिक पटना में अलग-अलग परियोजनाओं पर करीब 4 हजार करोड़ रुपये का निवेश आने की संभावना है, जबकि इन परियोजनाओं से लगभग 8 हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है.
एनबीसीसी कर रही है मॉडल तैयार: वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के जरिए बिहार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जोड़ने, निवेश आकर्षित करने और नए व्यावसायिक अवसर पैदा करने पर जोर होगा. NBCC को प्रस्तावित परियोजनाओं के मॉडल तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है. इसके अलावा बिहार म्यूजियम के सामने नेहरू पथ, गर्दनीबाग, भूतनाथ रोड सेक्टर-6 और बोरिंग कैनाल रोड स्थित सरकारी जमीनों के पुनर्विकास की भी योजना है. हालांकि, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की विस्तृत डिजाइन, निर्माण की समयसीमा और सटीक स्थान की अंतिम जानकारी अभी सामने नहीं आई है.
55% भूमि भू स्वामियों को दी जाएगी: सरकार की नीति के मुताबिक योजना में भू-स्वामियों को टाउनशिप विकास का प्रत्यक्ष भागीदार बनाया जाएगा. भूमि का पारदर्शी एवं पुनर्गठन किया जाएगा, भूमि के आवंटन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी गई है. 55% भूमि विकसित कर मूल भू-स्वामियों को वापस दी जाएगी. 22% भूमि सड़क एवं आधुनिक अवसंरचना निर्माण हेतु उपयोग में लायी जायगी. इसके आलावे 5% भूमि पार्क, हरित क्षेत्र एवं सार्वजनिक सुविधाओं हेतु आरक्षित रहेगी. 3% भूमि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के आवास हेतु प्रयोग में लाया जाएगा. 15% भूमि सड़क, बिजली, ड्रेनेज एवं सीवर जैसी आधारभूत सुविधाओं की लागत वसूली हेतु प्राधिकरण के पास रहेगी.
छोटे एवं सीमांत भू-स्वामियों का भी रखा जाएगा ख्याल: योजना का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी छोटा भू-स्वामी विकास की प्रक्रिया से बाहर न छूट जाय. इसके अंतर्गत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी व्यक्ति भूमिहीन न हो. सीमांत भू-स्वामियों को सरकार द्वारा भूमि के बदले आवासीय फ्लैट अथवा व्यावसायिक स्थल उपलब्ध कराने की योजना पर कार्य किया जा रहा है. इससे छोटे भू-खण्डों के बदले उन्हें अधिक मूल्यवान, उपयोगी एवं आय-सृजन करने वाली संपत्ति प्राप्त होगी.
ब्लू-ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास: टाउनशिप का विकास 'ब्लू-ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर' की आधुनिक अवधारणा पर आधारित होगा, जिसके अंतर्गत जल निकायों, हरित क्षेत्रों एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण तथा समेकित विकास किया जाएगा. इसके तहत तालाब, नहर, जलाशय एवं प्राकृतिक जल निकासी तंत्र को संरक्षित करते हुए उन्हें शहरी विकास से जोड़ा जाएगा. साथ ही बड़े स्तर पर पार्क, हरित पट्टी (Green Belt), वृक्षारोपण, खुले मैदान एवं पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक स्थान विकसित किए जाएंगे.
वर्षा जल एवं भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा: शहरी जल-जमाव एवं बाढ़ की समस्या से मुक्ति मिलेगी.वायु गुणवत्ता एवं समग्र पर्यावरण में सुधार होगा. तापमान नियंत्रण रहेगा तथा बेहतर माइक्रो-क्लाइमेट (स्थानीय जलवायु) विकसित होगा. नागरिकों को स्वस्थ, स्वच्छ एवं प्राकृतिक वातावरण प्राप्त होगा. यह मॉडल टाउनशिप को पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ, जल-संवेदनशील एवं भविष्य-उन्मुख शहर के रूप में विकसित करने में सहायक होगा.
रोजगार एवं निजी निवेश में वृद्धि: टाउनशिप के विकास से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे. सड़क, भवन, जलापूर्ति, बिजली, सीवर, पार्क एवं अन्य आधारभूत संरचनाओं के निर्माण के दौरान स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त होगा। टाउनशिप विकसित होने के बाद व्यापार, होटल, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, खुदरा बाजार, आईटी सेवाओं एवं अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी, जिससे स्थायी रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे. सुनियोजित अवसंरचना एवं आधुनिक सुविधाओं के कारण निजी निवेशकों, उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का निवेश आकर्षित होगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी.
बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बेहतर काम: नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा ने ईटीटीवी भारत से खास बातचीत के दौरान कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बेहतर काम हुआ है और अब सम्राट चौधरी के नेतृत्व में हम लोग काम को और आगे बढ़ा रहे हैं. शहरीकरण के दौर में हम थोड़े पीछे रह गए थे. इस वजह से 12 सैटेलाइट टाउनशिप को विकसित किया जा रहा है. सरकार ने योजना को मूर्त रूप देने के लिए पूरी तैयारी कर ली है. हुडको के साथ करार पर भी सहमति बन चुकी है.
"इसके अलावा राजधानी पटना को स्पोर्ट्स हब बनाने की तैयारी है. इस दिशा में भी हम लोग तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. नगर विकास एवं आवास विभाग खेल मंत्रालय को जमीन उपलब्ध कराने के लिए तैयार है और जल्द ही इस योजना पर भी काम शुरू हो जाएगा. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर बनाने की बात भी कही है और उस दिशा में हम आगे बढ़ चुके हैं. एक ऐसा सेंटर हम विकसित करने जा रहे हैं जो वाणिज्य एवं व्यापार का केंद्र होगा."-नीतीश मिश्रा, मंत्री, नगर विकास एवं आवास विभाग
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