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बकरी के दूध से बना 'साबुन' है खास, बिहार की महिलाओं का कमाल!

बकरी के दूध से साबुन बनाकर पटना की महिलाएं न सिर्फ कमाई बढ़ा रही हैं, बल्कि लोगों की त्वचा भी सुरक्षित कर रही हैं. रिपोर्ट..

Goat Milk Soap
बकरी के दूध से साबुन से रोजगार (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 15, 2026 at 6:30 PM IST

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  • रिपोर्ट: डॉ. रंजीत कुमार

पटना: बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर महिला सशक्तिकरण वाले राज्य के रूप में पहचान मिली है. बिहार की तरक्की में महिलाएं बढ़-चढ़कर भूमिका निभा रही हैं. राज्य की कुछ महिलाओं ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर बकरी के दूध से साबुन का निर्माण किया है. प्राकृतिक तौर पर निर्मित साबुन की खूब सराहना हो रही है.

बकरी के दूध से हर्बल साबुन: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी बकरी को गरीबों का एटीएम कहा करते थे. बकरी के दूध का इस्तेमाल आमतौर पर डेंगू बीमारी में प्लेटलेट्स मेंटेन रखने के लिए किया जाता है. बदलते दौर में बिहार की महिलाएं अब बकरी के दूध का इस्तेमाल साबुन बनाने में कर रही हैं. हर्बल तकनीक से सोप तैयार किया जा रहा है. पटना और मुंगेर जिले की महिलाओं ने संयुक्त प्रयास से हर्बल साबुन बनाने में कामयाबी हासिल की है.

बकरी के दूध का साबुन बनाकर आत्मनिर्भर होतीं महिलाएं (ETV Bharat)

हर्बल तकनीक से होता है तैयार: मुंगेर जिले में अब बकरी का दूध सिर्फ पोषण का स्रोत नहीं है, बल्कि रोजगार का जरिया भी बन चुका है. कटोरिया गांव की महिलाएं बकरी के दूध से हर्बल साबुन तैयार कर रही है. महिलाओं की पहल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है और महिलाएं आत्मनिर्भर भी हो रही है. स्थानीय स्तर पर तैयार किए जा रहे इस 'गोट मिल्क सोप' को त्वचा के लिए लाभकारी बताया जा रहा है. खास बात ये है कि साबुन निर्माण के दौरान किसी भी तरह का रासायनिक का उपयोग नहीं होता है.

'गोट मिल्क सोप' बनाने की प्रक्रिया?: साबुन निर्माण के काम में लगी माया बताती हैं कि साबुन निर्माण की प्रक्रिया में सबसे पहले ताजी बकरी का दूध एकत्र किया जाता है. फिर उसे साफ छनना से छाना जाता है. इसके बाद नारियल तेल और जैतून तेल जैसे प्राकृतिक तेलों का एक मिश्रण तैयार किया जाता है. मिश्रण में नियंत्रित मात्रा में सोडियम हाइड्रॉक्साइड का घोल बनाकर उसे तेल और दूध के मिश्रण में मिलाया जाता है.

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ETV Bharat GFX (ETV Bharat)

उस मिश्रण को लगातार चलाते हुए गाढ़ा किया जाता है और फिर सांचों में डाल कर ठंडा होने के लिए छोड़ दिया जाता है. 24 से 48 घंटे में मिश्रण जम जाता है. इसके बाद साबुन को तीन से चार सप्ताह तक सूखी जगह पर रखा जाता है, जिसे क्योरिंग प्रक्रिया कहा जाता है.

4 फ्रेग्नेंस वाले सोप बनाते हैं हमलोग: सुपरवाइजर माया कुमारी बताती हैं कि हमारे यहां चार प्रकार के फ्रेग्नेंस वाले साबुन बनाए जाते हैं. इनमें वेनिला, लैवेंडर, लेमनग्रास और सैंडल वाले सोप बनते हैं. वो बताती हैं कि साबुन बनाने में 20 से 22 दिन लग जाता है.

Goat Milk Soap
हर्बल तकनीक से होता है तैयार (ETV Bharat)

महिलाओं ने 2 साल तक किया अथक प्रयास: महिलाओं के लिए इस मुकाम पर पहुंचना आसान नहीं था. सेवा भारत की कोऑर्डिनेटर सुष्मिता गोस्वामी बताती हैं कि 2 साल तक साबुन बनाने की प्रक्रिया चली. कई बार साबुन अच्छे बने तो कई बार खराब भी हो गए. हम लोगों ने हिम्मत नहीं हारी और प्रयास जारी रखा. आज की तारीख में 4000 साबुन का निर्माण हम लोग कर लेते हैं और बाजार भी मिल रहा है.

क्या है साबुन की कीमत?: सुष्मिता गोस्वामी बताती हैं कि मुंगेर में एक साबुन की कीमत 60 से 70 रुपये होती है लेकिन मुंगेर से बाहर इसकी कीमत 150 रुपये होती है. व कहती हैं कि हमारे सामने कई चुनौतियां हैं. अभी कई तरह की जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है और बाजार की तलाश भी है. जब बाजार उपलब्ध होगा तो मुमकिन है कि कीमत में थोड़ी कमी आएगी और अधिक से अधिक लोग इसे खरीद पाएंगे.

Goat Milk Soap
बकरी के दूध से साबुन (ETV Bharat)

"हमलोग बकरी पालकों के साथ 2016 से ही काम कर रहे थे. उसी दौरान कुछ बहनों ने कहा कि क्या हम बकरी के दूध से साबुन बना सकते हैं? जिसके बाद हमलोगों ने इसके बार में प्रक्रिया की जानकारी ली. शुरू में कई तरह की दिक्कतें आईं. दो साल लगे, जब बहनों की मेहनत से सही तरीके से साबुन बना पाए."- सुष्मिता गोस्वामी, कोऑर्डिनेटर, सेवा भारत

महिलाएं हो रही हैं आत्मनिर्भर: साबुन निर्माण में डेढ़ दर्जन महिलाओं को फिलहाल रोजगार मिला हुआ है और वह आत्मनिर्भर भी हो रही हैं. जैसे-जैसे बिक्री बढ़ रही है, वैसे-वैसे महिलाओं का उत्साह भी बढ़ रहा है. महिलाएं आने वाले दिनों में प्रोजेक्ट को व्यापक रूप देने की तैयारी में है. एक महिला की कमाई लगभग 15000 महीने की हो जाती है.

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महिलाएं हो रही हैं आत्मनिर्भर (ETV Bharat)

पहले महिलाएं करती थीं बकरी पालन: अश्विनी भी साबुन निर्माण प्रक्रिया में लगी है और पटना में रहकर महिलाओं को सहयोग करती हैं. वह बताती हैं, 'महिलाएं बकरी पालन कर रही थी और उसके दूध का व्यवसाय भी हो रहा था. हम लोगों को आइडिया आया कि क्यों नहीं बकरी के दूध से साबुन का निर्माण कराया जाए? तमाम महिलाओं के साथ मिलकर यह प्रयास शुरू हुआ और अंततः हम लोगों ने साबुन निर्माण करने में कामयाबी हासिल की.'

'गोट मिल्क सोप' के फायदे: जानकार कहते हैं कि बकरी के दूध से बने साबुन त्वचा के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. इसमें प्राकृतिक वसा औप प्रोटीन होते हैं, जो त्वचा को नमी प्रदान करते हैं. विटामिन और खनिज के कारण त्वचा को पोषण मिलता है. संवेदनशील त्वचा वालों के लिए यह बेहतरीन विकल्प है. गोट मिल्क सोप में एक्सफोलिएंटिंग और जीवाणुरोधी गुण भी होते हैं.

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ETV Bharat GFX (ETV Bharat)

"बकरी के दूध में लैक्टिक एसिड और कई प्रकार के विटामिन पाए जाते हैं, जो त्वचा को मुलायम और स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं. बकरी के दूध में मौजूद लैक्टिक एसिड, विटामिन A, D और E त्वचा के लिए फायदेमंद और गुणकारी माना जाता है. इसी गुण को ध्यान में रखते हुए साबुन का निर्माण किया गया है जिसे केमिकल-फ्री और स्किन-फ्रेंडली साबुन के रूप में जाना जा रहा है."- संजय कुमार, विशेषज्ञ, वनस्पति विज्ञान

Goat Milk Soap
'गोट मिल्क सोप' (ETV Bharat)

बहुत फायदेमंद है यह साबुन: तारापुर क्षेत्र के रहने वाले स्थानीय निवासी और स्वयंसेवी राजेश ठाकुर कहते हैं कि महिलाओं का प्रयास सराहनीय है. ग्रामीण महिलाओं ने जिस तरीके के साबुन का निर्माण किया है, वह काबिले तारीफ है. स्थानीय लोग साबुन खरीद भी रहे हैं और उसके इस्तेमाल के बाद फायदे भी बता रहे हैं. हमने भी इस्तेमाल किया है, साबुन बेहतर है और कई तरह के स्कीम की समस्या से लोगों को मुक्ति मिलती है.

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