मिलिये सुरमयी संगीत शिक्षिका शालिनी से.. अक्षर ज्ञान के साथ-साथ गाकर पढ़ाती हैं श्रीमद्भगवद्गीता का श्लोक
बिहार की एक लेडी टीचर श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक गाकर सिखाने के अनोखे अंदाज के लिए चर्चा में हैं. बच्चे भी काफी खुश हैं.. स्पेशल रिपोर्ट..

Published : January 4, 2026 at 9:19 AM IST
रिपोर्ट: रत्नेश कुमार
गया: बिहार के गयाजी में एक विद्यालय ऐसा है, जहां पढ़ाई तो होती ही है. साथ ही यहां 'गीता' के सार को सुरों में पिरोकर बच्चों को बताया जाता है. इस विद्यालय में अक्षर ज्ञान के साथ-साथ सुरों के रूप में गीता का ज्ञान भी बांटा जा रहा है. इस विद्यालय की शिक्षिका शालिनी राजपूत ने नई पीढ़ी को गीता रूपी ज्ञान संगीत के माध्यम से बांटकर बच्चों को संस्कारित करने की ठानी है.
अनोखे अंदाज में सुनाती हैं गीता का श्लोक: यही वजह है कि वह अपनी क्लास में हिंदी-अंग्रेजी के अक्षर ज्ञान के साथ-साथ गीता के सार को सुरों के रूप में पिरोकर गाती है. शालिनी की आवाज इतनी मधुर है कि उनके मुंह से निकलने वाले गीता के सार बच्चों को सीधे समझ में आ जाते हैं. हिंदी में सार और संस्कृत के श्लोक में शालिनी ऐसी शिक्षा देकर चर्चा में आ गई है.
सुरों में पिरोकर बताती हैं गीता का सार: 23 वर्षीय शालिना गया स्थित दया प्रकाश सरस्वती विद्या मंदिर में म्यूजिक और हिंदी की टीचर हैं. शालिनी के कारण यह विद्यालय चर्चा में है और सोशल मीडिया पर छाया हुआ है. शालिनी अपने क्लास में बच्चों को सिर्फ किताबें ही नहीं, बल्कि संस्कार युक्त ज्ञान भी बांटती है. विद्यालय में शालिनी 'गीता' का पाठ हिंदी के सार में और श्लोक संस्कृत के सार में ऐसा गाती है कि बच्चे मंत्र मुग्ध हो जाते हैं. इस विद्यालय के बच्चे भी अब गीता के सार को समझने और बोलने लगे हैं.

बिना उपकरण के भी आश्चर्य वाली तान: हारमोनियम पर थिरकती शालिनी के हाथों की उंगलियां और होठों से मधुर स्वर हर किसी का ध्यान खींच लेता है. वहीं, बिना उपकरण के आश्चर्य वाली तान और गान, यह बताता है कि शालिनी संगीत की दुनिया में प्रतिभा की धनी है. वह खुद भी मानती है कि उसे बड़ा मुकाम पाना है. वह बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को भी बड़ा लक्ष्य मानती है, जिनका संस्कार युक्त भविष्य हो. फिलहाल शालिनी बताती हैं कि उन्हें संगीत विरासत में मिली है.

3 साल की उम्र से गाने की शुरुआत: शालिनी राजपूत महज 3 साल की उम्र से ही गा रही हैं. उनके पिता के अनुसार वह महज 3 साल की थी, तभी से ही जहां भी माइक देखती थी तो उसे पकड़ लेती थी और कुछ न कुछ बोलती थी या गाती थी. वैसे उनके पिता सियाराम और दादा भी संगीत प्रेमी थे. उन्हें भी संगीत की अच्छी खासी जानकारी थी.

बढ़ती उम्र के साथ संगीत से लगाव: ईटीवी भारत से बातचीत में शालिनी बताती हैं कि उनके पिता ने महज 3 साल की उम्र से ही उसमें संगीत की प्रतिभा दिखती थी. वहीं, उन्हें संगीत से बढ़ती उम्र के साथ लगाव हो गया. वह बिहार के औरंगाबाद जिले की रहने वाली हैं. पिछले 3 सालों से लगातार इस तरह की शिक्षा बच्चों को दे रही हैं. वह सिलेबस ही नहीं, बल्कि बच्चे कैसे संस्कारवान बनें, उसकी नींव डालने की कोशिश करती है. इसी को लेकर वह गीता के सुर को बच्चों को गाकर बताती है. बच्चे भी उससे जुड़ते हैं. संस्कृत में गीता का श्लोक भी गाती है. बच्चे इसे लेकर काफी उत्साहित रहते हैं.

कब से गाकर पढ़ाना शुरू किया?: शालिनी ने इसकी शुरुआत तब की थी, जब कुछ साल पहले उन्होंने बच्चों को टेंशन में देखा था. परीक्षा को लेकर बच्चे टेंशन में थे तो उसके बीच उन्होंने गीता गाकर सुनाना शुरू किया. बच्चे इससे तनाव मुक्त हुए और फिर बच्चों को भी काफी लगाव हो गया. इस तरह की पहल के बाद विधालय में तीसरी से लेकर हर कक्षा के बच्चे उससे सीधे जुड़ते हैं और किसी भी परेशानी को बताते हैं.

बच्चों को कैसा लगता है ये अंदाज?: शालिनी बताती हैं कि बच्चे अब इसमें रुचि भी रखते हैं. उन्हें जरा भी यह उबाऊ नहीं लगता है. उन्होंने वर्ष 2023 में विद्यालय ज्वाइन किया था. तब से गीता के हिंदी सार, संस्कृत श्लोक का स्मरण बच्चों को गाकर कराती हैं. गीता के अर्थो को बताती हैं. अभी फिलहाल में विद्यालय में 2500 बच्चे हैं. छोटे बच्चों को छोड़कर जो भी बड़े बच्चे हैं, वे गीता के कई मुश्किल शब्दों का उच्चारण कर रहे हैं.

निरंतर अभ्यास करवाती हूं श्लोक: शालिनी राजपूत बताती हैं कि वह गाकर बताती हैं. निरंतर अभ्यास भी करवाती हैं. हिंदी में सार, संस्कृत में श्लोक वह संगीत के रूप में गाती हैं. वह बताती हैं कि शुरू से ही अपने घर में श्रीमद्भगवद्गीता का ग्रंथ पढ़ती थीं. श्लोक पढती थीं और अर्थों को समझती थीं. इस कलयुग में संस्कार युक्त हमारे बच्चों की पीढ़ी हो, वह गीता के सार से ही संभव हो सकता है. संगीत से जुड़ने के बाद भजनों से जुड़ गईं. अनूप जलोटा की तरह बड़ा मुकाम हासिल करना चाहती हैं.
"संगीत के क्षेत्र में जुड़ने के बाद मैं किशोरावस्था से ही भजनों से जुड़ गईं थीं. मुझे विरासत में संगीत मिली है. अभी विधालय में म्यूजिक और हिंदी की टीचर हूं. गजना महोत्सव समेत अनेक कई विशेष अवसरों पर उसे पुरस्कार भी मिला है. वह अनूप जलोटा की तरह बड़ा मुकाम हासिल करना चाहती हूं."- शालिनी राजपूत, म्यूजिक और हिंदी टीचर

बॉलीवुड-भोजपुरी गाना गाती हैं शालिनी: शालिनी बताती हैं कि वह बॉलीवुड के अलावा भोजपुरी गाने भी गा लेती हैं. हालांकि उनकी सबसे इच्छा यही है कि सभी लोग गीता का सार समझे और उसका अर्थ समझकर सही रास्ते पर चले. अगर ऐसा हुआ तो बहुत सारी समस्याओं का समाधान खुद ब खुद हो जाएगा. वह अपने गुरु अमित मिश्रा का धन्यवाद कहना चाहती हैं. जिनसे उन्होंने संगीत की शिक्षा ली. संगीत की शिक्षा के लिए रांची में भी कुछ समय तक रहना पड़ा था.
ये भी पढ़ें:
मैडम नंदिनी जी के पढ़ाने का अंदाज तो देखिए.. आप भी कहेंगे- भई वाह क्या बात है
बांका की इस टीचर के पढ़ाने का अंदाज है निराला, खेल-खेल में बच्चों को बांट रहीं ज्ञान
राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होंगे सीतामढ़ी के ये शिक्षक, पढ़ाने का अंदाज देख कह उठेंगे भई वाह..

