बिहार में कमाल के 'शायर डॉक्टर', चीन से MBBS और इलाज में गजलों की डोज
बिहार के शायर डॉक्टर सिर्फ इंजेक्शन ही, क्लीनिक में दवा के साथ गजलों का भी डोज देते हैं. नेशनल डॉक्टर्स-डे पर Sartaj Ahmed की रिपोर्ट-

Published : July 1, 2026 at 4:45 PM IST
गया : सफेद कोट पहने एक डॉक्टर, सामने बैठे मरीज की नब्ज टटोल रहे हैं लेकिन अगले ही पल वह स्टेथोस्कोप हटाकर अपनी डायरी खोलता है और गजल सुनाने लगता है. कुछ मिनट पहले तक चिंता में डूबा मरीज मुस्कुराने लगता है. इसी बीच क्लीनिक के अंदर का माहौल बदल जाता है.
कमाल के शायर डॉक्टर सुमित : डॉक्टर सुमित कुमार इलाज शुरू करने से पहले मरीजों को कई बार गजल, नज्म या कविता सुनाते हैं. मरीजों से बातचीत करते हैं, उनकी मानसिक स्थिति समझते हैं और फिर जरूरत के अनुसार दवा देते हैं. यही कारण है कि आसपास के गांवों में लोग उन्हें 'शायर डॉक्टर' के नाम से पहचानने लगे हैं.
मरीजों को दवा से पहले गजलों का डोज : आज की तेज रफ्तार जिंदगी में मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद तेजी से बढ़ रहे हैं. कई लोग छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर भी घबराहट और बेचैनी महसूस करने लगते हैं. ऐसे मरीज जब डॉ. सुमित के पास पहुंचते हैं तो उन्हें सिर्फ मेडिकल जांच का सामना नहीं करना पड़ता. डॉक्टर पहले उनसे खुलकर बात करते हैं, फिर माहौल को सहज बनाने के लिए अपनी लिखी गजल, नज्म या शायरी सुनाते हैं.
मरीज को शायरी थेरेपी फिर इलाज : कुछ मिनट पहले तक उदास बैठा मरीज शायरी सुनते-सुनते मुस्कुराने लगता है. कई बार पूरा क्लीनिक तालियों की गूंज से भर जाता है. इसके बाद डॉक्टर मरीज की मानसिक स्थिति को समझते हैं और फिर इलाज शुरू करते हैं. डॉ. सुमित का कहना है कि दवा का असर बढ़ाने में 'खुश मन' मदद करता है.

"पहले मैं कभी नशे का आदी था. नशा छोड़ने पर बेचैनी और घबराहट के साथ कई तरह की परेशानियां होने लगीं. कई डॉक्टरों से इलाज कराया लेकिन राहत नहीं मिली. फिर मैं डॉक्टर सुमित के पास पहुंचा जहां उन्होंने गीत-गजल और शायरियों में मेरा कब काउंसिलिंग शुरू कर दिया मुझे पता ही नहीं चला. अब मैं काफी स्वस्थ महसूस कर रहा हूं."- मुकेश सिंह, मरीज, बोधगया
मां पर लिखी कविता से महिला मरीज को मिला आत्मविश्वास : कटोरवा गांव की रीता देवी बताती हैं कि घरेलू समस्याओं के कारण वह लंबे समय तक मानसिक तनाव में रहीं. उन्हें बार बार पेट दर्द और बेचैनी की शिकायत होती थी. कई अस्पतालों में इलाज कराया लेकिन कुछ समय बाद फिर वही परेशानी शुरू हो जाती थी. इसी दौरान वह डॉ. सुमित के स्वास्थ्य शिविर में पहुंचीं. वहां डॉक्टर अपनी मां की स्मृति में लिखी कविता सुना रहे थे. जिसे मैने भी सुना और तब से उनका जीवन बदल गया.

''मां पर लिखी कविता सुनते-सुनते मुझे लगा जैसे कोई मेरे अपने जीवन की कहानी कह रहा हो. बाद में डॉक्टर ने उनसे विस्तार से बात की, जांच कराई, दवा दी और मानसिक रूप से मजबूत बनने के लिए प्रेरित किया. आज मैं खुद को पहले से काफी बेहतर महसूस कर रही हूं.''- रीता देवी, मरीज
महिलाओं की पीड़ा पर लिखी कविताएं बनीं चर्चा का विषय : संध्या कुमारी बताती हैं कि जब भी किसी घटना से उनका मन विचलित होता है, उन्हें डॉ. सुमित की कविताएं याद आती हैं. खासकर महिलाओं के मासिक धर्म, सामाजिक भेदभाव और सम्मान जैसे विषयों पर लिखी उनकी रचनाएं उन्हें काफी प्रेरित करती हैं. उनके अनुसार, डॉक्टर सिर्फ इलाज नहीं करते बल्कि समाज को सोचने का नया नजरिया भी देते हैं.
'मरीज नहीं परिवार की तरह करते हैं व्यवहार' : डॉ. सुमित का सबसे अलग अंदाज यही है कि वे मरीजों को कभी डराने या जल्दबाजी में विदा करने की कोशिश नहीं करते. मरीज जितना समय देना चाहे, वे उतनी देर उसकी बात सुनते हैं. कई बार क्लीनिक में ऐसा माहौल बन जाता है जैसे किसी मुशायरे की महफिल चल रही हो. ग्रामीण भी कहावतों और तुकबंदी के जरिए बातचीत में शामिल हो जाते हैं. इस माहौल में मरीज खुलकर अपनी परेशानी बताते हैं, जिससे सही इलाज करना आसान हो जाती है.

बचपन से था डॉक्टर और शायर बनने का सपना : कटोरवा गांव निवासी डॉ. सुमित कुमार के पिता प्रवीण कुमार भी चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हैं. महावीर विद्यालय से मैट्रिक और गया कॉलेज से इंटरमीडिएट करने के बाद वे वर्ष 2013 में चीन के जियामुसी मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए गए. वर्ष 2019 में डिग्री लेकर भारत लौटे और एफएमजीई परीक्षा पास कर डॉक्टर के रूप में अपना करियर शुरू किया.
''बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए परिवार ने काफी संघर्ष किया. आज जब लोग उसे एक संवेदनशील चिकित्सक और शायर के रूप में पहचानते हैं तो यह हमारे पूरे परिवार के लिए गर्व की बात है.''- प्रवीण कुमार, डॉ. सुमित कुमार के पिता

'सिगरेट, चाय और तुम' से मिली साहित्यिक पहचान : अपनी रचनाओं को डॉ. सुमित ने 'सिगरेट, चाय और तुम' नामक पुस्तक में संकलित किया है. किताब का नाम रखने के पीछे उनका तर्क भी दिलचस्प है. उनका कहना है कि समाज में लोग चाय या सिगरेट के साथ घंटों बहस करते हैं, लेकिन सामाजिक बुराइयों को खत्म करने के लिए ठोस पहल कम होती है. इसलिए उन्होंने इसी प्रतीकात्मक नाम को चुना. किताब में सामाजिक समानता, महिलाओं के सम्मान, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक कुरीतियों पर आधारित कई गजलें और नज्म शामिल हैं.
नीट पीजी की तैयारी लेकिन गरीब मरीजों की सेवा नहीं छोड़ी : फिलहाल डॉ. सुमित अपने घर पर रहकर नीट पीजी की तैयारी कर रहे हैं. सुबह और शाम मरीजों को देखते हैं, जबकि दिनभर ऑनलाइन पढ़ाई करते हैं. इसके बावजूद उन्होंने जरूरतमंद मरीजों के लिए अपना क्लीनिक खुला रखा है. सबसे खास बात यह है कि वे मरीजों से कोई परामर्श शुल्क नहीं लेते.

पिता बोले बेटे की पढ़ाई के लिए जमीन तक बेच दी थी : डॉ. सुमित के पिता प्रवीण कुमार बताते हैं कि आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी. बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए परिवार ने जमीन तक बेच दी. चीन में पढ़ाई के दौरान भी कई कठिनाइयां आईं, लेकिन बेटे ने मेहनत नहीं छोड़ी. आज जब लोग उसे डॉक्टर के साथ शायर के रूप में भी पहचानते हैं तो पूरे परिवार को गर्व होता है.
''मैंने पढ़ाई के फैसले को पत्नी और पिता से डिस्कस किया था सभी ने मेरे निर्णय का स्वागत किया था पत्नी या पिता से मैं अपनी पढ़ाई के लिए या अपने खर्च के लिए एक रुपए भी नहीं लेता हूं, क्योंकि आगे पढ़ाई के लिए पिछले दो सालों से मैं सोच रहा था और इसके लिए मैं ने खुद की कमाई की सेविंग भी की है उसी से मैं आगे बढ़ रहा हूं.''- डॉ सुमित कुमार, शायर चिकित्सक

परिवार बना सबसे बड़ी ताकत : डॉ. सुमित की पत्नी राजस्थान में सरकारी चिकित्सक हैं. डॉक्टर सुमित बताते हैं कि आगे की पढ़ाई का फैसला उन्होंने पत्नी और पिता से चर्चा के बाद लिया. दोनों ने उनका पूरा साथ दिया. वे यह भी कहते हैं कि उन्होंने अपनी पढ़ाई और खर्च के लिए किसी से आर्थिक मदद नहीं ली, बल्कि नौकरी के दौरान की गई बचत से तैयारी कर रहे हैं.
''मैंने पढ़ाई के फैसले को पत्नी और पिता से डिस्कस किया था सभी ने मेरे निर्णय का स्वागत किया था पत्नी या पिता से मैं अपनी पढ़ाई के लिए या अपने खर्च के लिए एक रुपए भी नहीं लेता हूं, क्योंकि आगे पढ़ाई के लिए पिछले दो सालों से मैं सोच रहा था और इसके लिए मैं ने खुद की कमाई की सेविंग भी की है उसी से मैं आगे बढ़ रहा हूं.''- डॉ सुमित कुमार, शायर चिकित्सक

'कविता इलाज नहीं करती लेकिन हौसला देती है' : डॉ. सुमित कहते हैं कि लोग यह न समझें कि गजल या कविता किसी बीमारी का इलाज है. इलाज हमेशा दवा और चिकित्सा पद्धति से ही होता है. कविता और शायरी केवल मरीज के मन का तनाव कम करती है, उसे सकारात्मक सोच देती है और बीमारी से लड़ने का आत्मविश्वास बढ़ाती है. जब मरीज खुश रहता है तो इलाज का असर भी बेहतर दिखाई देता है.
इलाज का ऐसा अंदाज जिसने बना दी अलग पहचान : बोधगया के डॉ. सुमित कुमार ने साबित कर दिया है कि डॉक्टर का काम सिर्फ बीमारी की पहचान कर दवा लिख देना नहीं होता, बल्कि मरीज के मन को समझना भी उतना ही जरूरी होता है. डॉ. सुमित कुमार इसी सोच को अपनी पहचान बना चुके हैं. उनके क्लीनिक में आने वाले मरीज सिर्फ दवा लेकर नहीं लौटते, बल्कि मुस्कुराते हुए बाहर निकलते हैं.
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