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बिहार के इस गांव के लोग गंभीर बीमारी से पीड़ित, 40 की उम्र में थामनी पड़ती है लाठी

गया के पोखरिया गांव के लोग गंभीर बीमारी से पीड़ित है. बिना लाठी के चलना, खड़ा होना और बैठना मुस्किल है.

Gaya District Pokhariya Village
पोखरिया गांव से ग्राउंड रिपोर्ट (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : December 23, 2025 at 6:44 PM IST

8 Min Read
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रिपोर्ट: रत्नेश कुमार

गया: "55 साल के ईश्वरी यादव बिना लाठी के नहीं चल सकते हैं. 40 साल की उम्र से ही हाथों में लाठी पकड़ ली. बिना लाठी के चलने की कोशिश भी करते हैं तो गिर जाते हैं." ऐसा हाल सिर्फ ईश्वरी यादव ही नहीं बल्कि श्याम देव यादव, रामलाल यादव सहित कई महिला-पुरुष का है, जो गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं.

लोग गंभीर बीमारी के शिकार: ईटीवी भारत की टीम गया जिला मुख्यालय से 60 किमी दूर बाराचट्टी प्रखंड के पोखरिया गांव पहुंची. वहां जाकर पता चला कि गांव के लोग गंभीर बीमारी से पीड़ित है. किस बीमारी से पीड़ित हैं, इसकी जानकारी न स्वास्थ्य विभाग को न ही यहां के लोगों को है.

पोखरिया गांव से ग्राउंड रिपोर्ट (ETV Bharat)

25 से 30 लोगों के हाथ में लाठी: लाठी के सहारे कमर झुकाकर चलने वाले ईश्वरी यादव कहते हैं कि गांव में 100 घर है, जहां 500 लोगों का परिवार है. इसमें से 25 से 30 लोग कुबड़ापन के शिकार हैं. ईश्वरी यादव जब 40 साल के थे उसी समय इस बीमारी से ग्रसित हो गए. अब लाठी के सहारे चलना पड़ता है.

"यह बीमारी घुटना से शुरू हुई थी. इसके बाद कमर, रीढ़ और फिर गर्दन तक पहुंच गयी. बिना लाठी के नहीं चल पाते. कोशिश करते हैं तो गिर जाते हैं. बिना लाठी के घुटना शरीर का भार नहीं उठा पाता है." -ईश्वरी यादव, पीड़ित

Pokhariya Village People Suffering From Hunchback Disease
पोखरिया गांव का हाल (ETV Bharat)

घर में नहीं मिलती इज्जत: यही हाल श्यामदेव यादव का भी है. श्यामदेव जवानी में काम छोड़ चुके हैं. इन्हें घर में वह इज्जत नहीं मिलती जो काम करने पर मिलती थी. कहते हैं कि 'कमर झुक गया है. जैसे लोग कुबड़े हो जाते हैं, उसी तरह हो गए हैं. 40 की उम्र से यही हाल है. अब लाठी ही एकमात्र सहारा है.' श्यामदेव कहते हैं कि यह बीमारी कैसे और क्यों हो गयी, इसका आजतक पता नहीं चल पाया.

"40 की उम्र में ऐसी हालात हो गयी. काफी लंबे समय से इसी तरह जी रहे हैं. अब यह बीमारी मरने के बाद ही खत्म होगी. हमलोग बेबस हो गए हैं. जवानी की उम्र में शरीर ने साथ छोड़ दिया. कोई काम नहीं कर पाते हैं." -श्यामदेव यादव, पीड़ित

Pokhariya Village People Suffering From Hunchback Disease
गांव के पीड़ित लोग (ETV Bharat)

'प्रशासन से नहीं मिली मदद': श्यामदेव बताते हैं कि गांव के कई लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं, लेकिन आज तक कोई मेडिकल टीम इस गांव में नहीं आयी. आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण पैसे नहीं है, इसलिए इलाज नहीं करा पा रहे हैं. सरकार और प्रशासन हमारी मदद नहीं करती है.

'घुटना से गर्दन तक दर्द': रामलाल यादव को 40 साल की उम्र में घुटना में दर्द शुरू हुआ था. इसके बाद कमर और फिर रीढ़ से होकर दर्द गर्दन तक पहुंच गयी. बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती गयी और जिंदगी लाठी के सहारे हो गयी. रामलाल बताते हैं कि बिना लाठी के एक कदम नहीं चल सकते हैं. अगर चलना चाहते हैं तो मुंह के बल गिर जाते हैं.

Pokhariya Village People Suffering From Hunchback Disease
गांव के पीड़ित लोग (ETV Bharat)

"रीढ में ऐसा दर्द होता है कि चलना फिरना मुश्किल हो गया है. बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती गई और अब हमारी जिंदगी लाठी के भरोसे रह गई है. यदि लाठी नहीं हो चलना मुश्किल हो जाता है. बिना लाठी के सहारे न बैठ सकते हैं न खड़ा हो सकते हैं और न ही चल सकते हैं." - रामलाल यादव, पीड़ित

'5 दशकों से गांव में बीमारी': रामलाल यादव बताते हैं कि यहां के पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी इस बीमारी से पीड़ित हैं. लोग कहते हैं कि हमलोग कुबड़ापन के शिकार हो गए हैं. यह बीमारी पिछले चार-पांच दशकों से फैली है. कुछ लोग आर्थिक रूप से संपन्न हैं तो वे गया और पटना के डॉक्टरों से इलाज कराते हैं.

गांव के पानी में खराबी: यह बीमारी क्यों और कैसे हुई इसकी जानकारी किसी को नहीं है. ईश्वरी यादव बताते हैं कि पता ही नहीं चलता है कि यह बीमारी खाना या पानी के कारण हुआ है या मेरे शरीर में ही कोई कमी है. ऐसा लगता है कि गांव के पानी में खराबी है.

गया के कई गांव का पानी दूषित: बता दें कि गया जिला का यह पहला गांव नहीं है, जहां पानी दूषित है. इससे पहले ईटीवी भारत की टीम बांके बाजार प्रखंड की तिलैया पंचायत में आने वाली भोक्तौरी गांव पहुंची थी. यहां के लोग फ्लोराइड युक्त पानी पीने के कारण फ्लोरिसिस बीमारी से पीड़ित हैं. 200 गांव के इस घर के सभी लोग दिव्यांगता से पीड़ित हैं. किसी की हाइट कम है तो किसे के दांत पीले पड़े हैं. लाठी के सहारे चलना पड़ता है.

Pokhariya Village People Suffering From Hunchback Disease
गांव पीड़ित महिला (ETV Bharat)

पोखरिया गांव में पानी की जांच नहीं: पोखरिया गांव में अब तक पानी की जांच नहीं हुई है, लेकिन इमामगंज विधानसभा क्षेत्र के भोक्तौरी गांव में इसकी जांच हुई थी. पटना से आयी फ्लोराइड निवारण संसाधन की टीम ने गांव के पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पायी थी.

फ्लोराइड की मात्रा अधिक: स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि पोखरिया गांव के पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है. इसी कारण यहां के लोगों को यह बीमारी हो रही है. हालांकि अभी तक गांव के पानी की जांच नहीं करायी गयी है. यहां के कुछ लोग गहराई में बोरिंग या चापाकल लगवाने शुरू कर दिए. कुछ हद तक बीमारी कंट्रोल में है, लेकिन पूरी तरह से सुधार नहीं हुआ है.

ईटीवी भारत GFX
ईटीवी भारत GFX (ETV Bharat)

"इस तरह की बीमारी पोखरिया गांव में है, इसकी जानकारी नहीं थी. मामला संज्ञान में आया है. वहां मेडिकल टीम भेजी जाएगी. पानी में फ्लोराइड की अधिकता होने के कारण यह बीमारी हो सकती है. लोगों का समुचित इलाज कराया जाएगा." -राकेश रंजन, चिकित्सा प्रभारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बाराचट्टी.

'जिला प्रशासन से मदद नहीं': पोखरिया गांव के पीड़ित ईश्वरी यादव कहते हैं कि गांव के कई कूबड़ापन से पीड़ित हैं, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली है. यहां के मुखिया को बीमारी के बारे में पता है लेकिन अभी तक जिले के अधिकारियों तक यह बात नहीं पहुंची. इस मामले पर बाराचट्टी प्रखंड विकास पदाधिकारी कहते हैं कि लोगों को बीमारी से निजात दिलाया जाएगा.

"इस तरह की जानकारी होने के बाद हम लोग इसे गंभीरता से लिए हैं. जो भी आवश्यक कदम होंगे, उसे उठाएंगे. जल्द ही पीड़ित लोगों को इस बीमारी से निजात दिलाएंगे." -अभिषेक कुमार आशीष, प्रखंड विकास पदाधिकारी, बाराचट्टी.

फ्लोराइड क्या है: पटना फ्लोराइड निवारण टीम के अनुसार भूजल में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाला खनिज है. सामान्य तौर पर एक लीटर पानी में 0.6 मिलीग्राम फ्लोराइड होना चाहिए, लेकिन भोक्तौरी गांव में इसकी मात्रा 3.0 मिली ग्राम थी.

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ईटीवी भारत GFX (ETV Bharat)

'फ्लोराइड तीन लोग होते हैं': जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार फ्लोराइड युक्त पानी पीने के कारण तीन प्रकार के रोग होते हैं. पहली डेंटल फ्लोरोसिस है, जिसमें दांतों के रंग में परिवर्तन और धब्बे और धारियां पड़ने लगता है. दूसरा स्केलेटल फ्लोरोसिस, जिसमें मरीज में हड्डियों का विकास रूक जाता है. मांशपेशियों में अकड़न, जोड़ों में दर्द की समस्या बढ़ जाती है.

कंकालीय फ्लोरोसिस: तीसरा गैर कंकालीय फ्लोरोसिस है, जिसमें मरीज को नींद नहीं आती है. शरीर में अलग से नई हड्डी निकल आता है. हड्डियों टेढ़ी हो जाती हैं. घूटना, कमर, पीठ और गदर्न में दर्द होने लगता है. चिकित्सा प्रभारी राकेश रंजन के अनुसार पोखरिया गांव के लोगों में गैर कंकालीय फ्लोरोसिस की शिकायत है, जिसका पता लगाकर इलाज कराया जाएगा.

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ईटीवी भारत GFX (ETV Bharat)

सतर्कता बरतनी जरूरी: इस बीमारी से बचने के लिए लोगों को सतर्कता बरतनी चाहिए. अगर पानी में समस्या है तो उसे उबालकर पीएं. साफ-सफाई का ख्याल रखें. खानपान में बदलाव करने से बीमारी से दूर रहा जा सकता है. विटामिन C, E और कैल्सियम युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए. फल, पत्तेदार सब्जियां, दाल, अंकुरित अनाज का सेवन करना चाहिए.

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