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AI समिट में बिगड़ा मूड, चीनी रोबोट को बताया भारतीय, राहुल गांधी ने भी पूछ डाले सवाल

एआई समिट में रोबोटिक डॉग को लेकर उठे सवाल. चीनी कंपनी के प्रोडक्ट को बताया अपना.

Galgotia university robodog controversy
गलगोटिया यूनिवर्सिटी का रोबोट विवाद (ANI)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : February 18, 2026 at 5:05 PM IST

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Updated : February 18, 2026 at 6:10 PM IST

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नई दिल्ली : एआई समिट एक्सपो में गलगोटिया यूनिवर्सिटी के "रोबोटिक डॉग" पर विवाद थम नहीं रहा है. विश्वविद्यालय का कहना है कि "डेवलप" और "डेवलपमेंट" शब्द को लेकर पूरी गलतफहमी हुई है. दरअल, यूनिवर्सिटी पर चीनी रोबोट प्रदर्शित करने का आरोप लगा है. विवाद बढ़ने के बाद गलगोटिया विश्वविद्यालय ने अपने पवेलियन पर पैदा हुए असमंजस के लिए माफी मांगी, उन्होंने कहा- स्टॉल संभाल रहे प्रतिनिधि को नहीं थी पर्याप्त जानकारी.

सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने विवाद के बाद कहा कि सरकार नहीं चाहती कि कोई भी प्रदर्शक ऐसी वस्तुओं का प्रदर्शित करे जो उसकी अपनी न हों. आयोजकों द्वारा गलगोटिया विश्वविद्यालय को अपना ‘स्टॉल’ खाली करने के लिए कहे जाने के बाद उन्होंने कहा, "हम इस तरह की चीजों को प्रदर्शित करना जारी नहीं रखना चाहते."

विवाद तब शुरू हुआ जब विश्वविद्यालय में संचार की प्रोफेसर नेहा सिंह ने मंगलवार को डीडी न्यूज को "ओरियन" नामक एक "रोबोटिक डॉग" को दिखाते हुए कहा था कि इसे "गलगोटिया विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सिलेंस द्वारा विकसित किया गया है."

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार नितिन कुमार गौड़ ने कहा कि हमारी प्रोफेसर नेहा सिंह ने जो कुछ कहा, उसको समझने की जरूरत थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने कहा, "वीडियो में प्रोफेसर नेहा ने जिस रोबोट को पेश किया, उसमें डेवलप और डेवलपमेंट शब्दों के गलत इस्तेमाल से कन्फ्यूजन हो गया. दरअसल, यह दो शब्दों का मेल है. डेवलप और डेवलपमेंट. हमलोगों ने इसे डेवलप नहीं किया, लेकिन इसके डेवलपमेंट पर काम किया. हम उन्हें लाना चाहते थे, जैसे वह रोबोट लाया गया था और स्टूडेंट्स से इस पर रिसर्च करवाने की कोशिश की गई थी. मैं कह सकता हूं कि शायद प्रोफेसर नेहा फ्लो में डेवलप और डेवलपमेंट शब्दों से कन्फ्यूज हो गई होंगी. लेकिन सच तो यह है कि हमने यह रोबोट बच्चों की रिसर्च के लिए खरीदा था."

विवाद की कैसे हुई शुरुआत

दरअसल, एआई समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक "रोबोडॉग" का प्रदर्शन किया. सोशल मीडिया पर लोगों ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी ने जिस रोबोडॉग का प्रदर्शन किया है, वह चीन से खरीदा गया है. यूनिवर्सिटी ने इस रोबोडॉग को "ओरियन" नाम से पेश किया था. उसे अपने यूनिवर्सिटी का प्रोडक्ट बताया.

सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि इस रोबोडॉग को चीनी कंपनी यूनिट्री ने तैयार किया है और आप इसे ढाई लाख रु. में खरीद सकते हैं. इसके बाद विवाद इतना बढ़ा कि लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी सरकार पर निशाना साधा. राहुल गांधी ने इसे सरकार का प्रचार तंत्र बताया.

विवाद के बाद यूनिवर्सिटी ने दी सफाई

विवाद बढ़ने के बाद गलगोटिया विश्वविद्यालय ने बयान जारी किया और कहा, "रोबोटिक प्रोग्रामिंग छात्रों को एआई प्रोग्रामिंग सिखाने और वैश्विक स्तर पर उपलब्ध उपकरणों एवं संसाधनों का उपयोग करके वास्तविक दुनिया के कौशल विकसित करने और उन्हें क्रियान्वित करने के हमारे प्रयास का हिस्सा है, क्योंकि एआई प्रतिभा का विकास समय की आवश्यकता है."

विश्वविद्यालय ने कहा कि उसके संकाय एवं छात्र, उनके खिलाफ चलाए गए दुष्प्रचार अभियान से बेहद आहत हैं. विश्वविद्यालय का मकसद छात्रों को सिखाना और नवाचार पर ध्यान देना है. यह छात्रों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने और भविष्य के लिए तैयार होने में मदद करने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकियों तक पहुंच प्रदान करता है.

यूनिवर्सिटी की ओर से जारी बयान में कहा गया, "नकारात्मकता फैलाने से उन छात्रों का मनोबल गिर सकता है जो वैश्विक प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके नवाचार करने, सीखने और अपने कौशल को विकसित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं."

विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि इस अभ्यास का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर उपलब्ध मंचों और उपकरणों का उपयोग करके व्यावहारिक एआई प्रोग्रामिंग कौशल प्रदान करना था.

प्रोफेसर नेहा सिंह ने भी दी सफाई

गलगोटिया विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नेहा सिंह ने कहा, "यह विवाद इसलिए खड़ा हुआ क्योंकि शायद बातों को स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं किया गया और इसके पीछे की मंशा को ठीक से समझा नहीं गया."

उन्होंने कहा, "रोबोट डॉग’ के बारे में हम यह दावा नहीं कर सकते कि हमने इसे बनाया है. मैंने सभी को बताया है कि हमने इसे अपने छात्रों के समक्ष इसलिए पेश किया ताकि वे खुद कुछ बेहतर बनाने के लिए प्रेरित हों. हमारा विश्वविद्यालय कृत्रिम मेधा (एआई) के क्षेत्र में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी प्रदान करके भविष्य के दिग्गज बनाने में योगदान देता है और आगे भी ऐसा करना जारी रखेगा."

क्या उन्हें स्टॉल हटाने को कहा गया है, इस सवाल को लेकर उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया.

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट एक पांच दिवसीय कार्यक्रम है. नीति निर्माताओं, प्रौद्योगिकी कंपनियों, नवप्रवर्तकों, शिक्षाविदों और उद्योग जगत के नेताओं को एक साथ लाकर, यह शिखर सम्मेलन वैश्विक एआई विचार-विमर्श को इंडिया एआई मिशन और डिजिटल इंडिया पहल के तहत व्यावहारिक विकास परिणामों में बदलने का प्रयास करता है.

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Last Updated : February 18, 2026 at 6:10 PM IST