भारत लौटने की कोई पक्की तारीख नहीं बता सकता, हाई कोर्ट से कहा भगोड़ा विजय माल्या
वकील के जरिये बॉम्बे हाई कोर्ट में दिए बयान में, विजय माल्या ने कहा कि वह भारत लौटने की कोई निश्चित तारीख नहीं बता सकता.

Published : February 18, 2026 at 7:29 PM IST
मुंबई: धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के कई केस झेल रहे भगोड़े बिजनेसमैन विजय माल्या ने बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि वह यह नहीं बता सकता कि वह भारत कब लौटेगा, क्योंकि कानूनी तौर पर उन पर ब्रिटेन छोड़ने पर रोक है.
वकील अमित देसाई के जरिये हाई कोर्ट में दिए गए एक बयान में, माल्या ने कहा कि पासपोर्ट रद्द होने के बाद उसके पास सक्रिय पासपोर्ट नहीं है और इसलिए, वह भारत लौटने की कोई निश्चित तारीख नहीं बता सकता.
पिछले हफ्ते बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड़ की पीठ ने साफ किया था कि जब तक माल्या भारत वापस नहीं आ जाता, तब तक वह उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के आदेश के खिलाफ उसकी याचिका पर सुनवाई नहीं करेगी. साथ ही कोर्ट ने माल्या से यह स्पष्ट करने को कहा था कि उसका भारत लौटने का इरादा है या नहीं.
माल्या 2016 से ब्रिटेन में रह रहा है. उसने हाई कोर्ट में दो पिटीशन फाइल की हैं -- एक में उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के आदेश को चुनौती दी गई है और दूसरी में भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया गया है. 70 वर्षीय शराब कारोबारी माल्या पर कई हजार करोड़ रुपये के कर्ज चुकाने में डिफॉल्ट होने और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं.
माल्या ने हाई कोर्ट को दिए अपने बयान में कहा कि वह अपनी वापसी की कोई पक्की तारीख नहीं बता सकते क्योंकि उनके पास उनका भारतीय पासपोर्ट नहीं है, जिसे सरकार ने 2016 में रद्द कर दिया था, और इसलिए भी क्योंकि इंग्लैंड और वेल्स की अदालतों के आदेश हैं जो उन्हें देश छोड़ने से रोकते हैं.
माल्या को इंग्लैंड और वेल्स छोड़ने पर रोक
देसाई ने कोर्ट में बयान पढ़ते हुए कहा, "माल्या को इंग्लैंड और वेल्स छोड़ने या छोड़ने की कोशिश करने या किसी इंटरनेशनल ट्रैवल डॉक्यूमेंट के लिए आवेदन करने या उसके पास होने की इजाजत नहीं है. किसी भी हालत में, याचिकाकर्ता यह ठीक से नहीं बता सकता कि वह भारत कब लौटेगा."
वरिष्ठ वकील ने दोहराया कि भगोड़े के टैग और अधिनियम के नियमों के खिलाफ उसकी अपील सुनने के लिए कोर्ट को माल्या का देश में होना जरूरी नहीं है. देसाई ने कोर्ट को बताया, "अगर वह (माल्या) भारत में पेश होता है, तो ये सभी कार्रवाई बेमतलब हो जाएंगी क्योंकि कानून कहता है कि एक बार जब अपराधी संबंधित कोर्ट में पेश हो जाता है, तो ये सभी आदेश रद्द हो जाएंगे."
पीठ ने केंद्र सरकार को माल्या के बयान पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई मार्च के लिए टाल दी. माल्या को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामलों की सुनवाई करने वाली एक स्पेशल कोर्ट ने जनवरी 2019 में भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था. माल्या मार्च 2016 में भारत छोड़कर चला गया था.
यह भी पढ़ें- पुणे पोर्श कार हादसा: सुप्रीम कोर्ट ने 20 महीने से जेल में बंद आरोपी को दी जमानत

