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जब भारत आए थे ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई, कर्नाटक के अलीपुर गांव से था खास कनेक्शन

साल 1980 में खामेनेई ने भारत का दौरा किया था. इस दौरान वे कर्नाटक के अलीपुर गांव गए थे.

From Alipur to Tehran
कर्नाटक के अलीपुर गांव से था ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई का खास कनेक्शन (AFP and ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : March 2, 2026 at 8:56 PM IST

6 Min Read
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अलीपुर (कर्नाटक): अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के खिलाफ जंग छेड़ दिया है और जिसका असर पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है. ऐसे में बात कर रहे हैं,बेंगलुरु से करीब 90 किलोमीटर दूर गौरीबिदानूर तालुक का एक छोटा सा गांव अलीपुर के बारे में. जानें क्या है इसका ईरान से कनेक्शन.

ईरान के सुप्रीम लीडर, अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की खबर आने के बाद से अलीपुर गांव में सन्नाटा सा पसरा हुआ था. दुकानें बंद थीं, काम रुका हुआ था और लोगों द्वारा खामेनेई के लिए खास प्रार्थनाएं की गईं.

How a Karnataka Village Shares Decades-Old Ties With Ayatollah Khamenei and Iran
कर्नाटक के अलीपुर गांव से था खामेनेई का खास कनेक्शन (ETV Bharat)

यहां के लोग ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत पर शोक मना रहे थे. जिनके बारे में उनका कहना है कि उनके शहर से अयातुल्ला अली खामेनेई का गहरा रिश्ता था. करीब 25,000 लोगों वाले इस शिया-बहुल गांव के लिए ईरान के सुप्रीम लीडर के लिए खास जगह है.

एक ऐसा रिश्ता जो सीमाओं से परे है
अलीपुर अपने बढ़ते हुए रत्न व्यापार के लिए जाना जाता है, लेकिन यह ईरान के साथ अपने पुराने धार्मिक और सांस्कृतिक रिश्तों के लिए भी उतना ही जाना जाता है. गांव की कई गलियों के नाम ईरानी शहरों जैसे तेहरान, क़ोम और शिराज के नाम पर रखे गए हैं. कई परिवार अपने बच्चों को धार्मिक पढ़ाई और उच्च शिक्षा के लिए ईरान भेजते हैं, जिसमें एमबीबीएस कोर्स भी शामिल हैं, जो उन्हें सस्ता और सांस्कृतिक रूप से जाना-पहचाना लगता है.

How a Karnataka Village Shares Decades-Old Ties With Ayatollah Khamenei and Iran
अयातुल्ला अली खामेनेई ने अस्पताल बनाने में किया था सहयोग (ETV Bharat)

अलीपुर के लेखक और स्थानीय इतिहासकार सैयद नातिक अलीपुरी ने कहा कि ईरान के साथ रिश्ता बहुत गहरा है. उन्होंने कहा, "ईरान के साथ हमारे गांव का रिश्ता शिया धर्म से कहीं ज्यादा है. ये रिश्ते सभ्यता से जुड़े, ऐतिहासिक और भावनात्मक हैं."

अलीपुरी ने याद किया कि अयातुल्ला खामेनेई 1980 में अलीपुर आए थे. उस दौरे के दौरान, उन्होंने शहर के लिए एक अस्पताल का सपना देखा था और उसका शिलान्यास किया था. उन्होंने कहा, वह दौरा उन लोगों लिए कोई प्रतीकात्मक नहीं थी. यह एक वादा था जो हकीकत में बदल गया.

How a Karnataka Village Share
कर्नाटक का अलीपुर गांव, ईरान के सुप्रीम लीडर ने किया था दौरा (ETV Bharat)

अलीपुरी ने कहा कि, अयातुल्ला खामेनेई की मौत की खबर से गांव में कई लोग सदमे में हैं. अलीपुरी ने कहा कि, वे ईरान पर हुए हमले और अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई की शहादत से दुखी हैं. वह दबे-कुचले लोगों, खासकर फिलिस्तीन के लोगों के लिए अपनी आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे.

उन्होंने कहा कि, खामेनेई का जाना कई लोगों के लिए दर्दनाक है. उन्होंने ईरान में एक स्कूल में बम धमाके की खबरों की भी निंदा की. उन्होंने कहा कि, जब स्कूल में बच्चे मारे जाते हैं, तो यह सिर्फ एक देश पर हमला नहीं है, यह इंसानियत पर हमला है. ऐसे कामों की निंदा होनी चाहिए, चाहे इसके लिए कोई भी जिम्मेदार हो.

खामेनेई ने एक हॉस्पिटल का उद्घाटन किया था, जो लोगों की कर रहा है सेवा
अलीपुर के ईरान के साथ कनेक्शन की सबसे साफ निशानियों में से एक इमाम खुमैनी हॉस्पिटल है, जिसे इमाम खुमैनी मेडिकल ट्रस्ट चलाता है. खामेनेई के दौरे के बाद बना यह अस्पताल दशकों से इस इलाके में सेवा दे रहा है. यह अस्पताल अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की मदद से बनाया गया था, जो 1980 में अलीपुर आए थे.

उन्होंने शहर में हॉस्पिटल बनाने का सपना देखा था और उसी दौरे के दौरान इसकी नींव रखी थी. यह एक ऐसा यादगार पल था जो उनके कनेक्शन की गहराई को दिखाता है. यह अस्पताल लोगों को उनके धर्म या जाति से ऊपर उठकर इलाज देता है. रहने वालों का कहना है कि यह अलीपुर और उसके आस-पास के गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए लाइफलाइन बन गया है.

हेल्थकेयर लोगों के लिए एक बुनियादी अधिकार है और इसी सोच के साथ बना यह अस्पताल अपनी सेवाओं को बढ़ाता जा रहा है और नई मेडिकल टेक्नोलॉजी अपना रहा है. डॉक्टरों, नर्सों और स्टाफ की एक टीम मरीजों के व्यक्तिगत देखभाल पर ध्यान देती हैं. गांव के कई लोगों के लिए, यह अस्पताल एक ऐसे रिश्ते की जीती-जागती याद दिलाता है जो इंसानियत की सेवा में बदल गया.

व्यापार और अनिश्चितता
अलीपुर में बदलाव 1970 के दशक में शुरू हुआ जब यह खेती से जेमस्टोन ट्रेडिंग की ओर बढ़ा. जेम से भरपूर इलाके में बसे इस गांव ने राजस्थान और बैंकॉक, सिंगापुर, श्रीलंका और दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ ट्रेड लिंक बनाए. अलीपुर के जेम्स बिजनेस के मालिक सैयद इनायत इब्न ए हसन ने कहा कि जेम ट्रेड स्थानीय अर्थव्यवस्था का सेंटर रहा है. उन्होंने कहा, "रत्न व्यवसाय दशकों से गांव की अर्थव्यवस्था का सहारा रहा है.

उनके ग्राहक पूरे भारत और बाहर से हैं, जिनमें दुबई, श्रीलंका और साउथ-ईस्ट एशिया शामिल हैं. अलीपुर जेम्स एंड ज्वेलरी ट्रेडर्स एसोसिएशन में 270 से ज्यादा रजिस्टर्ड ट्रेडर हैं और यह 2,000 से ज़्यादा परिवारों की आजीविका चलाता है. हालांकि, चल रहे संघर्ष ने व्यापार में रुकावट डाली है.

हसन ने कहा, "हम घर से छोटे-मोटे फैक्ट्रियों में चले गए हैं. युद्ध ने इसे मुश्किल बना दिया है. शिपमेंट में देरी हो रही है और ऑर्डर अनिश्चित हैं... लेकिन हम गुजारा कर रहे हैं."

ईरान में पढ़ रहे कई छात्र सुरक्षा चिंताओं के कारण घर लौट आए हैं, जबकि दूसरे अपने प्लान पर फिर से सोच रहे हैं. हसन ने कहा, "हम शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, लेकिन जो हो रहा है उसे हम नजरअंदाज नहीं कर सकते."

संस्कृति के हिसाब से, अलीपुर अपने खास इतिहास को दिखाता है. उर्दू बहुत बोली जाती है, कुछ लोग फारसी अच्छी तरह बोलते हैं, और कई महिलाएँ भारतीय मुस्लिम परंपराओं को बनाए रखते हुए ईरानी स्टाइल का हिजाब अपनाती हैं. अलीपुरी ने कहा, "ईरान के साथ हमारा रिश्ता इतिहास, संस्कृति, धर्म और अर्थव्यवस्था तक फैला हुआ है...यह मिली-जुली यादों और असलियत के बारे में है जो दुनिया में अलीपुर की जगह बनाती रहती है."

उन्होंने कहा कि, जैसे-जैसे दुनिया भर में तनाव बढ़ रहा है, कर्नाटक का यह शांत गांव न सिर्फ एक ईरान के सुप्रीम लीडर के जाने का दुख मना रहा है, बल्कि अपनी ही कहानी में बुनी एक ऐसी हस्ती के जाने का भी शोक मना रहा है.

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