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झारखंड और महाराष्ट्र से आकर साइबर क्रिमिनलों ने बिहार में बनाया ठिकाना, ऐसे करता था अकाउंट साफ

पटना में अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. 'महानगर गैस' के नाम पर 20 राज्यों में ठगी की गई. 4 गिरफ्तार हुए हैं.

Cyber Criminal Arrested In Patna
गिरफ्तार में आए आरोपी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : March 3, 2026 at 6:14 PM IST

3 Min Read
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पटना : बिहार की राजधानी पटना के साइबर थाना पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने रामकृष्णा नगर थाना क्षेत्र के न्यू जगनपुरा इलाके से अंतरराज्यीय साइबर ठगी करने वाले गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह 'महानगर गैस' का कनेक्शन दिलाने और कनेक्शन काटने के नाम पर देशभर के लोगों को ठगी का शिकार बना रहा था. गिरफ्तार आरोपियों में तीन झारखंड के जामताड़ा निवासी और एक महाराष्ट्र का मास्टरमाइंड शामिल है.

झारखंड और महाराष्ट्र के आरोपी गिरफ्तार : पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गुलटन यादव, अरुण मंडल और पंकज कुमार के रूप में हुई है, जो झारखंड के जामताड़ा जिले के रहने वाले हैं. वहीं गिरोह का मास्टरमाइंड श्रीधर महाराष्ट्र के पुणे का निवासी बताया गया है. सभी आरोपी पटना के न्यू जगनपुरा में किराए का फ्लैट लेकर पिछले पांच से छह महीनों से ठगी के इस धंधे को संचालित कर रहे थे.

कैसे उड़ाते थे खाते से रुपये? : जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह मुख्य रूप से महाराष्ट्र की 'महानगर गैस' कंपनी का कनेक्शन दिलाने या कनेक्शन बंद होने की चेतावनी देकर लोगों को फोन करता था. इसके बाद वे ग्राहकों को एक एपीके (APK) फाइल भेजते थे. जैसे ही पीड़ित उस फाइल को अपने मोबाइल में इंस्टॉल करता था, ठग उसके बैंक खाते और मोबाइल की गोपनीय जानकारियों तक पहुंच बना लेते थे और खाते से रुपये उड़ा लेते थे.

करोड़ों रुपये की ठगी का अनुमान : तकनीकी अनुसंधान के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरोह के खिलाफ महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा सहित करीब 20 राज्यों में साइबर ठगी के मामले दर्ज हैं. पुलिस का अनुमान है कि इस गिरोह ने अब तक करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया है.

जेल से छूटने के बाद नेटवर्क खड़ा किया : साइबर डीएसपी सह थानाध्यक्ष नीतीश चन्द्र धारिया ने बताया कि गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों के पास से 18 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं. पूछताछ में अपराधियों ने स्वीकार किया है कि वे पिछले चार से पांच वर्षों से साइबर ठगी में संलिप्त हैं और पूर्व में जेल भी जा चुके हैं. जेल से छूटने के बाद इन्होंने फिर से संगठित तरीके से ठगी का नेटवर्क खड़ा कर लिया.

''यह गिरोह टेलीग्राम के माध्यम से लोगों का डेटा हासिल करता था. उन्हें मोबाइल नंबर और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां उपलब्ध कराई जाती थीं, जिसके आधार पर वे लोगों को निशाना बनाते थे. पुलिस अब उन मुख्य सरगनाओं की तलाश में जुटी है, जो इस गिरोह को डेटा सप्लाई कर रहे थे.''- नितीश चन्द धारियां, साइबर डीएसपी, पटना

नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने की कोशिश : फिलहाल पुलिस सभी बरामद मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच करा रही है और बैंक खातों के लेनदेन का ब्योरा खंगाला जा रहा है. साथ ही अन्य राज्यों की पुलिस से भी संपर्क स्थापित किया गया है, ताकि गिरोह के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके. मामले में आगे की कार्रवाई जारी है.

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