पहली बार उत्तराखंड से अंतरराष्ट्रीय मार्केट में पहुंची ट्राउट फिश, दुबई एक्सपोर्ट में यहां फंसा पेंच!
उत्तराखंड से पहली बार मछलियां विदेश एक्सपोर्ट, नेपाल को 5 मीट्रिक टन मछलियां की गई सप्लाई, दुबई में इस वजह से नहीं हो पाई सप्लाई

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : June 26, 2026 at 8:01 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड में हिमालयन ट्राउट फिश को बढ़ावा दिया जा रहा है. साथ ही इसके लिए बेहतर प्लेटफार्म उपलब्ध कराए जाने को लेकर तमाम कवायद की जा रही रही है. इसी कड़ी में पहली बार उत्तराखंड से ट्राउट फिश को विदेशों में एक्सपोर्ट किया गया है. जिसके तहत नेपाल को 5 मीट्रिक टन मछलियां सप्लाई की हैं. इसके साथ ही दुबई में भी ट्राउट फिश को भेजने की तैयारी हो रही है.
जहां एक ओर उत्तराखंड का हिमालय ट्राउट फिश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है, तो वहीं दूसरी ओर अभी भी वो तमाम चुनौतियां बरकरार हैं, जिसकी वजह से लोकल स्तर पर ट्राउट फिश को मार्केट उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. जबकि, सरकार का मुख्य फोकस विदेशी बाजारों और देश के बड़े शहरों पर है. आखिर क्या है उत्तराखंड में हिमालय ट्राउट फिश की असल स्थिति, इस क्षेत्र में क्या कुछ किया जाना है बाकी? आपको रूबरू करवाते हैं.
ट्राउट फिश पालन के लिए मुफीद उत्तराखंड का पर्वतीय क्षेत्र: बता दें कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन के साथ ही मछली उत्पादन के लिए नेचुरल जलधाराएं मौजूद हैं. यही वजह है कि राज्य सरकार प्रदेश के खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन पर जोर दे रही है. क्योंकि, इससे किसानों को काफी ज्यादा फायदा मिलता है. इसी कड़ी में राज्य सरकार प्रदेश के सीमांत पर्वतीय जिलों में उत्तराखंड की प्रीमियम हिमालयन ट्राउट फिश के उत्पादन पर जोर दे रही है.
अच्छी खबर ये भी है कि उत्तराखण्ड आने वाले दिनों में करीब 30 टन मछलियों के निर्यात की तैयारी कर रहा है। राज्य सचिवालय के मीडिया सेंटर में मत्स्य विकास मंत्री श्री सौरभ बहुगुणा ने आज प्रेस काॅफ्रेंस में यह जानकारी साझा की।
— Uttarakhand DIPR (@DIPR_UK) June 26, 2026
पहली बार इंटरनेशनल मार्केट में पहुंची उत्तराखंड की मछली: इसके साथ ही ट्राउट फिश के उत्पादन से जुड़े किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए इंटरनेशनल बाजार बना रही है. इसी कडी में बीती 23 जून को नेपाल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5 मीट्रिक टन ट्राउट फिश निर्यात की गई है. जिससे 33 मत्स्य पालकों को करीब 23.5 लाख रुपए की आय हुई है, तो वहीं अगले कुछ महीने में 30 मीट्रिक ट्राउट फिश नेपाल में निर्यात करने की संभावना है.

दुबई में सप्लाई नहीं हो पाई हिमालयन ट्राउट फिश: दरअसल, पिछले साल दुबई में आयोजित गल्फ फूड एक्सपो के दौरान मत्स्य पालन विभाग ने अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और हितधारकों से बातचीत की थी. उस दौरान दुबई में हिमालयन ट्राउट फिश के निर्यात पर सहमति बनी थी, लेकिन अभी तक दुबई में हिमालयन ट्राउट फिश की सप्लाई नहीं हो पाई है. जिसके पीछे की तमाम असल वजह सामने निकल कर आए हैं.
क्यों दुबई सप्लाई नहीं हो पाई ट्राउट फिश? मुख्य रूप से उत्तराखंड में प्रोसेसिंग प्लांट न होने के साथ ही ट्राउट फिश की साइज और वजन का कम होना शामिल है. क्योंकि, गल्फ कंट्री की डिमांड है कि एक ट्राउट फिश का वजन 3 किलोग्राम होना चाहिए. जबकि, हिमालयन ट्राउट फिश का वजन करीब 700 से 800 ग्राम ही है. इसके अलावा कागजी कार्रवाई भी अभी तक पूरी नहीं हो पाई है.

उत्तराखंड में ट्राउट फिश का क्या है इतिहास? उत्तराखंड के हिमालयन ट्राउट फिश का इतिहास करीब 150 साल पुराना यानी ब्रिटिश काल का है. दरअसल, ब्रिटिश शासन काल के दौरान 1850 के दशक में अंग्रेज ट्राउट फिश का बीज, स्विट्जरलैंड से लेकर आए थे. इसके बाद से ही ट्राउट फिश, उत्तराखंड के हिमालय राज्यों की पहचान बनी हुई है, लेकिन अभी भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है.
यह चुनौती है ट्राउट फिश के बीज. दरअसल, डिमांड ज्यादा होने पर ट्राउट फिश के बीज को डेनमार्क से खरीदने पड़ रहे हैं, जो काफी ज्यादा महंगे पड़ते हैं. क्योंकि, उत्तराखंड में अत्याधुनिक हैचरी और कोल्ड स्टोरेज चैन सिस्टम नहीं है. फिलहाल, राज्य सरकार अत्याधुनिक हैचरी और कोल्ड स्टोरेज चैन सिस्टम को विकसित करने पर जोर दे रही है. जिससे ट्राउट फिश के बीज यही तैयार हो सकेंगे.

हिमालयन ट्राउट फिश उत्तराखंड का एक प्रीमियम फिश यानी मछली है. जिसका उत्पादन उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में किया जा रहा है. जिसकी मुख्य वजह यही है कि वहां पर कोल्ड रनिंग वाटर उपलब्ध है. वित्तीय वर्ष 2020-21 में 250 मीट्रिक टन ट्राउट फिश का उत्पादन हुआ था, जो 2025-26 में बढ़कर करीब 800 मीट्रिक टन हो गया है.
करीब 800 मीट्रिक टन ट्राउट फिश का उत्पादन 1625 रेसवेज के जरिए उत्पादन हुआ हैं. इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2021-22 में 10,011 परिवार मत्स्य पालन से जुड़े हुए थे. जिनकी संख्या साल 2025- 26 में बढ़कर 15,657 हो गई है। खास बात यह है कि इन सभी मत्स्य पालकों में 3,584 महिला मत्स्य पालक भी शामिल है.

उत्तराखंड में साल 2024 में मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना शुरू की गई. जिसके जरिए अभी तक 1,651 मत्स्यपालकों को लाभ दिया जा चुका है. वित्तीय वर्ष 2025- 26 के दौरान प्रदेश में 11,805 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ था. जिससे 165 करोड़ का व्यापार हुआ था.
प्रदेश में मत्स्य पालन के प्रति लगातार बढ़ रहे किसानों के रुझान को देखते हुए बजट में भी काफी ज्यादा बढ़ोत्तरी की गई है. वित्तीय वर्ष 2021-22 में मत्स्य विभाग के लिए 55.76 करोड़ का प्रावधान था. जिसे वित्तीय वर्ष दिया 2026- 27 में बढ़कर 261.41 करोड रुपए किया गया है.

उत्तराखंड से आईटीबी को सप्लाई की जा चुकी 45.10 टन ट्राउट फिश: इतना ही नहीं साल 2024 से अभी तक आईटीबीपी यानी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस को 45.10 टन यानी 2.10 करोड़ रुपए के ट्राउट फिश की सप्लाई की जा चुकी है. वहीं, उत्तराखंड के मत्स्य पालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि,
"दुबई में पिछले साल आयोजित गल्फ फूड एग्जीबिशन के दौरान उत्तराखंड के हिमालयन ट्राउट फिश की तारीफें की गई थी, लेकिन उस दौरान कुछ कमियां थी बताई गई थी. उस दौरान इस बात को कहा गया था कि ट्राउट फिश का वजन और साइज छोटा है. यही वजह है कि गल्फ देशों ने इस दिशा में काम करने की बात हुई थी."- सौरभ बहुगुणा, मत्स्य पालन मंत्री, उत्तराखंड
"क्योंकि गल्फ देश में मछली के एक स्पेसिफिक वजन और साइज की डिमांड हैं. ऐसे में अगले 3 से 6 महीने के भीतर इन सभी कर्मियों को दूर करते हुए गल्फ कंट्री में हिमालयन ट्राउट फिश को एक्सपोर्ट करने की कार्रवाई शुरू हो जाएगी. प्रदेश में प्रोसेसिंग प्लांट को बढ़ावा दिए जाने को लेकर चार नए प्रोसेसिंग प्लांट बनाया जा रहा है, जो अगले कुछ दिनों में तैयार हो जाएंगे."- सौरभ बहुगुणा, मत्स्य पालन मंत्री, उत्तराखंड
"जहां तक मुझे जानकारी मिली है, उसके अनुसार गल्फ कंट्री को करीब 3 किलो वजन की एक मछली चाहिए. जबकि, उत्तराखंड की हिमालयन ट्राउट फिश का वजन 700- 800 ग्राम के आसपास है. ऐसे में विभाग एक पॉलिसी पर काम कर रही है. ताकि, बड़े ट्राउट फिश की सप्लाई पहले शुरू कर दिया जाए, जिसका वजन करीब 3 किलो के आसपास हो. उसके साथ ही ट्राउट फिश उत्पादन के प्रक्रिया को और ठीक किया जाएगा."- सौरभ बहुगुणा, मत्स्य पालन मंत्री, उत्तराखंड
अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ देश के तमाम बड़े शहरों में ट्राउट फिश पहुंचाने की कोशिश: इतना ही नहीं उत्तराखंड सरकार का मुख्य फोकस है कि ट्राउट फिश को अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ ही देश के तमाम बड़े शहरों में भेजा जाए. क्योंकि, ये काफी महंगी मछली है. साथ ही इससे मत्स्य पलकों को काफी ज्यादा लाभ मिलेगा. जबकि, अन्य मछलियों की सप्लाई उत्तराखंड समेत अन्य जगहों पर की जा रही है.

उत्तराखंड में भले ही साल दर साल मछलियों के उत्पादन में वृद्धि हो रही हो, लेकिन अभी भी मछलियों के मार्केटिंग की समस्या बरकरार है, जिस सवाल पर मत्स्य पालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि लगातार सोशल मीडिया के जरिए ट्राउट फिश को प्रमोट किया जा रहा है. इसके साथ ही एक एडवरटाइजिंग एजेंसी को भी हायर करने जा रहे हैं. जिसके जरिए देश भर में इसकी मार्केटिंग की जाएगीं. इसके साथ ही एक्सपोर्टर्स से भी मुलाकात की जा रही है. क्योंकि, वो तमाम देशों में एक्सपोर्ट कर रहे हैं.
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