बिहार में राज्यसभा की पांचवी सीट के लिए NDA में मारामारी, नीतीश के दिल्ली दौरे से बढ़ी हलचल
बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए चर्चा रफ्तार पकड़ चुकी है. NDA में इसको लेकर पेंच फंस गया है, सबकी अपनी दावेदारी है-

Published : December 22, 2025 at 6:36 PM IST
पटना : बिहार में अगले साल राज्यसभा और विधान परिषद की सीटें खाली हो रही हैं. इन सीटों पर हलचल अब शुरू हो गई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल्ली दौरे और एनडीए घटक दल के नेताओं की दावेदारी से राज्यसभा सीटों को लेकर सियासी चर्चा और जोर पकड़ ली है. राज्यसभा की जो 5 सीटें खाली हो रही है उसमें से जदयू के दो, राजद के दो और एक राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की सीट है. लेकिन विधानसभा में जो संख्या बल है उसके हिसाब से आरजेडी को दोनों सीट का नुकसान हो सकता है और दो सीटों का फायदा बीजेपी को मिलेगा. जदयू की दो सीटिंग सीट है तो दोनों सीट जदयू को फिर से मिल जाएगा जबकि पांचवी सीट के लिए एनडीए का पलड़ा भारी है.
पांचों सीट पर दिख सकता है नया चेहरा : राजनीतिक विशेषज्ञ और वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के प्रोफेसर प्रमोद कुमार का कहना है की जो 5 सीटें खाली हो रही हैं, उसमें संख्या बल के हिसाब से बीजेपी और जदयू को दो-दो सीट मिलने में कहीं कोई परेशानी नहीं है. असली मारामारी पांचवीं सीट को लेकर हो रही है. क्योंकि एनडीए के घटक दल के नेताओं की तरफ से पांचवी सीट पर दावेदारी हो रही है. इस सीट पर जीतन राम मांझी और चिराग पासवान दोनों चाहते हैं.
चिराग अपनी मां को पहुंचाना चाहते हैं राज्यसभा : चिराग पासवान अपनी मां रीना पासवान को राज्यसभा भेजना चाहते हैं. जिसकी चर्चा विधानसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे के दौरान भी होती रही है. चिराग पासवान की पार्टी के पास 19 विधायक भी हैं तो उनकी दावेदारी मजबूत भी है. वहीं उपेंद्र कुशवाहा भी चाहते हैं कि जो सीटिंग सीट है फिर से उन्हें दे दिया जाए, क्योंकि उन्हें कुछ ही अवधि के लिए राज्यसभा भेजा गया था.

उपेन्द्र कुशवाहा की दावेदारी दिख रही कमजोर : हालांकि उपेंद्र कुशवाहा मजबूती से अपनी बात नहीं रख पाएंगे क्योकि उन्होंने अपनी स्थिति खुद कमजोर कर ली है. सासाराम से अपनी पत्नी को विधायक बन चुके हैं तो वहीं अपने बेटे को बिना किसी सदन के सदस्य रहे मंत्री बना चुके हैं. ऐसे में अब उन्हें एमएलसी पद भी चाहिए.
बीजेपी और जेडीयू से कौन जाएगा उच्च सदन? : बीजेपी की बात करें तो नितिन नवीन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद राज्यसभा जाना तय माना जा रहा है. बीजेपी की ओर से दूसरी सीट पर कौन जाएगा यह स्थिति स्पष्ट नहीं है. पवन सिंह के नाम की भी चर्चा हो रही है, लेकिन भाजपा दोनों सीट पर सवर्ण वर्ग से ही भेजेगा इसकी संभावना कम लग रही है. वहीं जदयू को भी दो राज्यसभा की सीट मिलेगी, जिसमें से एक हरिवंश जी की है, जो राज्यसभा में उपाध्यक्ष हैं. वहीं, दूसरी सीट कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर का है जो केंद्र में मंत्री हैं.

''रामनाथ ठाकुर और हरिवंश जी दो बार राज्यसभा जा चुके हैं. यदि फिर से जदयू इन्हें राज्यसभा भेजती है तो यह तीसरी पारी होगी. जदयू में पहले दो टर्म से अधिक राज्यसभा नहीं भेजने की परंपरा रही है. चाहे वशिष्ठ नारायण सिंह की बात कर ले हैं या फिर आरसीपी सिंह की, आरसीपी सिंह भी केंद्र में मंत्री थे लेकिन उन्हें तीसरी बार नहीं भेजा गया, यह अलग बात है कि उनके साथ कुछ विवाद भी था. इसलिए इस बार भी हरिवंश जी और रामनाथ ठाकुर को लेकर नीतीश कुमार कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं.'' - प्रमोद कुमार, राजनीतिक विशेषज्ञ
पांचों सीट पर मिल सकता है नया चेहरा : इसलिए राज्यसभा की पांचों सीट पर इस बार नया चेहरा देखने को मिल सकता है. बीजेपी और जदयू जातीय समीकरण के साथ सामाजिक समीकरण के तहत ही उम्मीदवारों का नाम तय करेगी. मैसेज देने के लिए किसी महिला को भी राज्यसभा का सदस्य बनाया जा सकता है. बहरहाल, जीतन राम मांझी पांचवी सीट पाने के लिए बीजेपी और जेडीयू को घुड़की भी देने लगे हैं.

बीजेपी के साथ जदयू में भी हैं कई दावेदार : ऐसे बीजेपी और जदयू में राज्यसभा के लिए कई दावेदार हैं. जदयू में वरिष्ठ नेता केसी त्यागी भी लंबे समय से राज्यसभा के लिए इंतजार कर रहे हैं. फिलहाल अभी किसी महत्वपूर्ण पद पर केसी त्यागी नहीं है. वहीं आईएएस अधिकारी से राजनेता बने मनीष वर्मा की भी चर्चा हो रही है. नीतीश कुमार के बेटे निशांत के राजनीति में एंट्री की भी चर्चा हो रही है. ऐसे में राज्यसभा के माध्यम से सदस्य बनाकर एंट्री निशांत की हो सकती है. राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि नीतीश कुमार प्रयोग के लिए भी जाने जाते हैं.

मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे से सियासी चर्चा : बिहार में एनडीए को 202 सीट विधानसभा चुनाव में मिला है, वहीं महागठबंधन के पास 35 सीट है. राज्यसभा की एक सीट के लिए 41 विधायकों की जरूरत पड़ेगी. यदि महागठबंधन को AIMIM का साथ मिल जाता है तब विपक्ष एक सीट पर दावेदारी कर सकता है. यदि AIMIM का साथ नहीं मिला तो एक सीट पर मुकाबला होगा और उसमें एनडीए बाजी मार सकता है.

पांचवी सीट झटकने का गणित : जहां तक एनडीए के अन्य घटक दलों की बात करें तो चिराग पासवान की पार्टी लोजपा रामविलास के पास 19 विधायक है, जबकि जीतन राम मांझी की पार्टी हम के पास पांच विधायक हैं और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के पास चार विधायक है. बीजेपी और जदयू दो-दो राज्यसभा की सीट लेने के बाद 10 विधायक बच जाते हैं. ऐसे में एनडीए के पास कुल 38 विधायक है. जिसके सहारे पांचवा सीट भी एनडीए को मिल सकता है.

खरमास बाद तेज होगी सियासत : लेकिन विपक्ष एकजुट हुआ तब चुनाव होना तय है. तब पांचवी सीट की लड़ाई दिलचस्प होगी. एनडीए में पांचवी सीट किसको मिलती है यह भी देखना दिलचस्प होगा. हालांकि अभी चुनाव में कुछ महीने का समय है. खरमास के बाद राज्यसभा और विधान परिषद की खाली सीटों पर सियासत तेज होगी. फिलहाल मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद राजनीतिक सरगर्मी जरूर बढ़ गई है.
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