Ground Report : तन्वी की मौत पर बोले परिजन- हम गरीब इसलिए नहीं हुई सुनवाई, AIIMS ने बरती लापरवाही
कोटा के मुकेश परियानी 13 साल तक दिल्ली के चक्कर काटते रहे, लेकिन बेटी को नहीं बचा पाए. देखिए रिपोर्ट...

Published : September 2, 2026 at 3:11 PM IST
कोटा: शहर की संगम होटल की गली में रहने वाले मुकेश परियानी पर दुखों का पहाड़ टूटा है. बीते 13 साल तक कोटा से दिल्ली के कई चक्कर लगाने के बावजूद अपनी बेटी तन्वी को नहीं बचा पाए. परियानी ने बेटी की मौत के लिए दिल्ली एम्स पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं.
उनका कहना है कि दिल्ली एम्स में लगातार बेटी के ऑपरेशन की तारीख बदलते रहे और अब दिल्ली एम्स में भर्ती रहने के दौरान ही उसकी मौत हो गई. पिता मुकेश ने रोते हुए ईटीवी भारत से कहा- वह दिल्ली में बेटी का पोस्टमार्टम करा रहे हैं. उसके बाद कोटा में अंतिम संस्कार करेंगे. वे बोले, हम गरीब परिवार से हैं, इसीलिए उनकी सुनवाई नहीं हुई.
तन्वी के चाचा भारत परयानी ने बताया कि उनके भाई मुकेश परयानी इलाज के लिए लगातार दिल्ली और कोटा के चक्कर लगाते रहे. महीने में कभी 15 दिन भी चक्कर लगाने पड़ते थे. उन्हें दिल्ली के हृदय रोग विभाग के चिकित्सक लगातार चक्कर कटवा रहे थे. साल 2014 से उन्होंने इलाज का पैसा भी जमा करा दिया. यहां तक की राजनीतिक रसूख के जरिए भी एप्रोच लगवाई, लेकिन कुछ काम नहीं आई.
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इलाज के लिए डेढ़ लाख जमा किए: भारत परयानी ने बताया कि इलाज के लिए ब्लड से लेकर दवाओं का पैसा और कुछ अन्य जरूरत का सामान साल 2014 से ही एम्स में जमा है. यह राशि करीब डेढ़ लाख रुपए है, लेकिन उनकी भतीजी का इलाज ही नहीं हो रहा था. तन्वी के जन्मजात हार्ट की बीमारी थी. हार्ट की नस को दोबारा तैयार करना था. उनके भाई जितनी भी कमाई करते, बेटी के इलाज पर ही खर्च हो रही थी. परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. मुकेश परियानी कपड़े की दुकान पर काम करते हैं. उसी कमाई से बेटी के इलाज के साथ बड़े बेटे की पढ़ाई व परिवार का गुजारा करने में सहयोग करते हैं.

घर से जांच का कहकर गए: तन्वी के चाचा भारत परयानी ने कहा कि तन्वी पढ़ाई में काफी होशियार थी. उन्हीं के साथ रहती थी. ज्यादा चलने पर उसकी सांस फूल जाती थी, इसीलिए हम उसकी काफी केयर करते थे. तन्वी अभी कक्षा 9 में पढ़ रही थी. उसका 13 साल तक काफी ध्यान रखा. उम्मीद थी कि एम्स में ऑपरेशन के बाद सामान्य बच्चों जैसा जीवन जी सकेगी. हालांकि, ऐसा नहीं हुआ. 24 अगस्त को मुकेश परियानी और उनकी पत्नी भाविका तन्वी के इलाज के लिए दिल्ली गए थे, तब से ही वह वहां भर्ती थी. तन्वी ने 1 सितंबर को सुबह 3:30 बजे दम तोड़ दिया.
पीएम पोर्टल पर शिकायत की : मुकेश परियानी ने कहा कि वे पांच भाई हैं. इनमें चार पुश्तैनी मकान में ही रहते हैं, जबकि बड़े भाई सुनील परियानी दूसरी जगह रहते हैं. परिवार की जिम्मेदारी भी मुकेश के पास थी. उनके तीन भाई भी साथ में ही रहते हैं. तन्वी के ताऊ सुनील परियानी बोले, पीएम पोर्टल पर भी तन्वी का इलाज समय पर नहीं करने की शिकायत परिजनों ने कर दी थी. इसके बाद से एम्स के डॉक्टर सचिन तलवार शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहे थे.
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कनड्यूट के पैसे भी जमा: मुकेश परियानी ने कहा कि एम्स में बड़ी लापरवाही है. हम कई सालों से धक्के खा रहे हैं. हमें लगातार इलाज के लिए बुलाया जा रहा था, लेकिन हमारे बेटी का ऑपरेशन नहीं किया जा रहा था. बेटी तन्वी का जन्म 6 नवंबर 2010 को हुआ था. निजी अस्पताल में डिलीवरी हुई थी. उसे सांस लेने की तकलीफ बचपन में होने लगी थी. चिकित्सकों ने इसे हार्ट की बीमारी बताई थी. इसमें हार्ट की एक नस नहीं थी. इसका कनड्यूट डालना था. इस कनड्यूट के लिए एम्स में पैसा भी जमा करा रखा था. दिल्ली एम्स में 10 अक्टूबर 2012 से बेटी का इलाज चल रहा था.
मेरे पास पैसा नहीं था, इसीलिए नहीं हुआ इलाज: मुकेश ने कहा कि मैं कपड़े की दुकान पर काम करता था, इसलिए बेटी के इलाज के लिए इतना पैसा नहीं था. मैं बेटी को बचाने के लिए जान तक लगाने को तैयार था. बस, केवल मेरे पास पैसा ही नहीं था, इसलिए जितना पैसा इकट्ठा होता दिल्ली आने जाने में ही खर्च हो जाता था. मैं लगातार 13 साल दिल्ली एम्स के चक्कर लगा चुका हूं. इसमें लाखों रुपए खर्चा हो चुका है. डॉक्टर के कहने के बाद 4 अप्रैल 2014 को पैसा जमा कर दिया था. डॉ. सचिन तलवार काफी खराब चिकित्सक है. वह कार्डियोथोरेसिक सर्जन है.
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2 सितंबर 2015 की पहली तारीख दी, लेकिन इलाज कभी नहीं किया: मुकेश के अनुसार, तन्वी के ऑपरेशन की पहली तारीख 2 सितंबर 2015 दी थी, लेकिन उसके बाद दिवाली के बाद की तारीख दी. 16 दिसंबर 2015 को भर्ती किया. फिर कहा कि दांत में प्रॉब्लम है, फिर हमने दांत से कीड़ा भी निकलवा लिया, लेकिन इसके बाद भी ऑपरेशन नहीं किया. साल 2016 की तारीख दे दी. इसे लगातार बढ़ाते रहे. साल 2020 में कोरोना काल आ गया, इसलिए हम बेटी के इलाज के लिए 3 साल एम्स नहीं जा पाए. वर्ष 2023 से फिर जाने लगे और अभी तक भी यहीं स्थिति थी. हमेशा ऑपरेशन की तारीख पर तारीख देते रहे.


