19 साल का इंतज़ार ख़त्म, 10 बेटियों के बाद आया बेटा, बेरोज़गार पिता ने खूब मनाया जश्न
फतेहाबाद के संजय ने 10 बेटियों के बाद घर में बेटे के जन्म पर खुशी में खूब जश्न मनाया और मिठाई बांटी.

Published : January 7, 2026 at 9:18 PM IST
फतेहाबाद : हरियाणा के फतेहाबाद के भूना इलाके के गांव ढाणी सांचला भोजराज में एक परिवार इन दिनों खुशियों से सराबोर है. वजह है शादी के पूरे 19 साल बाद घर में बेटे का जन्म. ये खुशी इसलिए भी खास है क्योंकि इस दंपति की पहले से 10 बेटियां हैं और 11वीं संतान के रूप में बेटे ने घर में जन्म लिया है. लंबे इंतजार के बाद मिली इस खुशी ने ना सिर्फ माता-पिता बल्कि पूरे परिवार के चेहरों पर मुस्कान ला दी है.
शादी को हो चुके 19 साल : संजय और उनकी पत्नी सुनीता की शादी को 19 साल हो चुके हैं. शादी के बाद से ही उन्हें बेटे की चाह थी, लेकिन समय के साथ उनके घर बारी-बारी से 10 बेटियों ने जन्म लिया. इसके बावजूद संजय और सुनीता ने कभी बेटियों के साथ भेदभाव नहीं किया. संजय का कहना है कि उन्होंने अपनी सभी बेटियों को बेटों के समान ही पाला-पोसा और पढ़ाया. आज उनकी सबसे बड़ी बेटी सरीना 18 साल की है और 12वीं कक्षा में पढ़ रही है.
11वीं संतान को दिया जन्म : हाल ही में सुनीता ने 11वीं संतान को जन्म दिया है और 11वीं डिलीवरी भी पूरी तरह नॉर्मल हुई. संजय ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी की डिलीवरी घर से करीब 50 किलोमीटर दूर जींद के उचाना के एक निजी अस्पताल में करवाई. जन्म के समय खून की कमी पाई गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने तुरंत खून चढ़ाया. अब मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं.

परिवार में उत्सव का माहौल : बेटे के जन्म से परिवार में उत्सव जैसा माहौल है. संजय की मां माया देवी पोते के जन्म से बेहद खुश हैं. उनका कहना है कि भगवान ने उनकी वर्षों की मन्नत पूरी कर दी. संजय के पिता कपूर सिंह, जो लोक निर्माण विभाग में बेलदार के पद पर कार्यरत थे, उनका पहले ही निधन हो चुका है. परिवार की जिम्मेदारियां लंबे समय से संजय के कंधों पर हैं.

बेरोज़गार हैं संजय : आर्थिक हालातों की बात करें तो संजय का जीवन संघर्षों से भरा रहा है. उन्होंने बताया कि वे भी लोक निर्माण विभाग में डेली वेज पर कार्यरत थे, लेकिन वर्ष 2018 में उन्हें हटा दिया गया. इसके बाद उन्होंने मनरेगा के तहत मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण किया. पिछले एक साल से मनरेगा का काम भी बंद होने के कारण वे बेरोजगार हैं, फिर भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी. बेटियों की परवरिश के लिए दिन-रात मेहनत करते रहे.

पूरे गांव में परिवार की चर्चा : संजय का कहना है कि बेटियां भी किसी से कम नहीं होतीं और वे चाहते हैं कि उनकी सभी बेटियां पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनें. 19 साल के लंबे इंतजार के बाद बेटे के जन्म ने इस परिवार को ढेर सारी खुशियां दी है. पूरे गांव में परिवार की कहानी चर्चा का विषय बनी हुई है. लोग इसे धैर्य, संघर्ष और पारिवारिक मूल्यों की मिसाल के रूप में देख रहे हैं.

भाई के जन्म से बहनें खुश : भाई के जन्म पर संजय की सबसे बड़ी बेटी सरीना ने बताया कि उनका पूरा परिवार खुश है. भगवान ने उनकी दुआ सुन ली है. सभी बहनों में आपस में बड़ा प्यार है, हालांकि कई बार हर परिवार की तरह छोटी-मोटी तकरार भी होती रहती है.

सपना हुआ साकार : संजय की मां माया देवी ने कहा कि उनके बेटे ने उनका सपना साकार किया है. उनका सपना था कि वे अपने पोते को गोदी में खिलाए. संजय की पत्नी सुनीता ने कहा कि उन्होंने अपने पति का पूरा साथ दिया है. वे भी चाहती थी कि वे एक बेटे को जन्म दें. बेटियों के बारे में वो सोचती हैं कि सभी पढ़-लिखकर उनका नाम ऊंचा करे.

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