कीमो के बीच कथक करती रहीं डांसर प्रोमा मुखर्जी... और फिर एक दिन बनीं कैंसर फ्री, जानिए कैसे घुंघरुओं ने दिया कैंसर को मात
फरीदाबाद की कथक डांसर प्रोमा मुखर्जी ने कैंसर को मात दे दिया है. कैंसर के दौरान उन्होंने अपने काम को नहीं रोका.

Published : February 13, 2026 at 5:49 PM IST
फरीदाबाद: जब जिंदगी की ताल बिगड़ने लगती है तो लोग रुक जाते हैं. हालांकि कुछ लोग उसी ताल पर इतिहास रच देते हैं. कुछ ऐसी ही कहानी है फरीदाबाद की कथक डांसर प्रोमा मुखर्जी की. प्रोमा ने ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को मात दे दिया. आज वो कैंसर फ्री हैं. हालांकि उनका कैंसर का सफर काफी संघर्षों वाला रहा, लेकिन उन्होंने कभी खुद को कैंसर के सामने झुकने नहीं दिया. घुंघरुओं की मधुर आवाज, पैरों की थाप और चेहरे के भाव के साथ प्रोमा मुखर्जी कथक करती रहीं. प्रोमा के लिए कथक सिर्फ एक कला नहीं, उनकी पहचान है, उनकी जिंदगी है.
प्रोमा के जीवन में सब कुछ ठीक चल रहा था. करियर पिक पर था और बड़े-बड़े शो वो कर रही थीं. इस बीच प्रोमा की जिंदगी ने अचानक करवट ली और उन्हें पता चला कि उन्हें कैंसर जैसी भयानक बीमारी है. लेकिन फिर भी उन्होंने अपने आप को संभाला और अपना हौसला बनाए रखा. आज प्रोमा कैंसर मुक्त हैं और खुद पर गर्व महसूस करती हैं.
ऐसे हुआ एहसास: ईटीवी भारत ने प्रोमा मुखर्जी से खास बातचीत की. बातचीत के दौरान प्रोमा मुखर्जी ने बताया कि, “एक दिन रोज की तरह मैं स्कूल से बच्चों को डांस सिखाकर घर आई. घर आकर फ्रेश हुई, उसके बाद चेहरे पर मॉइस्चराइजर लगा रही थी. इस दौरान मुझे अपने ब्रेस्ट पर कुछ फील हुआ. इसके बाद मैंने अपने एक दोस्त को फोन किया और उसको इस बारे में बताया. हालांकि मेरे दोस्त को भी कुछ दिन पहले ब्रेस्ट ट्यूमर था, लेकिन इलाज के बाद वह ठीक हो गयी था. फिर उसने एक डॉक्टर का नाम मुझे सजेस्ट किया.”

कैंसर का पता चलने पर मेरी दुनिया ही पलट गई: प्रोमा ने आगे बताया कि, “मैं अकेले डॉक्टर के यहां जाने वाली थी. हालांकि मेरे दोस्त ने कहा कि मैं भी तुम्हारे साथ चलती हूं. वो मेरे साथ डॉक्टर के यहां लेकर गयी. डॉक्टर का नाम संजय है. उन्होंने मेरी जांच की. जांच में पता चला कि मुझे ब्रेस्ट कैंसर है. डॉक्टर ने मुझे जल्दी ट्रीटमेंट की राय दी. हालांकि उस समय मैं काफी डर गई थी. रिपोर्ट आने के बाद लगा जिंदगी ही मेरी कुछ पलों में पलट गई. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था. हालांकि मेरे दोस्तों ने, खासकर डॉक्टर ने, मेरा हौसला बढ़ाया.”
डॉक्टर ने दिया हौसला: रिपोर्ट आने के बाद अपनी हालत को लेकर प्रोमा मुखर्जी ने बताया कि, “मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार मेरे साथ हुआ क्या है. इस दौरान डॉक्टर ने कहा कि, तुम इन चीजों से भाग नहीं सकती हो. तुम्हें इससे लड़ना है. कैसे लड़ना है, ये तुम तय करो. हालांकि इस बीच मेरे मन में काफी उथल-पुथल चल रही थी.”

पिता ने बढ़ाया हौसला: प्रोमा ने आगे कहा कि, “इसके बाद मैंने अपने पापा से बात की. पापा ने कहा, ‘तुम डरो मत. तुम वेस्ट बंगाल की हो और वेस्ट बंगाल शेरों के लिए जाना जाता है. तुम शेरनी हो और तुम्हें इस बीमारी के ऊपर से छलांग लगानी है.’ ये बात मुझे काफी मोटिवेट करती रही.”
ऐसे शुरू हुआ ट्रीटमेंट: डांसर प्रोमा ने आगे बताया कि, “इसके बाद मैंने अपने डॉक्टर से पूछा कि मुझे बेस्ट ट्रीटमेंट कहां मिलेगा? तब उन्होंने डॉक्टर अमित उपाध्याय के बारे में मुझे बताया. मैं डॉक्टर अमित के पास अपनी रिपोर्ट लेकर गई. फिर मेरा इलाज शुरू हुआ. इस दौरान डॉक्टर अमित ने मुझसे कहा कि, ‘ट्रीटमेंट के दौरान सबसे बड़ी बात—जो काम तुम कर रही हो, उस काम को कभी मत छोड़ना. बल्कि पहले से ज्यादा और बेहतर परफॉर्मेंस करना. अपनी एक्टिविटी करते रहना. तुम यह मत सोचना कि तुम कैंसर की मरीज हो. जिस दिन तुमने यह सोचना बंद कर दिया, उस दिन के बाद से तुम इससे बाहर निकल पाओगी.’ तब मैंने डिसाइड किया—मुझे जीना है, मुझे कुछ भी करके इस बीमारी को दूर भगाना है, क्योंकि मैं कलाकार हूं.”

कीमोथेरेपी के दौरान करती रहीं काम: प्रोमा मुखर्जी ने कहा कि, “कलाकार के लिए उसका मंच सब कुछ है. उसका शरीर मंदिर है और इस मंदिर में कुछ भी गलत नहीं हो सकता. इसी सोच के साथ मैं आगे बढ़ी. इस दौरान मेरी कीमोथेरेपी भी शुरू हो गई. कीमोथेरेपी मेरा शनिवार को होता था. संडे मैं रेस्ट करती थी. मंडे मैं अपने कामों में बिजी हो जाती थी. ऐसे ही चलता रहा. इस दौरान मेरे कई शो थे, जो पहले से लाइनअप थे. उनको मैंने फोन करके कहा कि मैं इन चीजों से गुजर रही हूं, परफॉर्मेंस नहीं कर पाऊंगी. हालांकि मेरे डॉक्टर ने कहा कि नहीं, तुम अपने परफॉर्मेंस से पीछे नहीं भाग सकती हो. बल्कि तुम्हें परफॉर्मेंस करना है और पहले से ज्यादा एनर्जी के साथ करना है. हां, जब तुम्हें लगे कि दिक्कत हो रही है, तब थोड़ा रेस्ट कर लिया करो, लेकिन कैंसर को खुद पर हावी मत होने दो. तब मैंने डिसाइड किया कि नहीं, यदि मैं डर जाऊंगी तो कुछ भी नहीं हो सकता. यही वजह है कि एक तरफ मेरी कीमोथेरेपी चल रही थी और दूसरी तरफ मेरा परफॉर्मेंस का सिलसिला चलता रहा. ऐसा लगभग साल भर तक चलता रहा.”

बाल झड़ने के बाद भी किया परफॉर्मेंस: प्रोमा मुखर्जी ने आगे कहा कि, “इस दौरान मेरे पास एक ऐसा शो था जहां पर परफॉर्मेंस करना था, लेकिन उस शो से एक दिन पहले मेरे सारे बाल झड़ गए. तब मैंने डिसाइड किया कि इस शो को मैं नहीं करूंगी. इस दौरान मेरे दोस्तों ने मुझसे कहा कि नहीं, तुम्हें ये करना है. जैसे भी हो, तुम ऐसे हार नहीं मान सकती. इसके बाद मैंने अपने सिर पर कपड़ा बांधकर परफॉर्मेंस शुरू किया. हालांकि मेरे सिर का कपड़ा खुलने लगा और मैं रुक गई. इस बीच मैंने सोचा कि अगर आज मैं रुक गई तो आगे कभी नहीं जा पाऊंगी. मैं वापस आई और डांस किया—पहले से ज्यादा जोश में. और मैंने बेस्ट परफॉर्मेंस उस दिन दिया. लोगों ने जमकर तालियां बजाईं. हालांकि लोगों को पता नहीं था कि मैं किस दर्द से गुजर रही हूं. काफी बाद में जब लोगों को पता चला तो लोगों ने मुझे फोन किया.”
50 मिनट के शो के लिए कहा हां: प्रोमा ने कहा कि, “इन सबके बीच 8 कीमो, 20 रेडिएशन और सर्जरी का दर्द मैंने झेला. सर्जरी के दो हफ्ते के अंदर मेरे लिए सबसे बड़ा प्रोग्राम करने का ऑफर आया. वह भी 50 मिनट का. तो मैंने इस प्रोग्राम के लिए बिना सोचे-समझे हां कर दिया, क्योंकि यह मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी. इसी बीच मेरा दायां हाथ ठीक से उठ नहीं पा रहा था. तो मैंने सोचा क्यों न इस परफॉर्मेंस की कोरियोग्राफी ऐसी की जाए, जिसमें दायां हाथ का इस्तेमाल कम हो. फिर मैंने सोचा कि इस तरह की कोरियोग्राफी मेरे लिए बेईमानी होगी. इसके बाद मैं अपने डॉक्टर के पास पहुंची, तो उन्होंने कहा कि आप फिजियोथेरेपी करवाओ. मैंने फिजियोथेरेपी करवाई और उसके तीन दिन बाद मेरा हाथ ठीक हो गया. दर्द जितना था, वह दूर हो गया. उसके बाद जिस दिन मेरा लास्ट रेडिएशन था, उसके अगले दिन ही ये शो था. उस शो को करने के लिए मैं उत्साहित थी. हालांकि डर भी लग रहा था कि क्या मैं इस परफॉर्मेंस को कर पाऊंगी या नहीं. मैंने फिर अपने डॉक्टर से बात की तो उन्होंने कहा, ‘तुम प्रैक्टिस करो.’ मैं रोज प्रैक्टिस किया करती थी और जिस दिन लास्ट रेडिएशन हुआ, उसके अगले दिन मैंने ऐसा जबरदस्त परफॉर्मेंस दिया, जिससे लोग हैरान हो गए. जब उनको पता लगा कि मैं इस दौर से गुजर रही हूं, वह मेरे लिए तालियां बजाने लगे. वह मेरे लिए ऐतिहासिक दिन था.”

जनवरी में हुई कैंसर फ्री: प्रोमा ने ईटीवी भारत को बताया कि, “जनवरी 2026 का वो दिन, जब मेरी पेट-सीटी स्कैन की रिपोर्ट आई. उसमें डॉक्टर ने मुझे कैंसर मुक्त घोषित किया. इस रिपोर्ट के बाद मानो मैंने दोबारा जन्म लिया हो. वो पल मैं कभी नहीं भूल सकती. आज मैं पूरी तरह से ठीक हूं.”
"बीमारी को खुद पर न होने दें हावी": प्रोमा ने गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि, “मैं सबसे यही कहना चाहूंगी कि बीमारी कोई भी हो, बीमारी आपके शरीर पर इफेक्ट करती है. हालांकि आपकी आत्मा पर नहीं. आप स्ट्रॉन्ग रहो तो आप किसी भी बीमारी से जीत सकते हो. मैंने अपनी बीमारी में काफी दर्द झेला, हालांकि मैंने उसे खुद पर हावी होने नहीं दिया. आज मैं स्वस्थ हूं.”
प्रोमा मुखर्जी की कैंसर से जंग हमें यह सिखाती है कि बीमारी शरीर को कमजोर कर सकती है, लेकिन अगर मन मजबूत हो तो गंभीर से गंभीर बीमारियों से हम जीत सकते हैं.

