फरक्का जलसंधि पर बिहार में सियासत तेज, लालू के पलटवार के बाद JDU ने फिर साधा निशाना
फरक्का जलसंधि के नवीनीकरण से पहले बिहार में सियासत तेज, JDU ने लालू पर समझौते का आरोप लगाया और RJD पर पलटवार किया. रिपोर्ट- अविनाश


Published : August 23, 2026 at 3:44 PM IST
पटना : गंगा जल के बंटवारे को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हुई फरक्का जलसंधि की 30 साल की अवधि दिसंबर 2026 में पूरी होने वाली है. संधि के नवीनीकरण से पहले बिहार में इसके प्रभाव और राज्य के हितों को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है. जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की मांग पर लालू यादव के पलटवार के बाद अब जेडीयू ने मोर्चा खोल दिया है. जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने लालू यादव के बयान पर पलटवार किया है.
अब नीरज कुमार ने लालू से मांगा जवाब : लालू यादव के पलटवार के बाद जदयू के मुख्य प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर RJD प्रमुख पर पलटवार किया. नीरज कुमार ने लालू प्रसाद यादव पर बिहार के हितों के साथ समझौता करने का आरोप लगाया. उन्होंने सवाल उठाया कि जब 1996 में लालू यादव प्रभावी राजनीतिक भूमिका में थे और उनकी पार्टी के बड़ी संख्या में सांसद थे, तब बिहार के हितों की आवाज मजबूती से क्यों नहीं उठाई गई.
''भारत बंगलादेश में जो जल समझौता हुआ, बिहार के हित को लालू जी ने बली चढ़ा दिया. 1996 में यह संधि हुआ लालू जी मुख्यमंत्री थे. चारा घोटाला में इनका नाम आ गया तो इन्होंने सत्ता के साथ समझौता कर लिया. जब इनके 22 सांसद थे तब इनकी जुबान नहीं खुली. 2012 में जब 4 सांसद थे तब इनको फरक्का याद आया. ये बिहार के हितों के साथ नाइंसाफी है.''- नीरज कुमार, मुख्य प्रवक्ता, जेडीयू
'2011 में मुद्दा उठाया तब सांसद कम थे' : नीरज कुमार ने लालू यादव की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि फरक्का के मामले को 2011 में उठाया गया, जब RJD के पास लोकसभा में पहले की तुलना में बहुत कम सांसद थे. उन्होंने कहा कि अब जब संजय झा ने राज्यसभा में बिहार के हित का सवाल उठाया है तो RJD के सांसदों ने इसका साथ क्यों नहीं दिया. नीरज ने लालू यादव से इसका जवाब मांगा.
वर्ष 1996 में बांग्लादेश के साथ फरक्का जल संधि करते समय जब बिहार के हितों की बलि चढ़ाई जा रही थी, तब प्रदेश के मुख्यमंत्री और संयुक्त मोर्चा के प्रभावशाली नेता चुप्पी साधे रहे। पिछले तीन दशकों के अनुभव और आंकड़े इस बात के ठोस प्रमाण हैं कि इस संधि से बिहार को व्यापक नुकसान झेलना… pic.twitter.com/YNyQz4sbWS
— Sanjay Kumar Jha (@SanjayJhaBihar) August 20, 2026
"एक सवाल लालू जी से पूछना चाहूंगा कि जब राज्यसभा में संजय यादव ने सवाल उठाया तो राजद के सांसद खामोश क्यों रह गए? क्यों नहीं सहमति में खड़ा हुए? इसलिए हम केंद्र सरकार से अनुरोध करते हैं कि राज्य हित को प्राथमिकता दीजिए."- नीरज कुमार, मुख्य प्रवक्ता, जेडीयू
बाढ़ और कम पानी का दोहरा संकट : JDU नेताओं का तर्क है कि फरक्का बैराज और गंगा के जल प्रबंधन का असर बिहार पर दोहरी चुनौती के रूप में पड़ता है. उनका कहना है कि गर्मी में गंगा में जलस्तर कम होने पर पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है, जबकि मानसून के दौरान गंगा और उसकी सहायक नदियों में अधिक पानी तथा गाद जमाव से बिहार के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ता है. फरक्का बैराज को लेकर बिहार में लंबे समय से ऐसी चिंताएं जताई जाती रही हैं.
संजय झा ने उठाया था बिहार के हित का मुद्दा : जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने फरक्का जलसंधि के मौजूदा स्वरूप पर पुनर्विचार की मांग उठाई है. उनका कहना है कि 1996 में समझौते के समय बिहार के हितों को पर्याप्त महत्व नहीं मिला और पिछले तीन दशकों के अनुभव को देखते हुए अब नई व्यवस्था पर विचार जरूरी है.
केंद्र से बातचीत में भी उठा फरक्का का मुद्दा : संजय झा ने भविष्य में बिहार समेत गंगा बेसिन के राज्यों की जल जरूरतों को ध्यान में रखकर वैज्ञानिक आकलन की मांग भी की है. बिहार सरकार की ओर से भी इस मुद्दे को केंद्र के सामने उठाया जा रहा है.
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और संजय झा की केंद्रीय नेताओं से मुलाकात में फरक्का जलसंधि का मामला उठाए जाने की बात सामने आई है. जदयू का तर्क है कि बिहार की जल सुरक्षा और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए केंद्र को संधि के नवीनीकरण से पहले राज्य के पक्ष पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.
संजय झा ने लालू पर उठाए सवाल : संजय झा की ओर से फरक्का मुद्दे पर 1996 के राजनीतिक घटनाक्रम का हवाला देकर तत्कालीन बिहार सरकार और लालू प्रसाद यादव की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए. उनका आरोप है कि उस समय बिहार के हितों को पर्याप्त मजबूती से नहीं रखा गया. इसी आरोप के बाद फरक्का का मुद्दा सीधे JDU बनाम RJD की राजनीतिक लड़ाई में बदल गया.
लालू का पलटवार-'इतिहास और भूगोल समझें' : लालू प्रसाद यादव ने 22 अगस्त को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए संजय झा पर पलटवार किया. उन्होंने बिना नाम लिए संजय झा को 'नौसिखिया' बताया और कहा कि फरक्का जैसे गंभीर विषय पर बोलने से पहले इसके इतिहास और भूगोल को समझना चाहिए. लालू ने दावा किया कि RJD ने संसद से लेकर राज्य सरकार तक हर मंच पर फरक्का बैराज का विरोध किया था.
फरक्का बैराज के विषय पर नीतीश कुमार के ऐसे नौसिखिए बोल रहे है जिन्हें इस मुद्दे और विषय का कोई इतिहास- भूगोल मालूम नहीं! कोई समझ नहीं?
— Lalu Prasad Yadav (@laluprasadrjd) August 22, 2026
हमने संसद में और राज्य में हमारी सरकार ने हर मंच पर हमेशा फरक्का बांध का कड़ा विरोध किया क्योंकि हमारी दूरदृष्टि ने गंभीरता से इससे बिहार को… pic.twitter.com/x0v1naEPXz
नीतीश कुमार की भूमिका पर भी लालू का निशाना : लालू यादव ने इस विवाद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी निशाने पर लिया. उनका आरोप है कि नीतीश कुमार ने संसद में फरक्का बैराज के मुद्दे पर कभी आवाज नहीं उठाई. लालू ने JDU नेताओं को बिहार के जल संसाधन विभाग में उपलब्ध पुराने दस्तावेज, गंगा में जल उपलब्धता और तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से केंद्र के साथ किए गए पत्राचार को देखने की सलाह दी.
नीतीश पहले भी फरक्का पर उठा चुके हैं सवाल : फरक्का बैराज का मुद्दा बिहार की राजनीति में नया नहीं है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी अलग-अलग मौकों पर फरक्का बैराज को बिहार की बाढ़ की समस्या से जोड़ते हुए इसके प्रभाव पर सवाल उठा चुके हैं. अब 30 साल पुरानी जलसंधि की अवधि खत्म होने से पहले इस मुद्दे को फिर राजनीतिक रूप से धार मिल गई है.
दिसंबर से पहले बढ़ेगी सियासी गर्मी : 1996 की भारत-बांग्लादेश फरक्का जलसंधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है. ऐसे में संधि के नवीनीकरण से पहले बिहार के जल हितों को लेकर केंद्र पर दबाव बनाने की कोशिश तेज हो गई है. एक तरफ JDU मौजूदा व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग कर रहा है, वहीं RJD अपने पुराने विरोध का हवाला देकर JDU पर निशाना साध रहा है. ऐसे में फरक्का का पानी अब बिहार में सिर्फ जल संसाधन का मुद्दा नहीं, बल्कि सियासी टकराव का नया मैदान भी बन गया है.
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