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बंगाल में SIR सुनवाई प्रक्रियाः लकवाग्रस्त 88 साल की बुजुर्ग को गोद में उठाकर सुनवाई केंद्र लाया परिवार

पैदल चलने में लाचार होने के कारण परिवार के सदस्यों को लकवाग्रस्त बुजुर्ग महिला को गोद में उठाकर सुनवाई केंद्र तक ले जाना पड़ा.

SIR In Bengal
बुजुर्ग महिला को गोद में उठाकर ले जाते परिजन. (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : December 30, 2025 at 10:13 PM IST

5 Min Read
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हिंलगंज (उत्तर 24 परगना): शरीर जर्जर और चलने-फिरने में असमर्थ, ऊपर से लकवे (पैरालिसिस) की मार. इस शारीरिक कष्ट के कारण वह मानसिक रूप से भी परेशान रहने लगी हैं. ऐसी गंभीर स्थिति में भी लगभग 90 साल की एक बुजुर्ग महिला को अपनी नागरिकता साबित करने की मजबूरी में 'एसआईआर' (SIR) सुनवाई प्रक्रिया की कतार में खड़ा होना पड़ा. पैदल चलने में पूरी तरह लाचार होने के कारण परिवार के सदस्यों को लकवाग्रस्त बुजुर्ग महिला को गोद में उठाकर सुनवाई केंद्र तक ले जाना पड़ा.

हिंलगंज में दिखी इस तस्वीर ने चुनाव आयोग की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. हैरानी की बात यह है कि यह घटना चुनाव आयोग के उन निर्देशों के बावजूद हुई, जिसमें कहा गया था कि गंभीर मामलों में मतदाताओं को केंद्रों पर आने की जरूरत नहीं है और उनकी सुनवाई घर पर ही की जाएगी. इस नियम को लेकर हुई असमंजस के बाद अब चुनाव आयोग ने 2025 की अपनी नई गाइडलाइन में स्पष्ट निर्देश जारी किया है.

क्या है नया निर्देश

  • 85 वर्ष या उससे अधिक आयु के मतदाताओं की सुनवाई अब उनके घर पर ही होगी.
  • गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों और गर्भवती महिलाओं को भी केंद्र पर आने की आवश्यकता नहीं है, उनके लिए भी घर पर ही सुनवाई की व्यवस्था की जाएगी.

उनका आरोप है कि चुनाव आयोग की कथनी और करनी में मेल नहीं है. आयोग ने साफ कहा था कि 85 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को भौतिक रूप से 'एसआईआर' (SIR) सुनवाई केंद्र पर नहीं आना होगा. उनके लिए घर पर ही सुनवाई या वर्चुअल माध्यम से जुड़ने की व्यवस्था की जाएगी. इसके बावजूद उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है. स्थानीय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि वे इस मामले की जांच करेंगे.

SIR In Bengal
सुनवाई केंद्र पर पहुंची महिला. (ETV Bharat)

बुजुर्ग को क्यों आना पड़ा सेंटर पर

जानकारी के मुताबिक, 88 वर्षीय ननिबाला गायेन हिंलगंज की दुलदुलि ग्राम पंचायत के स्वरूपकाठी गांव की रहने वाली हैं. वह नियमित रूप से बूथ संख्या 151 पर मतदान करती हैं और उनका नाम 2002 की संशोधित मतदाता सूची में भी दर्ज है.

समस्या तब शुरू हुई जब बाद में पता चला कि मतदाता सूची में उनके स्थान पर किसी और का नाम आ गया है. बताया जा रहा है कि जब उन्होंने एसआईआर गणना फॉर्म भरकर जमा किया, तब इस गड़बड़ी का पता चला. इसी विसंगति को सुधारने के लिए चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार उन्हें सुनवाई का नोटिस भेजा गया था और उन्हें केंद्र तक आना पड़ा.

राजनीतिक बयानबाजी तेज

जैसे ही मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (special intensive revision) की सुनवाई शुरू हुई, राज्य के अलग-अलग हिस्सों से कई शिकायतें सामने आने लगीं. कहीं सुनवाई केंद्रों पर कुप्रबंधन की शिकायत मिली, तो कहीं बीमार मतदाताओं को अधिकारियों के सामने अपनी जानकारी पेश करने के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा.

तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस मुद्दे पर पहले ही चुनाव आयोग के खिलाफ आवाज उठाई है. उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी निर्देश दिया है कि वे बीमार और बुजुर्ग मतदाताओं के साथ खड़े रहें और उनकी मदद करें.

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने तर्क दिया है कि यदि किसी मतदाता को एसआईआर (SIR) गणना फॉर्म भरने में कोई समस्या नहीं है, तो सुनवाई में शामिल होने में क्या कठिनाई है?

हिंलगंज पंचायत समिति के अध्यक्ष और तृणमूल नेता शाहिदुल गाजी ने भी कुछ ऐसी ही नाराजगी जताई. उन्होंने कहा, "हम जानते हैं कि चुनाव आयोग का नियम है कि 80 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए चुनाव संबंधी प्रक्रियाएं उनके घर पर ही की जाएं. लेकिन, इस मामले में इनमें से किसी भी नियम का पालन नहीं किया जा रहा है. आयोग को बुजुर्गों के लिए इस नियम का ठीक से पालन करना चाहिए था.चुनाव आयोग हर काम जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन जबरदस्ती ज्यादा दिनों तक नहीं चलती. जनता 2026 के विधानसभा चुनाव में इसका करारा जवाब देगी."

क्या कहते हैं अधिकारी

दूसरी ओर, इस मामले पर संपर्क किए जाने पर हिंलगंज के बीडीओ (BDO) देवदास गंगोपाध्याय ने कहा, "वास्तव में क्या हुआ है, यह जाने बिना मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता. मैं मामले की जांच कर रहा हूं, उसके बाद ही कुछ कह पाऊंगा."

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