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Explainer: डिजिटल इंडिया का पावरहाउस - जानिए कैसे काम करते हैं डेटा सेंटर और क्या है इनका भविष्य

हमारे देश में डेटा सेंटर को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं. इस बार आम बजट 2026 में भी कई ऐलान किए गए हैं.

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जानिए कैसे काम करते हैं डेटा सेंटर और क्या है इनका भविष्य (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : February 12, 2026 at 11:59 AM IST

7 Min Read
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हैदराबाद: आजकल चारों तरफ डेटा सेंटर की ही बात चल रही है. हमारा देश भी इस मामले में अपने पैर पसार रहा है. इस बार 1 फरवरी को पेश हुए आम बजट 2026 में भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने अपने भाषण में ऐलान किया कि भारत विदेशी कंपनियों को यहां डेटा सेंटर बनाकर क्लाउड सेवाएं देंगी. सरकार के इस फैसले को बड़ा डिजिटल हब बनाने के दिशा में आगे बढ़ाने से जोड़ा जा रहा है.

जानिए कैसे काम करते हैं डेटा सेंटर और क्या है इनका भविष्य (PTI Video)

एआई (AI) के लिए डेटा सेंटर जरूरी
आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर है. इसकी हर सेक्टर में पहुंच बढ़ रही है. बैंकिंग से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा समेत सभी जगह AI बेस्ड सिस्टम काम कर रहे हैं. यहां सबसे ज्यादा जानना यह जरूरी है कि AI को सुचारू रूप से चलाने के लिए भारी कंप्यूटिंग पॉवर की जरूरत होती है और यह काम डेटा सेंटर के बिना संभव नहीं है. बता दें, डेटा सेंटर वह जगह हैं, जहां बड़े स्तर पर डेटा स्टोर किया जाता है. इसी वजह से केंद्र की मोदी सरकार का इस पर फोकस है.

भारत के डिजिटल सपने को पॉवर दे रहा
बता दें, एक ऐसी दुनिया, जो कभी नहीं सोती. डिजिटल अर्थव्यवस्था की धड़कन इसी दुनिया में धड़कती है. क्लाउड की आभासी दुनिया के पीछे बड़े पैमाने पर फैला एक भौतिक संसार है. एक ऐसा 'डेटा किला' जो हमारे कनेक्टेड जीवन को मजबूती देता है. हर व्हाट्सपऐप (WhatsApp) मैसेज, बैंक ट्रांसफर और आपके स्ट्रीम किए गए वीडियो का एक घर होता है. वह घर एक डेटा सेंटर है, हम ऐसे ही एक डेटा सेंटर के बाहर हैं जो भारत के डिजिटल सपने को पॉवर दे रहा है.

24 घंटे काम करते हैं
इन दीवारों के भीतर, हजारों ताकतवर सर्वर चौबीसों घंटे काम करते हैं. ये सिर्फ कंप्यूटर नहीं हैं. ये ऐसे सुरक्षित भौतिक रीढ़ हैं जो क्लाउड प्लेटफॉर्म और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए जरूरी भारी मात्रा में डेटा को स्टोर, प्रोसेस और ट्रांसमिट करते हैं. हम कंट्रोल एस के एक लाइव डेटा सेंटर के 'सिक्योर जोन' में प्रवेश कर रहे हैं. जिन्हें अधिकार मिला हुआ है, वही यहां जा सकते हैं. सुरक्षा की कई परतें सुनिश्चित करती हैं कि सिर्फ अधिकृत लोग ही अंदर जाएं.

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डिजिटल इंडिया का पावरहाउस (ETV Bharat)

डेटा सेंटर हॉल में सभी ग्राहकों का डेटा होता है स्टोर
इस मामले पर कंट्रोल एस डेटा केंद्र के प्रेसिडेंट (सेल्स), अशोक मैसूर कहते हैं कि हम डेटा सेंटर के मुख्य भाग में हैं, जिसे 'डेटा सेंटर हॉल' कहा जाता है. यहां ग्राहकों का सारा डेटा स्टोर होता है. इस सर्वर क्षेत्र में ग्राहकों की महत्वपूर्ण आईटी संपत्तियां, जैसे कंप्यूटिंग, स्टोरेज और सुरक्षा उपकरण होस्ट की जाती हैं. इन गलियारों में आप बैंकिंग, ई-कॉमर्स और महत्वपूर्ण डेटा के कई टेराबाइट स्टोरेज के बीच से गुजर रहे होते हैं. उन्होंने कहा कि चाहे एप्लीकेशन हो, ऑटोमेशन हो या डिजिटल संदर्भ, एआई (AI) महत्वपूर्ण है. लगभग सभी ग्राहक और सरकारें एआई को अपना रही हैं. इस तरह के एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को होस्ट करने के लिए खास जगह की जरूरत होती है. इसी वजह से डेटा सेंटर की जरूरत है. आप डेटा प्रोसेसिंग की आवाज साफ सुन सकते हैं. लगातार इन मशीनों को ठंडा रखा जाता है. यहां धूल का नामोनिशान नहीं होता. अंदर का तापमान और आर्द्रता का स्तर भी नियंत्रित होता है.

हर चीज का रखना पड़ता है ध्यान
अशोक मैसूर ने आगे कहा कि उच्च-प्रदर्शन वाले कंप्यूटिंग से काफी गर्मी पैदा होती है. लिहाजा तापमान नियंत्रण के लिए औद्योगिक स्तर के शीतलन व्यवस्था की जरूरत है. इसके लिए सबसे जरूरी है, बिजली. बड़ा बैकअप जनरेटर और बैटरी बैंकों के साथ, बिजली आपूर्ति व्यवस्था इस तरह से डिजाइन की गई है, कि ये कभी बंद न हो. तभी जाकर 100 फीसदी संचालन सुनिश्चित होता है. उन्होंने कहा कि ये हमारा यूटिलिटी कॉरिडोर है. यहां डेटा सेंटर के सभी सर्वर हॉल हैं. ये सभी यूटिलिटी रूम हैं जहां पीएएचओ प्रेसिजन एयर कंडीशनिंग, पानी की पाइपलाइन और सर्वर तक कूलिंग की व्यवस्था है. कूलिंग का सारा काम इसी तरफ से होता है. ये यूटिलिटी रूम है. दूसरी बात, जैसा कि हमने आपको यूपीएस रूम दिखाया, यहां एक और यूपीएस रूम है और अलग-अलग बैटरी बैंक हैं. सारा पानी इन्हीं पाइपलाइन से होकर गुजरता है.

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डिजिटल इंडिया का पावरहाउस (ETV Bharat)

डिजिटल इंजन के रूप में बना रहा मजबूत जगह
यहां, इंजीनियर हर सर्वर की स्थिति, तापमान में बदलाव और अचानक बिजली बढ़ने की संभावना पर हर समय नजर रखते हैं, ताकि समस्याएं पैदा होने से पहले ही उनका निदान हो. ये मशीनों के पीछे इंसानों की भूमिका है. हमने 2023 में दो बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश से कंट्रोल एस शुरू किया था. 2030 के अंत तक हम उस दो बिलियन अमेरिकी डॉलर को खर्च कर देंगे. हम डेटा सेंटर उद्योग में और निवेश करने का वादा करते हैं. अशोक मैसूर ने बताया कि भारत का डेटा क्षेत्र माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और अमेजन जैसी कंपनियों के भारी निवेश और कंट्रोल एस जैसी प्रमुख घरेलू कंपनियों की वजह से आगे बढ़ रहा है. केंद्रीय बजट में विदेशी कंपनियों को करों में छूट का ऐलान है. सरकार का अनुमान है कि इससे निवेश बढ़कर 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा. इससे ये विश्वास और मजबूत होता है कि जैसे-जैसे वैश्विक और स्वदेशी दिग्गज कंपनियां भारत में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं, ये देश दुनिया के डिजिटल इंजन के रूप में अपनी जगह मजबूत बना रहा है.

जानिए क्यों खास है देश का डेटा सेंटर बाजार
जानकारी के मुताबिक अभी भारत का डेटा सेंटर करीब 10 अरब डॉलर के आसपास का है. वहीं, फायनेंशियल ईयर 2024 में इससे करीब 1.2 अरब डॉलर की कमाई हुई थी. बात 2027 तक की करें तो हमारे देश में डेटा सेंटर की कैपेसिटी 1.8 गीगावॉट तक पहुंच सकती है. वहीं, देश की मोदी सरकार और प्राइवेट सेक्टर भी इसी दिशा में बड़ी-बड़ी घोषणाएं भी कर रहे हैं. यहां डेटा सेंटर बनाए जाने से बड़ा विदेशी निवेश भी आएगा. इससे देश को काफी लाभ होगा. हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे और भारत की डिजिटल ताकत भी पुख्ता होगी.

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