Explainer: एक क्लिक में जानिए उमरा और हज में क्या है अंतर, दोनों में क्या है जरूरी और कितना लगता है समय
मक्का-मदीना में आज बस हादसा हो गया. जिसमें करीब 42 भारतीयों की मौत हो गई. विस्तार से पढ़ें.

Published : November 17, 2025 at 1:51 PM IST
हैदराबाद: सऊदी अरब के मक्का मदीना में आज सोमवार को एक बड़ा बस हादसा हो गया. जानकारी के मुताबिक मक्का से मदीना जा रही बस यात्रियों से भरी थी, जिसमें कई भारतीय भी सवार थे. यह बस बद्र और मदीना के बीच मुफरहाट इलाके में एक डीजल टैंकर से टकरा गई, जिसके बाद बस में आग लग गई. इस बस हादसे में करीब 42 भारतीयों की मौत की खबर है.
आपको बता दें कि इस्लाम में हज और उमरा को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. हज और उमरा में काफी अंतर है. आइये जानते हैं कि कब हज किया जाता है और कब उमरा और इन दोनों में कितना समय लगता है और दोनों की खास बातें क्या हैं.

मक्का को मुहम्मद साहब का जन्मस्थान माना गया
इस्लाम के मुताबिक हज की पूरी यात्रा में 5 दिनों का समय लगता है, लेकिन लोग इसके बाद भी वहां रुक जाते हैं. जिस वजह से यह यात्रा कुछ लंबी हो जाती है. बता दें, मक्का को इस्लाम का सबसे पवित्र शहर माना जाता है. यह पश्चिमी सऊदी अरब के हिजाज क्षेत्र में स्थित है और मक्का प्रांत का राजधानी है. मक्का को इस्लाम और इस्लामी पैगंबर मुहम्मद साहब का जन्मस्थान माना जाता है.
बात उमरा की करें तो इसे 'छोटा हज' भी कहते हैं. आमतौर पर इसे किसी भी महीने कर सकते हैं. उमरा में चार बातों को काफी मुख्य माना गया है और ये हैं.
- एहराम बांधना- नीयत करना और सफेद वस्त्र पहनना
- तवाफ करना- काबा शरीफ के सात चक्कर लगाना
- सई करना- सफा और मरवा पहाड़ियों के बीच भी 7 चक्कर लगाना.
- हल्क या कसर- सिर से बाल साफ करवाना या बहुत छोटे-छोटे करवाना
अब जानते हैं किस समय होता है उमरा
इस्लाम के मुताबिक उमरा में सिर्फ कुछ घंटों का समय लगता है. ऐसा कहा जाता है कि उमरा करने पर सभी लोगों को सवाब मिलता है. इसे कई बार भी कर सकते हैं. उमरा मक्का की तीर्थयात्रा को दिया गया नाम है, जो वार्षिक हज सभा का एक संक्षिप्त रूप है. अरबी में 'उमरा' शब्द का अर्थ है 'किसी आबादी वाले स्थान पर जाना'. उमरा पूरे वर्ष में कभी भी किया जा सकता है.

अब जानते हैं हज क्या होता है?
इस्लाम के अनुसार हज को पांचवा फर्ज माना गया है. इस्लामी कैलेंडर की मानें तो यह साल में सिर्फ एक बार ही किया जाता है, जो इस्लामी चंद्र कैलेंडर के अंतिम महीने, ज़ुल हिजाह की 8वीं और 13वीं तारीख के बीच होता है. ऐसा कहा जाता है कि हर मुसलमान को अपने जीवनकाल में एक बार जरूर करना होता है.
जानिए हज में क्या-क्या करते हैं
- एहराम बांधना- नीयत करना और सफेद वस्त्र पहनना
- तवाफ करना- काबा शरीफ के सात चक्कर लगाना
- सई करना- सफा और मरवा पहाड़ियों के बीच भी 7 चक्कर लगाना.
- जिलहिज्जा- शैतान को पत्थर मारना मतलब कुर्बानी देना
- मुझदलिफा में रात गुजारना
- तवाफ-ए-इफाजा-तवाफ-ए-विदा
जानिए हज का क्या समय होता है
हज को पूरा करने में करीब 5 से 6 दिनों का समय लगता है. हर मुस्लिम को यह करना बहुत जरूरी है.
अब जानिए दोनों में मुख्य अंतर
हज और उमरा में काफी अंतर बताए गए हैं. हज में जहां लोगों की काफी भीड़ उमड़ती है. इसके साथ-साथ इसकी रस्में भी काफी कठिन हैं. इसका समय तय होता है. वहीं, उमरा में ऐसा कोई निश्चित नहीं होता. इसे कभी भी किया जा सकता है.

इतना आता है खर्च
अनुमान के मुताबिक अगर कोई शख्स हज पर जाता है तो उस पर करीब 3 लाख 37 हजार रुपये का खर्च बैठता है. वहीं, भारत सरकार भी खर्च पर कुछ सब्सिडी देती है. राज्य सरकार भी कुछ सब्सिडी और मदद करती है. वहीं, प्राइवेट ऑपरेटर्स के जरिए हज करने पर सब्सिडी नहीं मिलती है. तब इसका खर्च 6 से 7 लाख के बीच बैठता है.
मक्का में हुईं कुछ प्रमुख त्रासदियों में मारे गए भारतीय
मीना अग्नि त्रासदी 1997: 15 अप्रैल, 1997 को वार्षिक हज यात्रा के दौरान, मीना (मक्का) के तंबू शहर में भीषण आग लग गई, जिसमें 340 से ज़्यादा तीर्थयात्रियों की मौत हो गई और लगभग 1,500 घायल हो गए. भारतीय हज समिति की वेबसाइट के अनुसार, इस भयानक त्रासदी में 147 भारतीयों की मौत हुई थी.
मीना भगदड़ 2006: 12 जनवरी 2006 को सऊदी अरब के मीना में भगदड़ मची थी, जिसमें लगभग 1400 लोगों का मौत हुई थी. जिनमें 62 भारतीय भी मारे गए. यह घटना तब हुई जब हजारों तीर्थयात्री अल-जमारात से गुजर रहे थे, जो शैतान का प्रतीक तीन बड़ी पत्थर की दीवारें हैं. जिन पर तीर्थयात्री पत्थर फेंकते हैं ताकि वे अपने पापों से मुक्त हो सकें.
ग्रैंड मस्जिद क्रेन हादसा 2015 : 11 सितंबर 2015 को मक्का में आए भारी तूफान के चलते हरम शरीफ में एक क्रेन दुर्घटना हुई. इस दुर्घटना में 13 भारतीयों की मृत्यु हो गई और 19 घायल हो गए.
मीना भगदड़ 2015 : 24 सितंबर 2015 को मीना में भगदड़ मच गई. इस भगदड़ में 120 भारतीय हज यात्रियों की मृत्यु हुई थी.

