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प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए फ्री ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा का विशेषज्ञों ने किया स्वागत

विशेषज्ञों ने फ्री ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा का स्वागत किया, लेकिन डिजिटल पहुंच, स्कूल स्तर पर असमानताओं पर चिंता जताई. सुरभि गुप्ता की रिपोर्ट.

Experts views on Free Online Coaching for Competitive Exams Announced by PM Modi
80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल किले में छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया. (PTI)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : August 15, 2026 at 7:40 PM IST

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए फ्री ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा की. उन्होंने कहा कि इस पहल से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को महंगी प्राइवेट कोचिंग का वित्तीय बोझ कम करने में मदद मिलेगी.

स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कोचिंग परिवारों के लिए वित्तीय और सामाजिक दबाव का एक जरिया बन गई है, और माता-पिता को अक्सर लगता है कि अपने बच्चों को प्रतियोगी बनाए रखने के लिए प्राइवेट कोचिंग में एडमिशन कराना जरूरी है.

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब भारत की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली नए सिरे से जांच का सामना कर रहा है, जिसमें परीक्षा में गड़बड़ी, पेपर लीक और महंगे कोचिंग सेंटर पर स्टूडेंट्स की बढ़ती निर्भरता को लेकर चिंताएं हैं. NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद दिल्ली में इस मुद्दे स्टूडेंट्स के विरोध प्रदर्शन भी हुए.

पीएम मोदी ने कहा कि सरकार भारत के मौजूदा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और योग्य शिक्षकों के जरिये अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मुफ्त मदद देना चाहती है. इस पहल से छोटे शहरों और गांवों के छात्रों को भी फायदा होने की उम्मीद है, जिन्हें कोचिंग के लिए अभी बड़े शहरों में जाना पड़ता है, जिससे उन पर रहने, खाने और आने-जाने के खर्च का भार पड़ता है.

हालांकि, शिक्षा विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि क्या सिर्फ फ्री ऑनलाइन कोचिंग से शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में गहरी असमानताओं को दूर किया जा सकता है.

स्टेट प्लेटफॉर्म फॉर कॉमन स्कूल सिस्टम-तमिलनाडु (SPCSS-TN) के महासचिव पीबी प्रिंस गजेंद्र बाबू ने कहा कि सबसे पहले अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा तक सबको बराबर पहुंच दिलाने पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर, स्थायी शिक्षकों की उपस्थिति और बुनियादी शिक्षा की सुविधाओं तक पहुंच में अंतर बड़ी चिंताएं बनी हुई हैं. ऐसे में, उन्होंने स्कूल स्तर पर असमानताओं को दूर किए बिना प्रवेश परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन कोचिंग देने के असर पर सवाल उठाया.

डिजिटल विभाजन
बाबू ने डिजिटल विभाजन (Digital Divide) की ओर भी इशारा किया. उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से पिछड़े और पहली पीढ़ी के कई छात्रों को डिवाइस, बिजली और भरोसेमंद इंटरनेट कनेक्टिविटी पाने में मुश्किल हो सकती है. उन्होंने आगे कहा कि ऑनलाइन कोचिंग, फिजिकल क्लासरूम में शिक्षण की जगह नहीं ले सकती. उन्होंने कहा कि सरकार को इसके बजाय शिक्षा को एक बुनियादी अधिकार के तौर पर मजबूत करना चाहिए.

नई दिल्ली के रोहिणी में सीएम श्री स्कूल के प्रिंसिपल अवधेश कुमार झा ने इस घोषणा का स्वागत किया, लेकिन आगाह किया कि इसकी सफलता इसे लागू करने पर निर्भर करेगी. झा ने कहा, "यह खबर बेशक अच्छी है, खासकर अच्छी गुणवत्ता की कोचिंग की लागत को देखते हुए, जो कई छात्रों को अपने सपने पूरे करने से रोकती है." उन्होंने आगे कहा कि स्कीम कितनी प्रभावी होगी, यह आखिर में इसके लागू होने पर निर्भर करेगा.

पढ़ाई में अच्छे विद्यार्थियों को पहचानना
सेंट थॉमस स्कूल्स, गाजियाबाद के चीफ एकेडमिक कंसल्टेंट, कुरियाकोस वी.के. ने भी इस कदम का स्वागत किया और कहा कि भले ही इस स्कीम से कम छात्रों को फायदा हो, फिर भी यह एक सकारात्मक कदम होगा. उन्होंने 10वीं कक्षा के बाद पढ़ाई में अच्छे विद्यार्थियों को पहचानने और उन्हें और उनके माता-पिता को सही दिशानिर्देश (Orientation) देने का सुझाव दिया. साथ ही, कम फीस पर अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड वाले कोचिंग संस्थानों को भी शामिल करने का सुझाव दिया.

यह बहस खास तौर पर मिडिल-क्लास परिवारों के लिए जरूरी है, जो कई मौजूदा लक्षित सामाजिक कल्याण उपायों के लिए पात्र नहीं हो सकते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें प्राइवेट कोचिंग बहुत महंगी लग सकती है.

9वीं कक्षा के एक स्टूडेंट की अभिभावक प्रिया वर्मा ने कहा, "कई मिडिल क्लास परिवारों के लिए, कोचिंग की फीस एक अलग घरेलू खर्च बन जाती है. अगर सरकार अच्छे टीचर, सही टेस्ट और डाउट-सॉल्विंग समर्थन मुफ्त में दे सके, तो इससे माता-पिता पर दबाव सच में कम हो सकता है."

11वीं कक्षा के छात्र हर्ष शर्मा ने कहा, "मुफ्त कक्षाएं उपयोगी लगती हैं, लेकिन छात्र शिक्षण की गुणवत्ता से योजना का मूल्यांकन करेंगे. अगर ऑनलाइन कक्षाएं अनियमित हैं या अध्ययन सामग्री निजी कोचिंग जितनी अच्छी नहीं है, तो छात्र अभी भी कोचिंग के लिए भुगतान करने को मजबूर हो सकते हैं."

सरकार की प्रस्तावित पहल से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी से जुड़े कुछ खर्च कम हो सकते हैं, लेकिन सिर्फ लेक्चर ऑनलाइन करना काफी नहीं होगा. छात्रों को भरोसेमंद इंटरनेट, स्मार्टफोन या कंप्यूटर, अपडेटेड स्टडी मटीरियल, मॉक टेस्ट, परफॉर्मेंस ट्रैकिंग और डाउट्स दूर करने के तरीकों की जरूरत होगी. सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि अलग-अलग परीक्षाएं और इलाकों में पढ़ाने की गुणवत्ता एक जैसी बनी रहे.

छोटे शहरों और गांवों के छात्रों के लिए सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि वे कोटा, दिल्ली या हैदराबाद जैसे कोचिंग हब में जाए बिना तैयारी कर सकें. लेकिन अगर डिजिटल पहुंच एक जैसा नहीं रहती है, तो इस स्कीम से उन छात्रों को फायदा हो सकता है जिनके पास पहले से ही बेहतर कनेक्टिविटी और डिवाइस हैं.

इस घोषणा से भारत की परीक्षा पर आधारित शिक्षा प्रणाली पर भी एक बड़ा सवाल उठता है. जैसे-जैसे मेडिकल, इंजीनियरिंग, यूनिवर्सिटी और सरकारी परीक्षाओं में सीमित सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, कोचिंग परीक्षा की तैयारी के साथ तेजी से जुड़ती जा रही है.

डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी 1927 में बॉम्बे यूनिवर्सिटी बिल पर बहस में हिस्सा लेते हुए इसी तरह चेतावनी दी थी कि परीक्षाओं को इतना मुश्किल बनाने का खतरा है कि वे उन समुदायों को बाहर कर दें जिन्हें पहले से उच्च शिक्षा तक पहुंच नहीं मिली है.

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