इटली की फसल जुकिनी की हो रही हजारीबाग में खेती, किसानों को कम लागत में होगा ज्यादा मुनाफा
हजारीबाग में कृषि अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र में जुकिनी की खेती की गई. इसका प्रयोग सफल हुआ. किसान भी जल्द इसकी खेती कर सकते हैं.

Published : December 11, 2025 at 8:20 PM IST
|Updated : January 1, 2026 at 5:09 PM IST
गौरव प्रकाश की रिपोर्ट
हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले के लोगों को अब एक नई सब्जी का स्वाद चखने का मौका मिलेगा. हजारीबाग के डेमोटाड़ में कृषि अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र में जुकिनी की खेती सफलतापूर्वक की गई है. जुकिनी इटली की मूल फसल है. अब हजारीबाग के किसान भी अपने खेतों में इस सब्जी की खेती कर सकते हैं.
हजारीबाग एक कृषि प्रधान क्षेत्र है. यहां के किसान अक्सर फल और सब्जियों की नई किस्मों की खेती करते हैं और पूरे राज्य में पहचान बनाते हैं. डेमोटाड़ में कृषि अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र किसानों को सहायता प्रदान करता है. वर्तमान में, प्रशिक्षण केंद्र जुकिनी की खेती कर रहा है, जो मूल रूप से इटली की एक विदेशी सब्जी है.
इस सब्जी को राजस्थान, गुजरात और बिहार जैसे भारतीय राज्यों में सफलतापूर्वक उगाया जा रहा है. इस बार, हजारीबाग प्रशिक्षण केंद्र में भी जुकिनी की खेती की गई, जो प्रयोग सफल रहा. इसकी खेती करने वाले किसान राजेश कुमार का कहना है कि हजारीबाग में बड़े पैमाने पर इसकी खेती की जा सकती है. इसे गर्मी और सर्दी दोनों मौसमों में उगाया जा सकता है. यह कद्दू-खीरा परिवार का पौधा है.
हजारीबाग की मिट्टी कई विदेशी फसलों के लिए उपयुक्त है. ड्रैगन फ्रूट के बाद अब हजारीबाग में जुकिनी की खेती भी संभव होगी. कृषि अनुसंधान केंद्र में इसका सफल उत्पादन किया गया है. केंद्र में सफल उत्पादन के बाद, हजारीबाग के किसान भी इसकी खेती कर पाएंगे क्योंकि यहां उपयुक्त जलवायु और मिट्टी उपलब्ध है.

जुकिनी एक कद्दू वर्गीय फसल है और इसे चप्पन कद्दू के नाम से भी जाना जाता है. जुकिनी विदेशों में उगाई जाने वाली फसल है. किसान राजेश कुमार का कहना है कि जुकिनी इस्तेमाल सब्जी और सलाद के रूप में किया जाता है. इसमें पोटेशियम और विटामिन ए और सी जैसे पोषक तत्व होते हैं, जिसके कारण बाजार में इसकी हमेशा मांग रहती है. इसलिए, इसकी खेती किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है. जुकिनी एक लतावर्गीय पौधा है, जिसकी लंबाई लगभग 3 फीट होती है. एक पौधे पर केवल 7 से 8 फल लगते हैं. यह स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों की पसंदीदा सब्जी है. जुकिनी दो प्रकार की होती है: पीली और हरी. हजारीबाग में दोनों किस्मों का उत्पादन किया गया है.

जुकिनी की बुवाई गर्मी के मौसम में की जाती है. इसे खेतों में बीज बोकर उगाया जाता है. 60 दिनों के भीतर इसमें फसल आने लगती है. पॉलीहाउस में इसे साल में तीन बार उगाया जा सकता है. किसान इसकी सही तरीके से खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं और ज्यादा पैदावार हासिल कर सकते हैं. एक ज़ुकिनी की कीमत ₹30 से ₹50 तक होती है.

जुकिनी में कई तरह के विटामिन, खनिज और लाभकारी तत्व होते हैं. पकी हुई ज़ुकिनी में विटामिन A भरपूर मात्रा में होता है. इसके एंटीऑक्सीडेंट्स कई तरह के स्वास्थ्य लाभ देते हैं. पानी और फाइबर से भरपूर होने के कारण यह कब्ज और पेट की कई बीमारियों के लक्षणों को कम करके पाचन को बेहतर बनाता है. इसमें मौजूद फाइबर इंसुलिन और ब्लड शुगर लेवल को स्थिर कर सकता है. यह पोटेशियम और फाइबर से भी भरपूर होता है, जो ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारियों का खतरा कम कर सकता है. यह आंखों, त्वचा, हड्डियों, थायराइड और दिल के लिए फायदेमंद हो सकता है.
यह भी पढ़ें:
हजारीबाग में परंपरागत तरीके से तैयार होता है 'चावल', स्वाद के साथ पोषक तत्वों से रहता है भरपूर
मजदूरी छोड़ शुरू की खेती और फिर कर दिया कमाल, कामदेव ने जज़्बे से कायम की मिसाल

