Exclusive : जेईई एडवांस्ड टॉपर शुभम कुमार बोले- कुछ नया पढ़ने के शौक ने बनाया टॉपर, 9वीं तक नहीं जानते थे IIT एंट्रेंस क्या होता है?
शुभम कुमार ने कहा- उनका गोल केवल यही था कि जो भी करना है, वह अच्छा करना है. मनीष गौतम की रिपोर्ट...

Published : June 1, 2026 at 3:25 PM IST
|Updated : June 1, 2026 at 7:13 PM IST
कोटा: बचपन में शुभम कुमार को नया पढ़ने का शौक था और इसी का फायदा उसे मिला है. बचपन से ही नई बुक या कुछ भी नया वह पढ़ता था. इसी की बदौलत पढ़ाई में वह हमेशा आगे रहा. नया पढ़ने और अच्छा पढ़ने के चलते आज जेईई एडवांस्ड का टॉपर भी बन गया है. ईटीवी भारत से हुई खास बातचीत में शुभम कुमार का कहना उनका गोल केवल यही था कि जो भी करना है वह अच्छा करना है. इसी के चलते मैं यह स्कोर कर पाया हूं.
शुभम ने कहा कि पहले मैंने जेईई मेन के लिए मेहनत की और जब यह लगा कि मैं टॉप टेन रैंक में आ सकता हूं. तब मैंने उसके टॉपर बनने की मेहनत शुरू की. यह सफर भी मेरा जारी रहा. इसके बाद जेईई एडवांस्ड में मैंने गोल सेट कर लिया. कोटा में पढ़ाई के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमने कुछ खास नहीं किया है. मुझे कोचिंग में जो पढ़ाया या फिर जो मेटेरियल दिया था और क्लासरूम में जो मुझे मिला, उसको अच्छे से पढ़ा और रिवीजन किया.
सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट का एनालिसिस भी मैंने स्वयं किया, ताकि टेस्ट में जो गलतियां थीं उन्हें दूर किया जा सके. मेरा पूरा फोकस इसी पर था. उन्होंने फ्यूचर में इस परीक्षा के कैंडिडेट को सलाह दी है कि सिलेबस को पूरा करने के बाद जितने हो सकते हैं उतने मॉक टेस्ट दें. पूरा उन पर फोकस रहना चाहिए और इससे सबसे ज्यादा फायदा जेईई मेन व एडवांस्ड जैसे एग्जाम में होता है.
मुझे कक्षा 9 तक जेईई मेन व एडवांस्ड के बारे में पता नहीं था. यहां तक कि आईआईटी एंट्रेंस के संबंध में जानकारी नहीं थी, लेकिन जब मेरी बहन ने इसकी तैयारी शुरू की, तब मुझे यह जानकारी मिली. मैंने कक्षा 10 में इस तरफ रुख कर लिया था. मुझे फिजिक्स पढ़ना इंटरेस्टिंग लगता था. दूसरी तरफ मैथमेटिक्स सॉल्व करने में भी काफी मजा आता था. इसके बाद मैंने कुछ फिजिक्स और केमिस्ट्री की बुक्स पढ़ना शुरू किया. इसमें क्वेरीज होने पर दीदी श्रेया से भी चर्चा करने लगा, जिसमें प्रॉब्लम्स या थ्योरी पॉइंट पर एक दूसरे के साथ पढ़ते गए.
जेईई एडवांस्ड में कबीर जेईई मेन का टॉपर था और आप एडवांस्ड में आगे हैं. इस सवाल पर उन्होंने कहा कि इस पर कोई खास कमेंट नहीं है, लेकिन मेरी व कबीर की परफॉर्मेंस जेईई मेन और एडवांस्ड के समय एक जैसी है. इसमें कोई खास फर्क नहीं है. इसमें भी एक सवाल का ही डिफरेंस है. थोड़ा बहुत ऊपर-नीचे होता रहता है, लेकिन फाइनली हम सब दोस्त एक साथ आईआईटी में जाने वाले हैं. अब इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है.
शुभम की बहन आईआईटी पटना से कंप्यूटर साइंस पढ़ रही श्रेया कुमारी का कहना है कि मैंने उसकी क्यूरियोसिटी को इन्हेंस करने में मदद की है. उसकी शुरुआत में ही फिजिक्स और मैथमेटिक्स में इंटरेस्ट था. इसलिए जब 11वीं में आई तो तब वह दसवीं में था. उसकी हेल्प की और उसे ग्यारहवीं के कांसेप्ट को मैंने ब्रशअप किया है.
आईआईटी बॉम्बे टारगेट के सवाल पर श्रेया कुमारी का कहा कि मुझे अपना बेस्ट करना था. ऐसे मैंने कोई टारगेट सेट नहीं किया था. शुभम का भी यह टारगेट नहीं था. उसे भी अपना बेस्ट एग्जाम में देना था, लेकिन अब अच्छी बात है कि वह आईआईटी बॉम्बे में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करेगा. पिता शिव कुमार का कहना है कि हमारे परिवार के लिए इससे बड़ी खुशी और कुछ नहीं है. इसीलिए मैं काफी खुश हूं.
कोटा के बारे में नेगेटिव सुना था, इसकी वजह मैंने काफी समय गया और शुभम को रोक कर रखा. कोटा भेजने का फैसला नहीं लिया था. शुभम को कोटा भेजने के लिए श्रेया ने काफी प्रेशर डाला कि कोटा भेजना ही होगा. वहां पर काफी बेस्ट वह कर पाएगा और इसीलिए कोटा भेज दिया. अब यह रिजल्ट उसका आया है. जैसा हमने सुना था, कोटा शिक्षा की नगरी है, वैसा ही यहां पर माहौल है. इसके अलावा यहां पर कुछ स्टूडेंट के मन में नेगेटिव माइंड सेट होता है. मैं समझता हूं कि अगर यहां आकर वह पॉजिटिव करें या पॉजिटिव सोचेंगे तो रिजल्ट बेहतर कर सकते हैं.
उनकी मां कंचन देवी का कहना है कि शुरू से ही शुभम को पढ़ना काफी पसंद है. उसे कुछ भी नया दिखा तो उसे खोलकर पढ़ना चालू कर देता है. स्टार्टिंग से उसकी हॉबी पढ़ाई रही है. कक्षा 1 और 2 से ही यह लगता था कि शुभम पढ़ाई पर ज्यादा फोकस कर रहा है. ओलंपियाड में भी आगे रहा था और कक्षा 9वीं आते-आते जेईई के लिए हम बोलते थे, तो उसे भी लगा कि इस और जाना चाहिए, क्योंकि फिजिक्स व मैथेमेटिक्स में काफी इंटरेस्ट था.
उसकी बहन को भी इन दोनों सब्जेक्ट में इंटरेस्ट था. वह गया से ही तैयारी कर रहा था, लेकिन कोटा आएगा तो ज्यादा बेहतर होगा. इसलिए यहां पर भेज दिया और भेजने का फायदा भी हमें हुआ है. यहां का फैकल्टी, स्टडी मेटेरियल और माहौल काफी मदद कर पाया है. ऑल इंडिया रैंक वन आने पर काफी खुशी है.

