Exclusive : पढ़ाई के लिए जिद करने वाले अर्णव भी बने जेईई टॉपर, स्कूल में ज्यादा पढ़ने के लिए रोने लग गए थे
अर्णव गौतम जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया टॉपर-7 पर आए हैं, जबकि जेईई मेन में AIR-5 पर थे. मनीष गौतम की रिपोर्ट...

Published : June 1, 2026 at 6:52 PM IST
कोटा: जेईई एडवांस्ड टॉपर अर्णव गौतम पढ़ाई के लिए काफी अडिग रहे हैं, यहां तक कि उन्हें एक बार इंटीग्रेटेड क्लासेस के लिए अपने पेरेंट्स को मनाने में भी पसीने आ गए थे. इंजीनियरिंग एंट्रेंस की इंटीग्रेटेड क्लासेस स्कूल में ज्वाइन करना चाहते थे, लेकिन पेरेंट्स मना कर रहे थे. आखिर वह रोने लग गए और पेरेंट्स को मानना पड़ा.
इसके बाद में कोटा कोचिंग में एडमिशन ले लिया. यहां भी मेहनत की और आखिर में जेईई एडवांस्ड जैसी कठिन परीक्षा के टॉपर बन गए हैं. वह एक ऐसे स्टूडेंट रहे हैं, जो स्कूल क्लासेज के बाद और ज्यादा पढ़ने के लिए रोने लग गए थे. आखिर 17 मई को आयोजित हुई परीक्षा में यह कारनामा भी दिखाया है, जिसके परिणाम में ऑल इंडिया टॉपर-7 पर आए हैं, जबकि जेईई मेन में AIR-5 पर थे.
ईटीवी भारत से विशेष बातचीत में अर्णव गौतम का कहना है कि जब मैं शुरुआत में पढ़ता था, तब मुझे मजा आता था. इसके बाद जब दसवीं में पढ़ रहा था, तब यह गोल मैंने सेट कर लिया कि जेईई एडवांस्ड क्रैक करना है और टॉपर बनना है. जिसके बाद आईआईटी बॉम्बे में एडमिशन लेना है. हालांकि, अभी इसके बाद का भविष्य तय नहीं किया है. पहले कंप्यूटर साइंस से बीटेक करना लक्ष्य है, यह पूरी करूंगा.
स्टूडेंट को यह दी सलाह : अर्णव गौतम का कहना है कि मेरी तो यही सलाह है कि मेहनत करते रहे हैं, मोबाइल पर टाइम पास नहीं करें. समय का सदुपयोग करें, टाइम बर्बाद नहीं करें. टॉपर शुभम कुमार और कबीर छिल्लर दोनों मोबाइल का उपयोग सीमित करते थे. इस सवाल के जवाब पर अर्णव ने कहा कि यह पढ़ाई के लिए भी जरूरी है. मेरा बिल्कुल जीरो यूज नहीं है. मैं कुछ उपयोग सोशल मीडिया Apps का करता था, लेकिन केवल पढ़ाई के लिए ही करता हूं.

सबसे हार्ड ऑर्गेनिक केमिस्ट्री का सब्जेक्ट लगा : सब्जेक्ट्स में कौन सा टफ या ईजी था. इस सवाल के जवाब में अर्णव का कहना है कि उन्हें फिजिकल केमेस्ट्री का सब्जेक्ट सबसे आसान लग रहा था. सबसे हार्ड ऑर्गेनिक केमिस्ट्री लग रहा था. फिजिक्स और मैथमेटिक्स का विषय दूसरे बच्चों को हार्ड लगता है, आपका क्या कहना है. इस सवाल पर उन्होंने कहा कि फिजिक्स और मैथमेटिक्स मेरा शुरू से ही इंटरेस्टिंग सब्जेक्ट था. धीरे-धीरे पढ़ते समय मुझे और समझ आने लगा. मैं और पढ़ता गया और इनमें मजा आता गया. अर्णव का एक रूटीन सबसे खास था कि वह कोचिंग से पढ़ाई खत्म करने के बाद जब घर आता तो डिनर करता और उसके बाद अपने भाई के साथ गली क्रिकेट खेलता था. इससे वह अपने आप को रिफ्रेश महसूस करता था.
बचपन से ही जिज्ञासु, सब कुछ खुद करता था मैनेज : उनके पिता डॉ. बुद्धि प्रकाश गौतम का कहना है कि शुरू से ही अर्णव जिज्ञासु प्रवृत्ति का था. यह लगातार पढ़ता रहा है और लगातार मेहनत से ही सफलता मिली है. अर्णव खुद ही सब मैनेज करता था, क्योंकि हम (पेरेंट्स) जॉब में थे और टाइम मैनेजमेंट भी उसे खुद को ही करना होता था. स्कूल की पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल सब्जेक्ट की तैयारी भी करनी होती है. इसके साथ जेईई मेन, बोर्ड व एडवांस्ड की भी तैयारी की थी. इन सबको बैलेंस करते हुए ही बराबर शेड्यूल बना कर रखता था और पूरा उसी को मेंटेन रखा था.
यह है इंटीग्रेटेड क्लासेस का किस्सा : उनकी मां व गवर्नमेंट स्कूल टीचर निधि गौतम का कहना है कि अर्णव का एक स्कूल का किस्सा है. इसमें स्कूल की पढ़ाई के साथ-साथ आईआईटी जेईई की प्रिपरेशन के लिए कक्षा 6 से ही तैयारी शुरू हो जाती है. यहां पर इंटीग्रेटेड क्लासेस स्कूलों में लगती है. इसके स्कूल में भी इसी तरह से सिस्टम चल रहा था, जिसमें स्कूल के बाद इंटीग्रेटेड क्लासेस चलती थी, लेकिन हमने इसके लिए इनकार कर दिया था. हमने कहा कि केवल स्कूल ही ज्वाइन करना है. इंटीग्रेटेड क्लासों को स्किप करना है. अर्णव भावुक हो गया और पढ़ने के लिए काफी चिंतित हो गया था. पूरी तरह से अड़ गया कि मुझे इंटीग्रेटेड क्लासेस पढ़नी ही है. इसके लिए रोने भी लग गया था.
सफलता के लिए जरूरी सभी गुण अर्णव में : उनके नाना सत्यनारायण शर्मा का कहना है कि मुझे काफी खुशी है. जैसी कभी नहीं हुई वैसी खुशी है. परिवार और समाज का नाम रोशन कर दिया है. यह सिद्ध कर दिया है कि बहुत मेहनती बच्चा है. केवल एक ही उद्देश्य इसका था कि मुझे पढ़ाई करनी है. अर्णव के चाचा चेतन शर्मा का कहना है कि जब अर्णव छोटा था, स्कूल में एडमिशन भी नहीं हुआ था, तब भी किताबों से लगाव हो गया था. किताबों को संभाल के रखना था और उन्हें काफी पढ़ता था. विद्यार्थियों के लिए पुराने साहित्य में पांच लक्षण में बताए हैं. जिनमें लक्ष्य को पाने के लिए पूरे लगन से मेहनत करना, आलस नहीं करना, अल्प आहार व संतुलित भोजन, सुख सुविधाओं का त्याग व कठिन परिश्रम करना है. यह अर्णव में समाहित है.

