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चंदे से भरा BJP का खजाना; कांग्रेस को मिली केवल 7.8% धनराशि, 4 कंपनियों ने दिए सबसे ज्यादा दान

ADR ने जारी की साल 2024-25 की रिपोर्ट, ट्रस्टों को मिले कुल 3,826.3417 करोड़ रुपये, LLP बनी सबसे बड़ी दानवीर.

चुनावी ट्रस्टों ने पार्टियों को दिए करोड़ों रुपये.
चुनावी ट्रस्टों ने पार्टियों को दिए करोड़ों रुपये. (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : February 14, 2026 at 5:01 PM IST

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हैदराबाद : पॉलिटिकल चंदे से सत्तारुढ़ बीजेपी को सबसे ज्यादा फायदा हुआ. साल 2024-25 के दौरान पार्टी का खजाना भर सा गया. इसे 3,157 करोड़ रुपये मिले. जबकि कांग्रेस को महज 398 करोड़ ही मिले हैं. एडीआर (Association for Democratic Reforms) की ओर से चंदे की रिपोर्ट जारी की गई है. इसमें कई अहम जानकारियां सामने आईं हैं.

इलेक्टोरल ट्रस्ट (Electoral Trusts) कॉरपोरेट घरानों और व्यक्तियों से चंदा लेकर उसे सियासी दलों को देते हैं. इससे पार्टियों को बिना किसी औद्योगिक घरानों से जुड़े ही सीधे तौर पर बड़े फंड मिल जाते हैं. इन ट्रस्ट को हर साल चंदा देने और लेने वालों की जानकारी चुनाव आयोग को देनी होती है. इसे लेकर प्रत्येक वर्ष ADR की ओर से रिपोर्ट जारी की जाती है.

कांग्रेस को मिला 398 करोड़ का चंदा : साल 2024-25 को लेकर ADR ने हाल ही में रिपोर्ट जारी की है. इसके अनुसार कंपनियों और व्यक्तियों से कुल 3,826.3417 करोड़ रुपये मिले. भाजपा को 3,157 करोड़, जबकि कांग्रेस को 398 करोड़ का चंदा मिला. कुल फंड का करीब 82.52% हिस्सा भाजपा के खाते में आया. जबकि कांग्रेस को महज 7.81% धनराशि से ही संतोष करना पड़ा.

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किन कंपनियों ने कितना दिया दान? : रिपोर्ट के अनुसार जिन 10 इलेक्टोरल ट्रस्टों ने दान मिलने की रिपोर्ट दी है, उन्हें औद्योगिक घरानों, कंपनियों और अन्य लोगों से कुल 3826.3417 करोड़ रुपये मिले. ट्रस्टों ने अलग-अलग राजनीतिक दलों को 3826.3522 करोड़ बांटे. 228 कॉर्पोरेट/बिजनेस हाउस ने इलेक्टोरल ट्रस्टों को 3636.819 करोड़ रुपये का योगदान दिया है. 15 कंपनियों ने प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट को 915 करोड़ रुपये का योगदान दिया.

9 कंपनियों ने न्यू डेमोक्रेटिक इलेक्टोरल ट्रस्ट को 160 करोड़ रुपये, 7 कंपनियों ने हार्मनी इलेक्टोरल ट्रस्ट को 35.55 करोड़, 3 कंपनियों ने ट्रायम्फ इलेक्टोरल ट्रस्ट को 25 करोड़ रुपये का योगदान दिया. इसी तरह 3 कंपनियों ने भारतीय भूमि इलेक्टोरल ट्रस्ट को 15 करोड़ रुपये दिए. इसी तरह 5 कंपनियों ने समाज ट्रस्ट को 6 करोड़ दिए. 1 कंपनी ने जनप्रगति इलेक्टोरल ट्रस्ट को 1.02 करोड़ रुपये, जबकि 1 अन्य कंपनी ने जनकल्याण इलेक्टोरल ट्रस्ट को 20 लाख रुपये दिए.

दान में LLP सबसे आगे, टाटा दूसरे स्थान पर : 99 अन्य लोगों और फर्मों के मालिकों ने भी चुनावी ट्रस्टों को दान दिया. 96 लोगों ने प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट को 187.5427 करोड़ और 3 लोगों ने आइंजिगार्टिग इलेक्टोरल ट्रस्ट को 8 लाख दिए. सभी दानदाताओं में महाराष्ट्र की रियल इस्टेट कंपनी एलिवेटेड एवेन्यू रियल्टी LLP ने सबसे ज्यादा 500 करोड़ रुपये का दान दिया. इससे बाद टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड ने 308.1324, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज लिमिटेड ने 217.6216 और मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने अलग-अलग ट्रस्टों को 175 करोड़ का दान दिया.

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ट्रस्टों को मिले दान का आंकड़ा.
ट्रस्टों को मिले दान का आंकड़ा. (Graphics Credit; ETV Bharat)

किस ट्रस्ट को मिले सबसे ज्यादा रुपये? : 184 कॉर्पोरेट घरानों ने प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट को 2479.049 करोड़ रुपये का दान दिया. रिपोर्ट के अनुसार यह किसी ट्रस्ट को मिला सबसे ज्यादा दान है. टॉप 10 दानदाताओं ने इलेक्टोरल ट्रस्टों को 1908.8621 करोड़ का दान दिया. यह साल 2024-25 के दौरान ट्रस्ट को मिले कुल दान का 49.89% है. इन सभी 10 डोनर्स ने प्रूडेंट, प्रोग्रेसिव और न्यू डेमोक्रेटिक इलेक्टोरल ट्रस्टों को दान दिया.

किस सेक्टर से मिला सबसे अधिक डोनेशन? : रिपोर्ट के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (विनिर्माण क्षेत्र) से चुनावी ट्रस्टों को 1,063.128 करोड़ दान में मिले. यह किसी भी एक सेक्टर की ओर से दिए गए दान का सबसे ज्यादा है. यह कुल दान (3826.3417 करोड़ ) का करीब 27.78% था. इसी तरह रियल इस्टेट से 629.17 करोड़ मिले. यह कुल दान का 16.44% था. कम्युनिकेशन/IT/टेलीकॉम से 451.8582 करोड़ का दान मिला.

यह कुल दान का करीब 11.81% था. इस तरह रियल इस्टेट सेक्टर दूसरे जबकि कम्युनिकेशन/IT/टेलीकॉम सेक्टर तीसरे स्थान पर रहा. इसी तरह फाइनेंस सेक्टर से 389.8581 करोड़ मिले. यह कुल दान का 10.19% है. माइनिंग/कंस्ट्रक्शन/इंफ्रास्ट्रक्चर/इंजीनियरिंग क्षेत्र से 358.6872 करोड़ मिले. यह कुल दान का 9.37% है. पावर और ऑयल सेक्टर से 255.9675 करोड़ मिले. यह कुल दान का 6.69% है.

किस ट्रस्ट ने किस पार्टी को कितना दिया दान? : प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने BJP को 2180.7119 करोड़ का दान दिया. जबकि साल 2023-24 में इस ट्रस्ट ने इसी पार्टी को 723.785 करोड़ रुपये का डोनेशन दिया था. प्रोग्रेसिव ट्रस्ट ने साल 2024-25 में अपनी कुल इनकम का 757.6205 करोड़ भारतीय जनता पार्टी को दान दिया. प्रूडेंट ने INC (Indian National Congress) को 216.335 करोड़ का डोनेशन दिया.

प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 15 पॉलिटिकल पार्टियों को डोनेशन दिया. इसमें BJP, INC, AITC (All India Trinamool Congress), YSR-कांग्रेस, TDP (तेलुगु देशम पार्टी), JD(U) (जनता दल (यूनाइटेड), AAP (आम आदमी पार्टी), BJD (बीजू जनता दल), BRS (भारत राष्ट्र समिति), भारत धर्म जन सेना, AJSU (ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन), SDF (सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट), LJP (लोक जनशक्ति पार्टी), NCP (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) और प्रजा शांति पार्टी जैसी सभी पार्टियां शामिल हैं.

BJP को 3157.6549 करोड़ रुपये मिले. यह सभी राजनीतिक पार्टियों को चुनावी ट्रस्टों से मिले दान का सबसे ज्यादा है. यह कुल डोनेशन का 82.52% है. वहीं INC को 298.7795 करोड़ रुपये मिले. यह कुल डोनेशन का 7.81% है. AITC को सभी 10 इलेक्टोरल ट्रस्ट से सभी पार्टियों को मिले कुल डोनेशन का 2.67% यानी 102 करोड़ रुपये मिले. 10 चुनावी ट्रस्टों की ओर से 19 दूसरी पार्टियों को कुल मिलाकर 267.9178 करोड़ रुपये दान दिए गए.

दान में किस राज्य की रही ज्यादा भागीदारी? : चुनावी ट्रस्टों को विभिन्न राज्यों की कंपनियों/फर्मों से दान मिला. इसमें महाराष्ट्र सबसे बड़ा दानी रहा. वहां से इलेक्टोरल ट्रस्टों को 1225.4293 करोड़ रुपये मिले. ये रुपये प्रोग्रेसिव और न्यू डेमोक्रेटिक ट्रस्ट को मिले. इसी तरह तेलंगाना से 358.25, हरियाणा से 212.90 करोड़ मिले. गुजरात से 200.50 करोड़, पश्चिम बंगाल से 203.8538, दिल्ली से 188.72 और तमिलनाडु से 153 करोड़ का दान मिला.

अप्रैल में मिला सबसे ज्यादा दान : रिपोर्ट के अनुसार 10 चुनावी ट्रस्टों को सबसे ज्यादा दान साल 2024 में अप्रैल महीने में मिला. इस दौरान 1,217.0821 करोड़ मिले. इसके बाद इसी साल के अक्टूबर में 1,021.525 करोड़ मिले. यानी अप्रैल और अक्टूबर दोनों महीने में ट्रस्टों को सबसे ज्यादा दान मिला. वहीं साल 2024 के ही मई में 934.3919 करोड़ का दान मिला. अक्टूबर में प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट को 915 करोड़ का दान मिला. इसके अलावा अन्य महीनों में काफी कम दान मिला.

20 चुनावी ट्रस्टों में से 15 ने भेजी रिपोर्ट : CBDT में रजिस्टर्ड 20 चुनावी ट्रस्टों में से 15 ने 2024-25 के लिए अपने कंट्रीब्यूशन की डिटेल्स ECI को दी है. इनमें से सिर्फ 10 ट्रस्ट ने अलग-अलग कॉर्पोरेट घरानों और लोगों से दान मिलने की जानकारी दी है. 6 ट्रस्ट अपने रजिस्ट्रेशन के बाद से लगातार इलेक्शन कमीशन को अपनी कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट दे रहे हैं. सत्या/प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट अकेला ऐसा ट्रस्ट है जिसने 2013-14 से 2024-25 तक 12 साल की अपनी सालाना रिपोर्ट जारी की है. इसमें हर साल मिले दान की जानकारी दी गई है.

महीनेवाइज मिले दान का ब्यौरा.
महीनेवाइज मिले दान का ब्यौरा. (Graphics Credit; ETV Bharat)

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साल 2014 में चुनाव आयोग ने जारी की थी गाइड लाइन : भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने साल 2014 में 6 जून को इलेक्टोरल ट्रस्ट (चुनावी ट्रस्ट) को लेकर गाइड लाइन जारी की थी. इसके अनुसार पारदर्शिता बनाए रखने के लिए चुनावी ट्रस्टों को मिली रकम और उनकी ओर से राजनीतिक पार्टियों को दिए गए रुपये की पूरी रिपोर्ट हर साल देनी होती है.

उस दौरान साल 2013 के बाद बनी 7 इलेक्टोरल ट्रस्ट को ये गाइड लाइन जारी की गई थी. इनमें सत्य इलेक्टोरल ट्रस्ट, प्रतिनिधि इलेक्टोरल ट्रस्ट, पीपुल्स इलेक्टोरल ट्रस्ट, प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट, जनहित इलेक्टोरल ट्रस्ट, बजाज इलेक्टोरल ट्रस्ट और जनप्रगति इलेक्टोरल ट्रस्ट शामिल थे. इसके बाद बने चुनावी ट्रस्टों पर ये नियम लागू कर दिए गए.

चुनाव आयोग के अनुसार CBDT (Central Board of Direct Taxes) की ओर से साल 2022 तक देश में स्वीकृत चुनावी ट्रस्टों की संख्या 18 थी. इन ट्रस्टों में परिवर्तन, समाज, स्वदेशी, जनता निर्वाचक, जन कल्याण, जय भारत, प्रूडेंट, जय हिंद, न्यू डेमोक्रेटिक, एबी जनरल इलेक्शन, समाज डोनेशन, इंडीपेंडेंट, भारतीय भूमि आदि इलेक्टोरल ट्रस्ट शामिल हैं. वहीं अब मौजूदा रिपोर्ट के अनुसार कुल 20 चुनावी ट्रस्ट हो गए हैं.

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इलेक्टोरल ट्रस्ट के लिए क्या हैं नियम? : इलेक्टोरल ट्रस्ट (चुनावी ट्रस्ट) को CBDT की ओर से मंजूरी दी जाती है. इन्हें कंपनी अधिनियम के तहत धारा 8 (पूर्व में धारा 25) के तहत गैर लाभकारी कंपनियों के रूप में पंजीकृत किया जाता है. पंजीकरण के लिए ट्रस्ट को CBDT को आवेदन भेजना होता है. इनकी वैधता 3 साल के लिए होती है. ट्रस्ट के लिए एक शर्त यह भी होती है कि इन्हें अपने नाम में 'इलेक्टोरल' शब्द जरूर शामिल करना होता है.

केंद्र सरकार के बनाए नियमों के मुताबिक इलेक्टोरल ट्रस्ट को वित्तीय वर्ष के दौरान मिले कुल कंट्रीब्यूशन (दान) का कम से कम 95% हिस्सा पिछले फाइनेंशियल ईयर से लाए गए सरप्लस के साथ, उसी वित्तीय वर्ष के 31 मार्च से पहले पात्र राजनीतिक पार्टियों को बांटना जरूरी है. ट्रस्टों की ओर से पार्टियों को दिया गया पैसा टैक्स फ्री होता है.

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