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के. कविता की पार्टी TRS का नाम बदलने के पहले उनका पक्ष सुने निर्वाचन आयोग

दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग को दिया निर्देश, कहा- तेलंगाना रक्षणा सेना के नाम पर फैसला करने से पहले के कविता के पक्ष को सुनें

टीआरएस का नाम बदलने के पहले के कविता का पक्ष सुनने के निर्देश
टीआरएस का नाम बदलने के पहले के कविता का पक्ष सुनने के निर्देश (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Delhi Team

Published : July 7, 2026 at 7:43 PM IST

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Updated : July 7, 2026 at 7:50 PM IST

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नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने तेलंगाना रक्षणा सेना (टीआरएस) नामक राजनीतिक दल का नाम बदलने के निर्वाचन आयोग के निर्देश को चुनौती देने वाली के कविता को अंतरिम राहत दी है. हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि तेलंगाना रक्षणा सेना के नाम पर फैसला करने से पहले के कविता के पक्ष को सुनें. हाईकोर्ट ने के कविता को निर्देश दिया कि वो अपना प्रतिवेदन निर्वाचन आयोग को एक हफ्ते के अंदर दें.

दरअसल के कविता ने बीआरएस से अलग होने के बाद तेलंगाना रक्षणा सेना (टीआरएस) नामक राजनीतिक दल के रजिस्ट्रेशन के लिए निर्वाचन आयोग को आवेदन किया था. निर्वाचन आयोग ने आवेदन पर विचार करते हुए 12 मई और 23 जून को के कविता को नोटिस देते हुए कहा कि पार्टी का नाम बदल लें. निर्वाचन आयोग को इन्हीं नोटिस को के कविता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की ओऱ से पेश वकील ने कहा कि टीआरएस नाम की दो पार्टियां निर्वाचन आयोग के यहां पहले से रजिस्टर्ड हैं.

एक पार्टी तेलंगाना का है जिसका नाम तेलंगाना राज्य समिति है जबकि दूसरा महाराष्ट्र की पार्टी है जिसका नाम है तेलंगाना राष्ट्र सामाजिका सेना. निर्वाचन आयोग ने कहा कि टीआरएस नाम पर एक हजार से ज्यादा आपत्तियां आयी हैं. इन आपत्तियां में से अधिकांश भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) नामक राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं की ओर से आयी हैं.

बीआरएस का पहले नाम तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) था. आपत्ति दर्ज कराने वालों का कहना था कि कविता की पार्टी का नाम बीआरएस के पूर्व के पहचान टीआरएस से काफी मिलता-जुलता है. निर्वाचन आयोग के मुताबिक उसने कविता को अपनी पार्टी के तीन वैकल्पिक नाम बताने के लिए उन्हें 15 दिनों का समय दिया था.

सुनवाई के दौरान कविता की ओर से पेश वकील ने कहा कि कविता की पार्टी का टीआरएस के रुप में नाम आवंटित किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि ये उचित नहीं है कि कविता का पक्ष जाने बिना ही उसके खिलाफ फैसला कर दिया जाए. उसके बाद हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वो कविता की पार्टी के नाम पर अंतिम फैसला करने से पहले उनका पक्ष जरुर सुनें

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Last Updated : July 7, 2026 at 7:50 PM IST