पुलिस की गलती के कारण निर्दोष होते हुए भी बुजुर्ग किसान ने 12 साल तक लगाए कोर्ट के चक्कर, अब अदालत ने किया बरी
आगरा पुलिस ने तुहीराम पुत्र मोनाराम की जगह तुहीराम पुत्र मोहन सिंह को आरोपी बना दिया था. 12 साल बाद अदालत ने उनको बरी किया.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 2, 2026 at 10:30 PM IST
आगरा: आगरा में विशेष न्यायाधीश आर्थिक अपराध ज्ञानेंद्र राव ने 12 साल बाद बिजली चोरी के मामले में शुक्रवार को आरोपी बुजुर्ग किसान निर्दोष मानकर बरी कर दिया. विशेष न्यायाधीश आर्थिक अपराध ज्ञानेंद्र राव ने अपने आदेश लिखा कि विद्युत विभाग अब आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है. कोर्ट से बरी किए गए निर्दोष बुजुर्ग किसान ने कहा कि समान नाम होने के साथ ही पुलिस और बिजली विभाग की लापरवाही की वजह से निर्दोष होने पर भी अदालत के चक्कर काटे हैं.
अवर अभियंता ने 2012 में दर्ज कराया था मुकदमा: मामला अछनेना थाना के गांव साही का है. गांव साही निवासी तुहीराम पुत्र मोहन को विशेष न्यायाधीश आर्थिक अपराध ज्ञानेंद्र राव ने बरी किया है. बिजली विभाग के तत्कालीन अवर अभियंता ने थाना अछनेरा में 29 नवंबर 2012 को मुकदमा दर्ज कराया था. इसमें लिखा था कि बिजली बिल का भुगतान नहीं करने पर गांव साही में 22 नवंबर 2012 को कुछ ग्रामीणों के बिजली कनेक्शन काट दिये गए थे. इसके बाद से ही कुछ लोग कटिया डालकर विद्युत (बिजली) चोरी कर रहे थे.
बिजली चोरी के आरोप में दर्ज हुआ था केस: इस पर 29 नवंबर 2012 को जब बिजली विभाग की टीम ने गांव चेंकिग की. बिजली चोरी करते लोग पकड़े गए. जिस पर अछनेरा थाना में 138(बी) विद्युत अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ था. इस मामले की विवेचना पुलिस ने की. पुलिस ने जिसमें पांच आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया. जबकि, बिजली विभाग की टीम ने चोरी करने के आरोप में तुहीराम पुत्र मोना राम को पकड़ा था.
पुलिस की लापरवाही की पोल नोटिस से खुली: अछनेरा थाना पुलिस की विवेचना कोर्ट में दाखिल करने के बाद गांव साही निवासी तुहीराम पुत्र मोहन सिंह के नाम 2014 में कोर्ट से नोटिस पहुंचा. यह देखकर बुजुर्ग तुहीराम और उनके परिजन के होश उड़ गए. बुजुर्ग तुहीराम ने कोर्ट से आए नोटिस के आधार पर विद्युत विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों में चक्कर लगाए.
बिजली चोरी का कलंक हटाने के लिए 12 साल संघर्ष: तुहीराम ने कहा कि वह निर्दोष हैं. उन्होंने कोई बिजली चोरी नहीं की. उनके नाम पर तो बिजली का कनेक्शन ही नहीं था. मगर, कहीं पर सुनवाई नहीं हुई तो निर्दोष तुहीराम पुत्र मोहन सिंह बिजली चोरी का कलंक माथे से मिटाने के लिए 12 साल अदालत के चक्कर काट रहे थे.
बुढ़ापे में हुई किसान की बदनामी: अदालत से निर्दोष साबित किए जाने पर 73 साल बुजुर्ग किसान तुहीराम ने बताया कि समान नाम, पुलिस और बिजली विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से बुढ़ापे में बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज होने से बदनामी हुई. कोर्ट में तारीख और अधिकारियों के यहां पर चक्कर लगाने से रुपये की भी बदनामी हुई है.
किसान को 12 साल बाद मिला न्याय: तुहीराम पुत्र मोहन सिंह ने बताया कि सन 2007 में ही उन्होंने अपने नाम का कनेक्शन कटवाकर बेटा कृष्णा के नाम से दूसरा कनेक्शन कराया था. उनके नाम पर कोई बिजली बिल भी बकाया नहीं था. जब सन 2012 में मुकदमा दर्ज हुआ था कि तब तक उनको इसकी कोई जानकारी नहीं थी. जब कोर्ट से नोटिस आया, तो गांव में मुकदमे की वजह से बदनामी हुई. 12 साल तक अदालत के चक्कर काटे हैं. इसमें खूब रुपये खर्च हुए हैं. अब आज न्याय मिला है.
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