बिहार में मजदूर के बेटे का कमाल, इटली में देश का परचम लहराएंगे एहतेशाम रिजवी
मोहम्मद एहतेशाम रिजवी का चयन गौरवशाली अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी विज्ञान ओलंपियाड के लिए बनी भारतीय टीम में हुआ है. देशभर से सिर्फ 4 छात्र हुए चयनित

Published : June 15, 2026 at 8:10 PM IST
मुजफ्फरपुर: "है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके वीर नर के मग में? खम ठोंक ठेलता है जब नर, पर्वत के जाते पाँव उखड़.".. राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की 'रश्मिरथी' की यह बेहद लोकप्रिय पंक्तियां बताती हैं कि जब एक इंसान मन में कुछ बड़ा करने की ठान लेता है, तो दुनिया की बड़ी से बड़ी गरीबी और भयानक मुसीबतें मिलकर भी उसका रास्ता कभी नहीं रोक पातीं.
जीती-जागती मिसाल: इसकी जीती-जागती मिसाल बनकर सामने आए हैं मुजफ्फरपुर के होनहार मोहम्मद एहतेशाम रिजवी. उन्होंने अपनी बेजोड़ मेहनत और अटूट लगन के दम पर आज एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है, जिस पर आज पूरे जिले, पूरे बिहार और देश को गर्व है.

किस्मत को चुनौती: कहते हैं कि सच्ची और दमदार प्रतिभा कभी भी किसी अमीरी या गरीबी की मोहताज नहीं होती. अगर इंसान के हौसले बुलंद हों और पीछे खड़े परिवार का अटूट भरोसा साथ हो, तो भयंकर अभावों के बीच भी बड़ी सफलता की एक नई और ऐतिहासिक इबारत आसानी से लिखी जा सकती है.
मजदूर का लाल: एक गरीब मजदूर के बेटे ने भी कुछ ऐसा ही किया है. अपनी बंद किस्मत का ताला खोलकर ऐसा अनोखा कमाल कर दिखाया है कि अब वह सीधे सात समंदर पार इटली की धरती पर देश का तिरंगा परचम शान से लहराएंगे.
अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में चयन: दरअसल बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले जवाहर नवोदय विद्यालय के होनहार छात्र मोहम्मद एहतेशाम रिजवी का चयन गौरवशाली अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी विज्ञान ओलंपियाड (IESO) के लिए बनी भारतीय टीम में हुआ है. इस महामुकाबले के लिए पूरे देश से सिर्फ चार छात्रों को मौका मिला है.
तंगहाली का साया: एहतेशाम के पिता मोहम्मद सेराज अंसारी एक साधारण निजी कंपनी में मजदूरी का काम करके किसी तरह अपने पूरे परिवार का पेट पालते हैं. उनकी मां एक साधारण गृहिणी हैं जो घर संभालती हैं. तीन भाई-बहनों वाले इस साधारण से परिवार की आर्थिक स्थिति हमेशा तंगहाली के साए में घिरी रहती है.

खड़ौना का सितारा: जवाहर नवोदय विद्यालय, खड़ौना के विज्ञान संकाय के होनहार 12वीं के छात्र मोहम्मद एहतेशाम रिजवी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की बड़ी प्रतियोगिता में पूरे भारत का मुख्य चेहरा बनने जा रहे हैं. यह बेहद वैश्विक प्रतियोगिता आगामी 20 से 27 अगस्त तक इटली में आयोजित होगी जहां एहतेशाम पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे.
बिहार का दबदबा: इस साल इटली में होने जा रहे इस बड़े वर्ल्ड ओलंपियाड के लिए पूरे भारत से बहुत कड़े कॉम्पिटिशन के बाद केवल चार मेधावी छात्रों का ही फाइनल चयन हुआ है. सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात यह है कि देश के इन चार चुनिंदा छात्रों में से दो अकेले बिहार के रहने वाले हैं. इन दो शानदार नामों में से ही एक नाम है मुजफ्फरपुर के मोहम्मद एहतेशाम का.
"क्लास 11 के बाद से ही इस इग्जाम के लिए तैयारी की थी. फिर बाद में स्कूल मे इसमें सेलेक्शन के लिए भी परीक्षा दी थी, उसका रिजल्ट आया तब कैंप करने गए थे. फिर वहां भी टेस्ट दिए, पास हुए रिजल्ट आया तो अब इटली जाने के लिए सेलेक्शन हुआ है." - मोहम्मद एहतेशाम रिजवी

दर्दनाक अतीत: एहतेशाम की इस आसमान छूती बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे उनके पूरे परिवार के गहरे संघर्ष की एक लंबी, दर्दनाक और बेहद भावुक कर देने वाली कहानी छिपी हुई है. एहतेशाम के दादाजी स्वर्गीय नूरहसन अंसारी अपने समय में मुजफ्फरपुर क्लब, कंपनीबाग में बड़ा बाबू के पद पर कार्यरत थे. उनके निधन के बाद इस पूरे परिवार के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था.
गरीबी में जिंदगी: दादाजी के जाने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पूरा परिवार आज भी मुजफ्फरपुर क्लब परिसर में ही स्थित एक छोटे से साधारण घर में रहने को मजबूर है. इसी घर के अंदर रहकर दिन-रात कड़ा संघर्ष झेलकर यह परिवार अपने बच्चों की कीमती पढ़ाई को किसी तरह जारी रखे हुए है. इसी तंग कमरे से निकलकर अब एहतेशाम सीधे इटली के आलीशान अंतरराष्ट्रीय मंच पर कदम रखने जा रहे हैं.

सरकारी शिक्षा: एहतेशाम की पढ़ाई की शुरुआती और प्रारंभिक शिक्षा सकरा इलाके के ही एक बहुत ही साधारण से सरकारी विद्यालय की टूटी-फूटी दीवारों के बीच शुरू हुई थी. इसके साथ ही उन्होंने अपनी पढ़ाई को और मजबूत धार देने के लिए सकरा में ही स्थित होली गार्डेन प्रेप पब्लिक स्कूल से अतिरिक्त शैक्षणिक मार्गदर्शन और जरूरी मदद भी प्राप्त की थी. वह बचपन के दिनों से ही किताबों और पढ़ाई-लिखाई के मामले में अत्यधिक मेधावी रहे हैं.
नवोदय में एंट्री: बचपन से ही हर क्लास में अव्वल आने वाले मेधावी छात्र एहतेशाम ने इसके बाद सीधे कक्षा 6 में जवाहर नवोदय विद्यालय की कठिन प्रवेश परीक्षा पास की और वहां दाखिला लिया. नवोदय विद्यालय में कदम रखने के बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपनी प्रतिभा का लोहा लगातार हर स्तर पर साबित करते रहे. उन्होंने साबित किया कि अगर लगन सच्ची हो तो संसाधनों की कमी कभी आड़े नहीं आती.
देश की वर्दी: स्कूल में केवल पढ़ाई के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि उन्होंने एनसीसी (NCC) कैडेट के रूप में भी हमेशा अत्यंत उत्कृष्ट प्रदर्शन करके अपने पूरे विद्यालय का नाम रोशन किया है. एनसीसी के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर बड़े सम्मान से नवाजे जा चुके एहतेशाम भविष्य में भारतीय सेना के एनडीए (NDA) में शामिल होकर देश की रक्षा करना चाहते हैं.

तिरंगे का नाम रोशन: मुजफ्फरपुर के इस होनहार और वीर नौजवान के बड़े सपनों में सिर्फ अपनी व्यक्तिगत सफलता शामिल नहीं है. उनके दिल में पूरे देश का मान-सम्मान बसा हुआ है, और वह हर हाल में देश सेवा को सर्वोपरि मानते हैं. यही वजह है कि आज अपनी इस सफलता के बाद भी वह जमीन से जुड़े हुए हैं और देश का नाम रोशन करना चाहते हैं.
खुशी और आंसू: आज जहां एक तरफ पूरा जिला और वहां के लोग उनकी इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व सफलता की खबर सुनकर बेहद खुशी और गर्व महसूस कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनका परिवार भविष्य की बड़ी आर्थिक चुनौतियों को लेकर बेहद डरा हुआ और चिंतित है. बढ़ती हुई भयंकर महंगाई और पिता की बेहद सीमित आय के बीच इस अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना बहुत मुश्किल काम है.
पैसों की दीवार: इटली के इस वैश्विक मंच तक पहुंचने और भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले इस सबसे प्रतिभाशाली छात्र के सामने अब बहुत बड़ी और मजबूत आर्थिक बाधाएं आकर खड़ी हो गई हैं. इस मुश्किल घड़ी में एहतेशाम के माता-पिता कहना है वे खुद कठिनाइयां झेलकर भी बच्चों की पढ़ाई जारी रखेंगे, लेकिन इतने बड़े मंच तक पहुंचने के लिए समाज और व्यवस्था के सहयोग की जरूरत है.
मां की खुशी: मां चांद तब्बसुम ने कहा मुझे बहुत खुशी हो रही है कि मेरा बेटा भारत का प्रतिनिधित्व करेगा. वह शुरू से ही पढ़ाई में काफी मेहनती रहा है. पति शहर में रहकर प्राइवेट नौकरी करते हैं. हम लोगों ने आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद उसकी पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी. उसकी मेहनत और लगन का ही परिणाम था कि उसका चयन जवाहर नवोदय विद्यालय में हुआ.

"आज बहुत गर्व महसूस हो रहा है कि हमारा बेटा देश के लिए कुछ अच्छा कर रहा है. उसे इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए हमने काफी संघर्ष किया है, लेकिन उस संघर्ष को शब्दों में बयां करना आसान नहीं है"- चांद तब्बसुम, एहतेशाम की मां
भावुक हुईं दादी: वहीं दादी सादिया खातून ने भावुक होकर कहा पोते की इस सफलता से मैं बहुत खुश हूं. मेरे बेटे बहू ने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए काफी संघर्ष किया है. मेरा पोता शुरू से ही पढ़ाई में बहुत अच्छा रहा है. उसकी मेहनत और लगन का ही यह परिणाम है कि आज उसने यह मुकाम हासिल किया है.
"बहुत खुशी की बात है ये. बहुत खुशी महसूस हो रही है. हम लोग बहुत संघर्ष किए है पोता को यहां तक लाने में. आज यहां ये मुकाम हासिल किया है उसका खुद का मेहनत का नतीजा है" - सादिया खातून, एहतेशाम की दादी

मदद की पुकार: परिवार के मुताबिक इतने बड़े वैश्विक मंच और इटली तक हमारे बेटे को सुरक्षित पहुंचाने के लिए अब हमें समाज और देश की सरकारी व्यवस्था के बड़े सहयोग की सख्त जरूरत है. ऐसे कठिन समय में जिले के प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, बड़े सामाजिक संगठनों और देश के सक्षम नागरिकों को तुरंत आगे आने की जरूरत है.
सम्मान का सवाल: वाकई इस परिवार की मदद केवल एक गरीब और बेबस छात्र की छोटी सी आर्थिक मदद करना भर नहीं होगा, बल्कि यह हमारी उस अनमोल भारतीय प्रतिभा का बड़ा सम्मान होगा. जरुरत है आज समाज को आगे आने की ताकि एक बड़ा हुनर पैसों की कमी के कारण पीछे न छूट जाए.
बशीर बद्र का शेर: बशीर बद्र साहब का वो शेर जिसमें वो कहते हैं कि हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है...जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा शायद एहतेशाम जैसे हुनरमंद शख्स पर बिल्कुल सटीक बैठता है. बेशक एहतेशाम जिधर चल पड़ेंगे उन्हें रास्ता मिल ही जाएगा.
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