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Ground Report : मिड डे मील में अंडा' बना बिहार के सरकारी स्कूल के शिक्षकों के लिए मुसीबत, जानिए क्यों?

अंडा महंगा हुआ तो बिहार के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की परेशानी बढ़ गई हैं. जानिए क्या है अंडे का फंडा?, पढ़ें रिपोर्ट

MID DAY MEAL IN BIHAR SCHOOL
बिहार में मिड डे मील (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : December 19, 2025 at 9:07 PM IST

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रिपोर्ट: आदित्य कुमार झा

पटना : बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों के लिए मिड डे मील सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि पोषण और स्कूल से जुड़ाव का सबसे अहम जरिया है. हालांकि इन दिनों यही मिड डे मील योजना अपने कठिन दौर से गुजर रही है. वजह है अंडे की कीमत में तेज उछाल.

अंडा की बढ़ी कीमत : अंडे की कीमत बढ़ गई है लेकिन सरकार की तरफ से इसके बजट में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. इसका सीधा असर स्कूलों में मिड डे मील संचालकों पर पड़ रहा है, जो तय मानकों के भीतर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन देने के लिए जूझ रहे हैं.

मिड डे मील में अंडा बना शिक्षकों के लिए मुसीबत (ETV Bharat)

शुक्रवार को दिया जाता है अंडा : बिहार सरकार की मिड डे मील गाइडलाइन के अनुसार हर शुक्रवार सरकारी स्कूलों में बच्चों को अंडा दिया जाता है. जो बच्चे अंडा नहीं खाते, उन्हें विकल्प के तौर पर संतरा या केला दिया जाता है. जो बच्चा मांसाहारी है उनको अंडा देने का नियम है और जो मांसाहारी नहीं है उनके लिए अंडा के बदले सीजनल फल दिया जाता है.

स्कूल प्रभारी की बढ़ी परेशानी : इस वक्त बाजार में एक अंडे की कीमत 9 से 10 रुपये तक पहुंच चुकी है. ठंड के मौसम में अंडे की डिमांड बढ़ने से कीमतों में यह उछाल आया है. जबकि मिड डे मील के लिए प्रति बच्चे तय राशि पहले जैसी ही 5 रु है. नतीजा यह कि अंडा खरीदने के लिए स्कूल के प्रभारी को किसी तरह सामंजस्य से बैठना पड़ता है.

ग्राउंड रिपोर्ट : ईटीवी भारत की टीम मिड डे मील में दिए जाने वाले अंडे को लेकर पटना के अदालत गंज स्थित बालक मध्य विद्यालय पहुंची. इस विद्यालय में जब ईटीवी भारत की टीम पहुंची तो मिड डे मील के दिनों के रोस्टर के हिसाब से खाना बच्चों को क्या-क्या दिया जाता है वह लिखा हुआ मिला. मिड डे मील के नियम के अनुसार बच्चों को पोषाहार दिया जाता है.

MID DAY MEAL IN BIHAR SCHOOL
अंडा महंगा हुआ, संचालिका परेशान (ETV Bharat)

बच्चों को शुक्रवार के दिन अंडा मिड डे मील में दिया जाता है. पटना के सबसे वीआईपी इलाके में यह स्कूल दो शिफ्टों में संचालित होता है. सुबह के शिफ्ट में राजकीय कन्या मध्य विद्यालय में स्कूल का संचालन होता है और डी में बालक मध्य विद्यालय में स्कूल का संचालन होता है.

किस दिन क्या मिलता है?

  • सोमवार- चावल + मिश्रित दाल तड़का
  • मंगलवार- चावल + सोयाबीन आलू की सब्जी
  • बुधवार- चावल + लाल चना का छोला और आलू
  • गुरुवार - चावल + तड़का हरी सब्जी युक्त
  • शुक्रवार - चावल+ लाल चना का छोला और उबला हुआ अंडा (जो बच्चा मांसाहारी नहीं है वह उसके लिए मौसमी फल की व्यवस्था)
  • शनिवार - खिचड़ी + हरी सब्जियां + चोखा

बच्चों को मिल रहा खाना : अदालतगंज मध्य विद्यालय में पढ़ने वाली कक्षा चार की छात्रा दीपमाला का कहना है कि वह लोग प्रतिदिन स्कूल आती है. हर दिन स्कूल में मिड डे मील के तहत उन लोगों को खाना खिलाया जाता है. हर दिन अलग अलग तरह का खाना उन लोगों को दिया जाता है. प्रत्येक शुक्रवार को अंडा भी स्कूल के तरफ से उन लोगों को खिलाया जाता है.

''हम लोग प्रतिदिन स्कूल आते हैं. आज ठंड ज्यादा है इसीलिए कुछ बच्चे कम आए हैं. विद्यालय की तरफ से प्रतिदिन दोपहर में हम लोगों को खाना खिलाया जाता है."- शहजादी प्रवीण, छात्रा

सरकार के आदेश का पालन : सरकारी विद्यालयों में अंडे की सरकारी की मत ₹5 प्रति दर तय की गई है. लेकिन ठंड के महीने में आमतौर पर अंडे की कीमत बढ़ जाती है आजकल अंडे की कीमत 9 से ₹10 पीस बिक रहा है. विद्यालय की शिक्षिका मुन्नी देवी का कहना है कि उनके विद्यालय में हर शुक्रवार को बच्चों को अंडा खिलाया जाता है. सरकार का रेट ₹5 है लेकिन अंडे की बढ़ी हुई कीमत के बावजूद यहां पर बच्चों को अंडा खिलाया जाता है प्रधानाध्यापक पूरा मामला को देखते हैं.

MID DAY MEAL IN BIHAR SCHOOL
बच्चो के मिड दे मील में अंडा (ETV Bharat)

"बाजार में अभी अंडे की कीमत बढ़ गई है लेकिन फिर भी उनके विद्यालय के प्रधानाध्यापक हर शुक्रवार को बच्चों के लिए अंडा मंगवाते हैं. सरकार की तरफ से बच्चों को अंडा देने का आदेश जारी हो गया है तो विद्यालय की तरफ से अंडा दिया जा रहा है. सरकार का आदेश है और विद्यालय के अध्यापकों की जिम्मेदारी है. इसी को देखते हुए जिस दिन जो चीज तय किया गया है वही बच्चों के बीच परोसा जा रहा है."- गुड़िया देवी, विद्यालय की रसोईया

शाकाहारी बच्चों के लिए : अंडा नहीं खाने वाले बच्चों के लिए मिड डे मील में मौसमी फल का विकल्प दिया गया है. संतरा और केला इसका विकल्प है. कुछ स्कूलों में तो हालात ऐसे हैं कि वहां के प्रभारी शुक्रवार के दिन को लेकर पहले से तनाव में रहते हैं. कई जगहों पर बच्चों की संख्या ज़्यादा और बजट सीमित होने के कारण गुणवत्ता और मात्रा दोनों पर असर पड़ रहा है. विकल्प के तौर पर मौसमी फल जैसे केला और संतरा का उपयोग कैसे विद्यालयों में चलाया जा रहा है.

बच्चों के पोषण को लेकर योजना : मिड डे मील का मुख्य उद्देश्य बच्चों को पोषणयुक्त आहार देना है ताकि कुपोषण से लड़ाई लड़ी जा सके. अंडा प्रोटीन का बड़ा स्रोत है, यही कारण है कि सरकार ने मिड डे मील के तहत कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों के लिए हर दिन अलग-अलग तरह के खाने का शेड्यूल बनाया है.

सभी प्राथमिक एवं मध्य विद्यालय में जहां के बच्चे मांसाहारी हैं उनके लिए अंडे की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है. अगर किसी कारण से अंडा नियमित रूप से नहीं मिल पाता है तो इसके लिए फल के देने का प्रावधान किया गया है.

कक्षा 1 से 8 तक में व्यवस्था : बिहार सरकार के तरफ से मिड डे मील के लिए जो नियम बनाया गया है. उसमें कक्षा एक से लेकर कक्षा 8 तक के बच्चों को मिड डे मील के तहत स्कूल में खाना उपलब्ध करवाया जाता है. बिहार में कक्षा 1 से लेकर 5 तक के प्राथमिक विद्यालयों की संख्या लगभग 43000 है. जबकि कक्षा 1 से लेकर 8 तक के मध्य विद्यालयों की संख्या 29000 है.

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बिहार का सरकारी स्कूल (ETV Bharat)

समय पर नहीं मिलती है राशि : स्नातक ग्रेड शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष पिंटू कुमार सिंह ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि पोषाहार योजना शिक्षकों के लिए परेशानी का सबक बनता जा रहा है. विद्यालय के प्रधानाध्यापकों के लिए यह एक मुसीबत बन गया है क्योंकि पोषाहार योजना की राशि प्रत्येक महीने समय पर नहीं आती है.

कभी-कभी दो महीना और 3 महीना के बाद यह राशि प्रधानाध्यापक को प्राप्त होती है. लेकिन उनकी मजबूरी है कि उन्हें पोषाहार योजना स्कूल में चलना है. वैसी स्थिति में अपने जेब से पैसा लगाना पड़ता है. जब विभाग की तरफ से पैसा आता है, तब उन्हें पैसा मिल पाता है.

समस्या का हो समाधान : अंडे की बढ़ी कीमत के अनुसार बजट में तत्काल संशोधन किया जाए. शिक्षा विभाग के अधिकारियों को यह मालूम है कि बाजार में अभी अंडे की क्या कीमत है. इसके बावजूद 5 साल पहले जो सरकार के द्वारा अंडे की सरकारी कीमत तय की गई थी उसकी कीमत पर खरीदने को कहा जा रहा है.

MID DAY MEAL IN BIHAR SCHOOL
मिड डे मील में किस दिन क्या परोसा जाएगा (ETV Bharat)

"ऐसे में सबसे बड़ी परेशानी यह है कि स्कूल के प्रधानाध्यापक को अपनी नौकरी बचाने के लिए अपने पॉकेट से पैसा देना पड़ रहा है. सरकार खुद ऐसी पॉलिसी बनाई हुई है, जिसमें वह शिक्षकों को मजबूर कर रही है कि वह गलत काम करके किसी तरीके से सरकारी योजना का अनुपालन कर सके. तत्काल सरकार को बाजार रेट के अनुसार पोषाहार योजना के तहत जो अंडे देने की योजना है उसका दर निर्धारित किया जाए. ताकि शिक्षकों के ऊपर अतिरिक्त वित्तीय बोझ ना बढ़े."- पिंटू कुमार सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, स्नातक ग्रेड शिक्षक संघ

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