ETV Bharat / bharat

पढ़े-लिखे और अमीर लोग सबसे ज्यादा हो रहे डिजिटल अरेस्ट के शिकार, अमिताभ बच्चन से लेकर ED तक ने लोगों को किया आगाह

झारखंड में लगातार डिजिटल अरेस्ट के मामले सामने आ रहे हैं. पढ़े लिखे लोग और पैसे से संपन्न लोग इसके ज्यादा शिकार हो रहे हैं.

DIGITAL ARREST
ग्राफिक्स इमेज (ईटीवी भारत)
author img

By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : December 20, 2025 at 7:37 PM IST

|

Updated : January 1, 2026 at 5:08 PM IST

13 Min Read
Choose ETV Bharat

प्रशांत कुमार की रिपोर्ट

रांची: डिजिटल अरेस्ट से बचाव को लेकर जितने बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चला शायद ही किसी अन्य क्राइम को लेकर इतना अभियान चलाया गया हो. सुपरस्टार अमिताभ बच्चन से लेकर ईडी तक सभी ने डिजिटल अरेस्ट को लेकर लोगों को समझाया. ताकि वे साइबर अपराधियों के चंगुल में ना फंसे, लेकिन इसके बावजूद लोग डिजिटल अरेस्ट हो रहे हैं और अपनी गाढ़ी कमाई साइबर अपराधियों के हवाले कर रहे हैं. हैरानी की बात यह है कि इसके सबसे ज्यादा शिकार पढ़े-लिखे और धनवान लोग हो रहे हैं.

घटने के बजाय बढ़ रहे हैं मामले

डिजिटल अरेस्ट के मामले हमेशा चर्चा में रहते हैं, खासकर झारखंड में. इसके पीछे वजह है कि झारखंड आज भी साइबर अपराधियों का हब बना हुआ है. साल 2025 के अंत तक भी डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से ठगी जारी है. मामला चर्चा में इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि दिसंबर 2025 महीने में ही राजधानी रांची से एक बड़ी ठगी को डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से अंजाम दिया गया.

जानकारी देते डिजिटल अरेस्ट के पीड़ित और रांची आईजी (ईटीवी भारत)

रांची के रहने वाले एक रिटायर बैंक अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट कर साइबर अपराधियों ने उनसे 50 लाख रुपए की ठगी कर डाली. 9 दिसंबर 2025 को पीड़ित बैंक अधिकारी के द्वारा साइबर थाने में मामला दर्ज कराया गया, तब जाकर यह वारदात सामने आयी. सीआईडी से मिले आंकड़ों की अगर बात करें तो साल 2025 में झारखंड के विभिन्न जिलों से लभगभ दो दर्जन पढ़े-लिखे और धनवान लोगों को साइबर अपराधियों ने टारगेट किया है. जिसके बाद किसी से 2 करोड़, किसी से एक करोड़ तो किसी से 50 लाख रुपए की ठगी की गई.

DIGITAL ARREST
ग्राफिक्स इमेज (ईटीवी भारत)

सुनिए डिजिटल अरेस्ट होने वाले की जुबानी, कैसे किया गया डिजिटल अरेस्ट

झारखंड के रामगढ़ के रहने वाले 81 वर्षीय बुजुर्ग ब्रजकिशोर प्रसाद को साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट का शिकार बनाया. बुजुर्ग से आठ लाख पचास हजार रुपये ठगे गए. बुजुर्ग ब्रजकिशोर प्रसाद बताते हैं कि एक व्यक्ति ने मुझे मोबाइल नंबर 8974602026 से वीडियो कॉल किया. उसने अपना नाम आईपीएस सुनील कुमार गौतम बताया और कहा कि वह दिल्ली एयरपोर्ट से बोल रहा है. एयरपोर्ट पर संदीप नाम का एक व्यक्ति मनी लांड्रिंग के केस में 65 लाख रुपए नकद के साथ गिरफ्तार हुआ है. सुप्रीम कोर्ट में उसने बयान दिया है कि 65 लाख रुपए में से 10% का हिस्सा ब्रजकिशोर प्रसाद का है.

फोन करने वाले ने बताया कि यह पूरा मामला मनी लांड्रिंग का है. इसके बारे आप किसी से भी चर्चा नहीं करना, नहीं तो आपके बाल बच्चे खतरे में पढ़ जाएंगे. इसके बाद फोन करने वाले ने एक दूसरे व्यक्ति से बात कराई जिसने अपने आप को सीबीआई का अफसर बताया. सीबीआई अफसर बने ठग ने उन्हें यह बताया कि आपको दिल्ली स्थित सीबीआई ऑफिस में 90 दिनों तक रहना होगा. लेकिन चूंकि आप बुजुर्ग हैं, इसलिए आप अपने बैंक के तमाम खातों में जमा रकम आरबीआई के खाते में जमा करवा दें. जब जांच पूरी हो जाएगी, तब आरबीआई के द्वारा आपके सारे पैसे लौटा दिए जाएंगे.

बुजुर्ग के अनुसार, उनकी बातों से कभी ऐसा लगा ही नहीं कि वह सरकारी अधिकारी नहीं है. उन्होंने एक तरह से उन्हें सम्मोहित कर लिया था. हद तो तब हो गई जब जमानत देने के नाम पर भी साइबर अपराधियों ने बुजुर्ग से 80 हजार रुपए और ठग लिए और उन्हें सुप्रीम कोर्ट का एक फर्जी जमानत पेपर भी भेज दिया. बुजुर्ग को लगा कि अब जमानत मिल गया है तो उन्हें पैसे भी वापस मिल जाएंगे. इसके लिए वह अपने बैंक गए, तब उन्हें जानकारी मिली कि ऐसा तो कुछ उनके साथ हुआ ही नहीं है. बल्कि उनके साथ ठगी की गई है, जिसके बाद उन्होंने थाने में मामला दर्ज कराया.

ईडी की पहल

डिजिटल अरेस्ट के अधिकांश मामलों में ईडी के नाम को हथियार बनाया जाता है. ऐसे मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ईडी ने आम लोगों को सतर्क करने के लिए कई अहम जानकारियां अपने वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी किया है. ईडी के एक्स हैंडल पर तो डिजिटल अरेस्ट से बचाव के लिए बकायदा डिटेल पिन किया हुआ है. यानी आप जब ईडी के एक्स हैंडल पर जाएंगे, सबसे पहला पोस्ट आपको डिजिटल अरेस्ट वाला ही दिखेगा.

ईडी के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, साइबर अपराधी नकली समन भेजते हैं. फर्जी समन असली की तरह ही दिखते हैं. ऐसे में आम लोग असली-नकली का फर्क समझ नहीं पाते हैं.असली-नकली की पहचान के लिए बकायदा ईडी ने एक क्यूआर कोड भी जारी किया है. आप उसमें फर्जी समन की पहचान कर सकते हैं.

DIGITAL ARREST
ईडी के द्वारा किया लोगों को किया जा रहा जागरूक (ईटीवी भारत)

डिजिटल अरेस्ट नाम का नहीं है देश में कोई कानून

साइबर अपराधियों के लिए बदनाम झारखंड में डिजिटल अरेस्ट एक बड़ी परेशानी का सबब बन गया है. साल 2025 में सीआईडी के साइबर क्राइम ब्रांच में डिजिटल अरेस्ट के दो दर्जन के करीब मामले सामने आ चुके हैं. जिसमें करोड़ों रुपए की ठगी को अंजाम दिया गया है. सबसे ज्यादा इसके शिकार धनवान और पढ़े-लिखे लोग हुए हैं. जिनमें डॉक्टर, इंजीनियर, रिटायर्ड अधिकारी तक शामिल हैं. यहां तक कि डिजिटल अरेस्ट के चक्कर में फंसकर कई बैंक अधिकारी भी अपने पैसे गवां चुके हैं.

सीबीआई, ईडी हो या फिर संचार कंपनियां, इनके द्वारा लोगों को साफ-साफ यह बताया जा चुका है कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानून देश में है ही नहीं. इसके लिए महीनों तक अमिताभ बच्चन का कॉलर ट्यून भी लोगों को सुनाया गया. लेकिन यह सभी जागरूकता लोगों के काम नहीं आ रहा है. समय-समय पर डिजिटल अरेस्ट के मामले सामने आ रहे हैं और लोग ठगे जा रहे हैं. डिजिटल अरेस्ट करने के लिए साइबर अपराधी विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की फेक आईडी का सहारा ले रहे हैं.

मीडिया में खबरें आने के बाद आ रहे मामले सामने

डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी खबरें जब मीडिया में आनी शुरू हुईं तब अचानक ऐसे मामलों की बाढ़ सी आ गई. रांची के संत जेवियर कॉलेज के प्रोफेसर से डिजिटल अरेस्ट कर 1.78 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी. जब प्रोफेसर ने मीडिया में ये खबरें देखी कि यह सब ठगी का एक तरीका है, तब वह सीआईडी के साइबर क्राइम ब्रांच पहुंचे और मामला दर्ज कराया. प्रोफेसर से ठगी के मामले में सीआईडी ने कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया था.

सीआईडी साइबर क्राइम ब्रांच से मिली जानकारी के अनुसार, अब तक बोकारो, देवघर, रांची, खूंटी जैसे शहरों से एक दर्जन के करीब डिजिटल अरेस्ट के मामले सामने आए हैं. सबसे ज्यादा मामले तब सामने आने शुरू हुए जब ठगी से संबंधित खबरें निकलकर बाहर आने लगी. उसके बाद लोगों को समझ में आया कि दरअसल एक ऐसा गिरोह काम कर रहा है जो डिजिटल अरेस्ट कर लोगों से ठगी कर रहा है.

DIGITAL ARREST
ग्राफिक्स इमेज (ईटीवी भारत)

रिटायर्ड और नौकरी पेशा वालों को किया जा रहा है टारगेट

सीआईडी साइबर क्राइम ब्रांच के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराधियों का एक नया हथियार है. देश भर में सक्रिय साइबर अपराधी सीबीआई, ईडी, एनआईए और पुलिस के नाम पर इतना दहशत भर देते हैं कि ठगी का शिकार होने वाला व्यक्ति किसी से मदद भी नहीं मांग पाता है. सीआईडी के साइबर क्राइम ब्रांच के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट के मामले सबसे ज्यादा रिटायर्ड अधिकारियों और नौकरी पेशा वाले लोगों के साथ सामने आ रहे हैं. झारखंड में एक पूर्व आईएएस, प्रोफेसर, डॉक्टर और बिजनेसमैन इसका शिकार बन चुके हैं.

कैसे करते हैं टारगेट

साइबर अपराधी डिजिटल अरेस्ट करने के लिए पूरी प्लानिंग के साथ काम करते हैं. जिस व्यक्ति से उन्हें ठगी करना है, वे उसका पूरा प्रोफाइल तैयार करते हैं. साइबर अपराधी यह जानते हैं कि किसी बड़े बिजनेसमैन, डॉक्टर और रिटायर्ड अधिकारियों को इलीगल ट्रांजेक्शन और मनी लांड्रिंग जैसे मामले में डराया जा सकता है. इसके लिए सबसे पहले साइबर अपराधी विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बड़े अधिकारियों की तस्वीर और एजेंसी के लोगों का जुगाड़ करता है. उसके बाद अपने शिकार को फोन करके यह बताता है कि उनके बैंक खाते और मोबाइल सिम का प्रयोग इलीगल ट्रांजैक्शन और मनी लांड्रिंग के लिए किया गया है.

साइबर अपराधी अपने शिकार को यह भी बताते हैं कि उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी हो चुका है. अपने शिकार के नाम का गिरफ्तारी वारंट भी वे उसके व्हाट्सएप पर या फिर ईमेल आईडी पर भेज देते हैं. साइबर अपराधियों की धमकी से डरा हुआ व्यक्ति जब इस मामले से अपने आप को निर्दोष बताते हुए मदद की भीख मांगता है, तब साइबर अपराधी उसे अलग-अलग अकाउंट नंबर देकर लाखों रुपए की डिमांड करते हैं. सुरक्षा एजेंसियों के नाम के वारंट को देखकर लोग पैसे ट्रांसफर कर देते हैं.

करोड़ों का घोटाला बोल मांगते हैं पैसा

साइबर क्राइम ब्रांच के अनुसार, साइबर अपराधी किसी बड़े घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाकर ऐसे व्यक्ति को फोन करते हैं, जो अधिकारी हो या अधिकारी रह चुका हो. सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी बनकर साइबर अपराधी फेक अरेस्ट वारंट भेजते हैं. उसको बाद वह अपने शिकार को यह विश्वास दिला देते हैं कि एजेंसी किसी भी वक्त उन्हें गिरफ्तार कर सकती है. एक तरह से साइबर अपराधी अपने शिकार को हिप्नोटाइज कर देते हैं. उसके बाद साइबर अपराधी अपने शिकार को यह बताते हैं कि जितने रुपए का घोटाला किया गया है उसका एक तिहाई अगर वह तुरंत अकाउंट में जमा कर देंगे तो इस घोटाले में उन्हें राहत दिलाई जा सकती है. सुरक्षा एजेंसी से बचने के लिए लोग लाखों रुपए साइबर अपराधियों के खातों में डाल देते हैं.

घंटों घर में ही बना लेते हैं बंधक

साइबर अपराधियों की इस नई तकनीक को सीआईडी के साइबर क्राइम ब्रांच के द्वारा डिजिटल अरेस्ट का नाम दिया गया है. सबसे खतरनाक बात तो यह है कि रांची के एक व्यक्ति को साइबर अपराधियों ने 12 दिनों तक उसके घर में ही डिजिटल अरेस्ट करके रखा हुआ था. जब उस व्यक्ति ने पुलिस अधिकारियों और वकील से बात करके मामले की जानकारी ली, तब उसे यह पता चला कि उनके साथ ठगी को अंजाम दिया गया है. रांची में दर्ज हुए कई मामलों में ठगी के शिकार हुए लोगों ने बताया है कि साइबर अपराधियों ने उन्हें घंटों तक फोन में ही उलझाए रखा. फोन काटने पर, वे पूरे परिवार को गिरफ्तार कर लेने की धमकी देने लगते हैं.

विदेशों तक फैला है जाल

डिजिटल अरेस्ट की साजिश को अंजाम देने के लिए एक बड़ा रैकेट काम कर रहा है. साइबर अपराधियों के इस गिरोह के तार विदेशों से भी जुड़े हुए हैं. ठगी के पैसे खातों में ट्रांसफर करने के लिए बाहर देश के बैंकों का प्रयोग किया जा रहा है ताकि मनी ट्रेल के सबूत को प्रभावित किया जा सके.

सावधानी ही एकमात्र है बचाव

सीआईडी के साइबर क्राइम ब्रांच के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट से बचने का एकमात्र तरीका है सावधानी. लोगों को यह जानना होगा कि कोई भी सुरक्षा एजेंसी किसी भी व्यक्ति को वीडियो कॉल के जरिए कभी भी पूछताछ नहीं करती है. पूर्व में अगर कोई मामला ना हो तो ऐसे में वारंट जारी ही नहीं हो सकता है. इन सब चीजों को आम लोगों को समझना जरूरी है.

"इस तरह के मामलों से लोगों में डर व्यापत हो जाता है, जिसके कारण वे आसानी से इसके जाल में फंस जाते हैं. हमलोग इसे लेकर बहुत सारे जागरूकता अभियान चलाते हैं. जिला लेवल से लेकर स्टेट लेवल तक अभियान चलाए जा रहे हैं. लोगों को ये समझने की जरूरत है कि कहीं भी ऐसी कोई कॉल या ईमेल आता है तो एक बार संबंधित एजेंसी से वेरिफाई जरूर कर लें. इसके बिना किसी भी तरह से डरने से इसके चंगुल में फंसने का चांस हाई हो जाता है. यदि आप किसी संपन्न परिवार से आते हैं तो इस तरह किसी एजेंसी से नोटिस आने पर आप और ज्यादा भयमीत हो जाते हैं. इसलिए एक बार एजेंसी से जरूर पुष्टि कर लें." - मनोज कौशिक, आईजी, रांची

कार्रवाई भी जारी

सीआईडी के साइबर क्राइम ब्रांच के द्वारा डिजिटल अरेस्ट में शामिल साइबर अपराधी के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है. एक दर्जन से ज्यादा मामलों में शामिल कई साइबर अपराधियों को सीआईडी के साइबर क्राइम ब्रांच के द्वारा गिरफ्तार भी किया गया है.

DIGITAL ARREST
ग्राफिक्स इमेज (ईटीवी भारत)

हवाई सेवा मिलने की वजह से बढ़ी अपराधियों की गिरफ्तारी

साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी दूसरे राज्यों से बड़े आसानी से हो रही है. इसके पीछे सारी मेहनत तत्कालीन डीजीपी अनुराग गुप्ता की रही है. दरअसल, सीआईडी के डीजी रहते हुए अनुराग गुप्ता ने सरकार के पास एक प्रस्ताव भेजा था. प्रस्ताव में दूसरे राज्यों से साइबर अपराधी को गिरफ्तार करने के लिए टीम को भेजने के लिए हवाई मार्ग का प्रयोग करने की अनुमति मांगी गई थी. प्रस्ताव को सरकार ने स्वीकार किया. जिसके बाद साइबर अपराधियों को गिरफ्तार करने में बेहद सहूलियत हो रही है.

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सरकार के हवाई मार्ग से अपराधियों को गिरफ्तार करने की सुविधा देने का फायदा सबसे अधिक साइबर क्राइम ब्रांच को हुआ है. साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी में समय सीमा बहुत महत्वपूर्ण है. अगर पुलिस की टीम त्वरित साइबर अपराधियों के ठिकाने तक पहुंच गई तो उनकी गिरफ्तारी का प्रतिशत 99 रहता है. हवाई मार्ग से यात्रा कर असम, दिल्ली, कर्नाटक सहित कई राज्यों से साइबर अपराधी गिरफ्तार किए गए हैं.

Last Updated : January 1, 2026 at 5:08 PM IST