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ऑनलाइन सट्टेबाजी पर प्लेटफॉर्म पर एक्शन, राजस्थान सहित छह राज्यों में 17 ठिकानों पर ED की छापेमारी

ईडी ने तलाशी के दौरान लगभग 1.56 करोड़ रुपए की चल संपत्ति जब्त की गई, जिसमें लगभग 1.2 करोड़ रुपए नकद शामिल हैं.

ED Raid ONLINE GAMBLING
प्रवर्तन निदेशालय, जयपुर (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : June 1, 2026 at 9:21 PM IST

6 Min Read
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जयपुर: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई आंचलिक कार्यालय ने साइप्रस स्थित अवैध ऑनलाइन स‌ट्टेबाजी प्लेटफॉर्म 'परिमैच' के मामले में चल रही जांच के तहत 26 मई को महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, दमन और उत्तर प्रदेश के 17 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया. तलाशी के दौरान लगभग 1.56 करोड़ रुपए की चल संपत्ति जब्त की गई, जिसमें लगभग 1.2 करोड़ रुपए नकद शामिल हैं. इसके अलावा अलग-अलग बैंक खातों में जमा लगभग 3.8 करोड़ रुपए की रकम फ्रीज कर दी गई है. तलाशी के दौरान कई आपतिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद कर जब्त किए गए हैं. ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यह कार्रवाई की है.

एक साल में 3000 करोड़ रुपए अर्जित: ईडी की ओर से आज जारी बयान में बताया गया है कि मुंबई साइबर पुलिस स्टेशन द्वारा परिमैच डॉट कॉम के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने ऑनलाइन स‌ट्टेबाजी प्लेटफॉर्म पारिमैच के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को धोखा देने के आरोप में जांच शुरू की है. उन्होंने निवेशकों को उच्च रिटर्न का लालच देकर ठगी की और अब तक की जांच से पता चला है कि उन्होंने एक साल में 3000 करोड़ रुपए से अधिक की रकम अर्जित की है.

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फर्जी खातों के जटिल नेटवर्क का इस्तेमाल: अब तक की गई जांच से पता चला है कि परिमैच और उसके सहयोगियों ने उपयोगकर्ता के धन के संग्रह, हेरफेर और हस्तांतरण के लिए फर्जी खातों, भुगतान मध्यस्थों और वित्तीय समावेशन चैनलों के एक जटिल नेटवर्क को अपनाया. कुछ मामलों में, प्लेटफॉर्म द्वारा नियंत्रित खातों से सीधे भुगतान किए बिना ही उपयोगकर्ताओं की निकासी की प्रक्रिया पूरी हो गई. इसके बजाय, अन्य उपयोगकर्ताओं द्वारा जमा की गई धनराशि को कई किस्तों में सीधे निकासी करने वाले उपयोगकर्ता के बैंक खाते या यूपीआई आईडी में भेज दिया गया, जिससे धन का वास्तविक लेनदेन छिपा रहा और सीधे भुगतान का संबंध स्थापित नहीं हो सका.

चालू खातों से किया लेनदेन: जांच में यह भी पता चला है कि उपयोगकर्ताओं के जमा और निकासी को सॉफ्टवेयर, फिनटेक और प्रौ‌द्योगिकी से संबंधित संस्थाओं के नाम पर खोले गए कई चालू खातों के माध्यम से किया जाता था, जो वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों में भी संलग्न थी. आरोप है कि इन खातों का उपयोग विक्रेता भुगतान, व्यावसायिक लेनदेन और भुगतान गेटवे सेवाओं की आड़ में उपयोगकर्ता जमा राशि एकत्र करने और भुगतान करने के लिए किया जाता था.

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किराना और खुदरा दुकानों का भी दुरुपयोग: जांच में बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) नेटवर्क, मोबाइल मनी ट्रांसफर एजेंट, ग्राहक सेवा केंद्र, कैश मैनेजमेंट सर्विसेज (सीएमएस), स्थानीय किराना स्टोर और खुदरा दुकानों का दुरुपयोग होने की बात भी सामने आई है, जिनका इस्तेमाल प्लेटफॉर्म से जुडे भुगतान और धन के लेन-देन के लिए किया जाता था. जांच में यह भी पता चला है कि इसमें कई स्तरों वाली व्यवस्था थी, जिसके तहत उपयोगकर्ताओं के धन को बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) नेटवर्क के अंतर्गत संचालित खुदरा विक्रेताओं, ग्राहक सेवा केंद्रों के माध्यम से भेजा जाता था.

ऐसे किया गया बड़ी रकम का हेर-फेर: धन सबसे पहले खुदरा विक्रेताओं को हस्तांतरित किया गया, जिन्होंने इसे बीसी को सौंप दिया और बीसी ने बदले में उन खुदरा विक्रेताओं के वॉलेट को रिचार्ज कर दिया. एक बार वॉलेट में धन आ जाने के बाद खुदरा विक्रेताओं ने उनका उपयोग परिमैच प्लेटफॉर्म के उपयोगकर्ताओं को भुगतान करने के लिए किया और फिर इन वॉलेट का उपयोग परिमैच उपयोगकर्ताओं को भुगतान करने के लिए किया गया, जिससे धन के वास्तविक स्रोत और लेन-देन का पता छिपा रहा.

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हवाला के जरिए देश से बाहर गया पैसा: कुछ एजेंटों ने कथित तौर पर सीएमएस चैनलों के माध्यम से प्राप्त नकदी को डायवर्ट किया और उसे परिमैच उपयोगकर्ताओं द्वारा जमा की गई धनराशि से प्राप्त आरटीजीएस हस्तांतरण के साथ समायोजित कर दिया, जिससे धन के वास्तविक स्रोत और लेन-देन को छिपाया जा सके. बाद में इस नकदी को हवाला चैनलों के माध्यम से भारत से बाहर भेज दिया गया. आगे की जांच से पता चला है कि परिमैच ने 'परिमैच स्पोर्ट्स' और 'परिमैच न्यूज' के नाम से छद्‌म विज्ञापनों के माध्यम से अपने सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म का आक्रामक रूप से प्रचार किया. जांच में खुलासा हुआ है कि अन्य सट्टेबाजी वेबसाइटों के विपरीत परिमैच ने स्थानीय विपणन पर ध्यान केंद्रित किया, जिसके तहत इसने भारत के 15 से अधिक राज्यों में स्थानीय क्रिकेट लीगों में टीमों को प्रायोजित किया. इसके साथ ही हॉकी और फुटबॉल टूर्नामेंटों को भी प्रायोजित किया.

जांच में यह भी पता चला है कि प्लेटफॉर्म ने प्रमुख त्वरित व्यापार अनुप्रयोगों के माध्यम से सट्टेबाजी से संबंधित विज्ञापनों को बढ़ावा दिया और नए उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करने और उन्हें प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए किराने के सामान की डिलीवरी के साथ प्रचार सामग्री वितरित की. ऐसे विज्ञापन रणनीतिक रूप से एप के उपयोग और ऑर्डर देने के दौरान उपयोगकर्ताओं को दिखाए गए ताकि नए उपयोगकर्ताओं को आकर्षित किया जा सके और उन्हें प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा सके. इस मामले में ईडी ने अब तक 112 करोड़ रुपए की संपत्ति फ्रीज की है. आगे की जांच प्रक्रियाधीन है.

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