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क्या E-20 पेट्रोल से 4 लाख करोड़ के सेकेंड हैंड कार बाजार को झटका? पढ़िए, CNG-EV में किसकी डिमांड बढ़ी

Ethanol Blending Impact: देश में 60 लाख से अधिक सेकेंड हैंड गाड़ियां सालाना बिकती हैं. लेकिन, अब इसमें पेट्रोल गाड़ियों का शेयर घट रहा.

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क्या E-20 पेट्रोल से 4 लाख करोड़ के सेकेंड हैंड कार बाजार को झटका? (Photo Credit; Getty Images)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : September 1, 2026 at 5:04 PM IST

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हैदराबाद (समन्वय पाण्डेय): E20 Petrol Impact Used Car Market: E20 यानी इथेनॉल मिश्रित (Ethanol Blend) पेट्रोल को लेकर देशभर में चल रही बहस का असर अब सेकेंड हैंड कार मार्केट (पुरानी कारों का बाजार) पर दिखने लगा है. E-20 पेट्रोल की अनिवार्यता ने देश के 4 लाख करोड़ के सेकेंड हैंड कार के बाजार को प्रभावित किया है. हालांकि, असर गाड़ियों की सेल वॉल्यूम पर नहीं बल्कि टाइप पर पड़ा है.

अब व्यक्ति 2023 से पहले बनीं गाड़ियों को नहीं खरीदना चाहता क्योंकि ये गाड़ियां E-10 पेट्रोल कंपेटिबल थीं. इसके अलावा E-20 पेट्रोल से जुड़ी चिंताओं के कारण लोग अब CNG, EV और अच्छी कंडीशन वाली डीजल गाड़ियों की तरफ ज्यादा जा रहे हैं. आंकड़ों की बात करें तो 60 लाख से अधिक सेकेंड हैंड गाड़ियां सालाना बिकती हैं. वर्ष 2030-31 तक यह बढ़कर 1 करोड़ से अधिक यूनिट्स का हो जाएगा.

सेकेंड हैंड कारों का बाजार लगभग 13% से 18% की सालाना कंपाउंड रेट (CAGR) से तेजी से बढ़ रहा है. लेकिन, इसमें पेट्रोल गाड़ियों का शेयर घट रहा है. ETV Bharat की रिपोर्ट में पढ़िए, देश के यूजड कार मार्केट को E20 ने कितना डेंट पहुंचाया? किस राज्य में पुरानी कार के बाजार की क्या स्थिति? क्या E20 पेट्रोल पुरानी कार के इंजन को खराब कर देगा? क्या है इसकी सच्चाई?

कार को कैसे रखें सुरक्षित.
कार को कैसे रखें सुरक्षित. (Photo Credit; Getty Images)

देश में पुरानी कारों का बाजार कितना बड़ा: पर्सिस्टेंस मार्केट रिसर्च की एनालिसिस रिपोर्ट के अनुसार, में पुरानी (सेकंड हैंड) कारों का बाजार लगभग 4 लाख करोड़ रुपए (43 से 53 अरब अमेरिकी डॉलर) का है, जो नई कारों के बाजार से भी आगे निकल रहा है. 2026 में इसके 8.21 लाख करोड़ रुपए (US$ 86.4 बिलियन) होने का अनुमान है. 2026 से 2033 के बीच इसके 8.3% कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) की दर से बढ़कर 14.37 लाख करोड़ रुपए (US$ 151.1 बिलियन ) तक पहुंचने का अनुमान है.

यूजड कार मार्केट के बढ़ने की वजह क्या: रिपोर्ट के अनुसार, सेकेंड हैंड कार मार्केट में यह बढ़ोतरी मिडिल क्लास की बढ़ती उम्मीदों, डिजिटल व्हीकल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल, नई गाड़ियों की कीमत और ग्राहकों की खरीदने की क्षमता के बीच बढ़ते अंतर की वजह से हो रही है. पहली बार कार खरीदने वाले लोग अब पर्सनल मोबिलिटी यानी निजी आवागमन के लिए इस्तेमाल की गई गाड़ियों को एक समझदारी भरा कदम मानने लगे हैं.

दुनिया में भारत का पुरानी कारों का बाजार 5वें नंबर पर: ग्रैंड व्यू रिसर्च के अनुसार, दुनिया में सेकेंड हैंड कारों का सबसे बड़ा बाजार अमेरिका (United States of America) है. हालांकि, नई कारों की बिक्री के मामले में चीन नंबर वन पर है, लेकिन जब पुरानी कारों के मार्केट साइज, कुल वैल्यू और इकोसिस्टम की आती है, तो अमेरिका नंबर वन हो जाता है. दूसरे नंबर पर चीन और फिर यूके व जापान आते हैं. वैश्विक स्तर पर भारत का सेकेंड हैंड कार बाजार 5वें नंबर पर है. लेकिन अपनी तेज विकास दर के कारण वर्ष 2030-31 तक भारत के दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पुरानी कारों का बाजार बनने का अनुमान है.

Exchange ऑफर ने बढ़ाया सेकेंड हैंड कारों का बाजार: सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के अनुसार, देश में पैसेंजर गाड़ियों की कुल संख्या 60 मिलियन यानी 6 करोड़ यूनिट से ज्यादा हो गई है. इससे ट्रेड-इन गाड़ियों यानी पुरानी गाड़ी देकर नई लेने का एक बड़ा सप्लाई बेस तैयार हुआ है, जिसका फायदा ऑर्गनाइज्ड प्लेटफॉर्म और पारंपरिक डीलर तेजी से उठा रहे हैं. नई इस्तेमाल की गई कारों के सेगमेंट में BS-VI गाड़ियों की बढ़ती उपलब्धता, बेहतर क्वालिटी, भरोसे और नियमों के पालन के जरिए ग्राहकों का भरोसा और मजबूत कर रही है.

गो ड्राइव इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के बिजेंद्र चौधरी.
गो ड्राइव इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के बिजेंद्र चौधरी. (Photo Credit; Getty Images)
  • नॉर्थ इंडिया का सेकेंड हैंड कार बाजार सबसे आगे: मॉर्डर इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में नॉर्थ इंडिया 32.2% हिस्सेदारी के साथ मार्केट में सबसे आगे रहेगा. इसकी वजह दिल्ली-NCR में गाड़ियों की बड़ी संख्या, मजबूत रीसेल इकोसिस्टम और शहरी इलाकों में ज्यादा मांग है. वहीं, ईस्ट इंडिया के 10% के सबसे तेज CAGR से बढ़ने का अनुमान है, क्योंकि पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार में पहली बार गाड़ी खरीदने वालों की संख्या बढ़ रही है.
  • सेकेंड हैंड SUV की ज्यादा डिमांड: 2026 में SUV सबसे ज्यादा बिकने वाली गाड़ियां होंगी, जिनकी मार्केट में हिस्सेदारी लगभग 38% होगी. इसकी वजह, लोगों की ऊंची सीटिंग पोजिशन, सड़क पर दमदार पकड़, बेहतर सुरक्षा का एहसास और शहरी व अर्ध-शहरी बाजारों में सस्ती पुरानी SUV की बढ़ती मौजूदगी को माना गया है.

EV और हाइब्रिड गाड़ियों की डिमांड में तेजी: EV और हाइब्रिड गाड़ियों की डिमांड 2026 में तेजी से बढ़ी हैं. जो 23.6% CAGR से बढ़ रही हैं. इसे इलेक्ट्रिक गाड़ियों को अपनाने में बढ़ोतरी, बेहतर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी की घटती लागत और मैन्युफैक्चरर्स व डिजिटल मार्केटप्लेस से सस्ती पुरानी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बढ़ती उपलब्धता से मदद मिल रही है.

ऑर्गनाइज्ड यूज्ड कार इकोसिस्टम मजबूत कर रहा इन्फ्रास्ट्रक्चर: स्पिनी (Spinny) का नेशनल यूज्ड-EV सर्टिफिकेशन और मारुति ट्रू वैल्यू (Maruti True Value) का 500 आउटलेट्स तक विस्तार भारत के ऑर्गनाइज्ड यूज्ड कार इकोसिस्टम में तेज विकास दिखाता है. ये पहल गाड़ी के इंस्पेक्शन, सर्टिफिकेशन और बिक्री के बाद मिलने वाली सर्विस के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रही हैं, जिससे खरीदारों का भरोसा बढ़ रहा है और बड़े मेट्रो शहरों के अलावा भी इन्हें अपनाने की रफ्तार तेज हो रही है.

पुरानी कारों के बाजार के सामने मुख्य चुनौतियां: पुरानी कारों का बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके सामने कई बड़ी चुनौतियां भी हैं. दरअसल, देश में पुरानी कारों का लगभग 80% बाजार अभी भी असंगठित है. इसमें स्थानीय ब्रोकर या सीधे ग्राहक शामिल हैं. संगठित कंपनियों जैसे Cars24, Spinny, CarDekho के आने के बाद भी, स्थानीय डीलर्स के पास गाड़ियों के इतिहास या उनके मूल्यांकन का कोई तय मापदंड नहीं होता.

ऑटो एक्सपर्ट राजकुमार ने बताया ई-20 अच्छा या खराब.
ऑटो एक्सपर्ट राजकुमार ने बताया ई-20 अच्छा या खराब. (Photo Credit; Getty Images)

इसके अलावा पुरानी कार खरीदने पर लोन की दिक्कत भी होती है. नई कार खरीदने पर जहां ब्याज दर 8% से 9% के आसपास होती है. वहीं पुरानी कार पर लोन लेने पर ब्याज दर 12% से 18% या उससे भी अधिक हो जाती है. साथ ही BS-VI फेज 2 और E-20 फ्यूल जैसी सरकारी की नीतियों ने पुरानी पेट्रोल कारों के बाजार को नुकसान पहुंचाया है.

E20 का गाड़ियों की बिक्री पर क्या असर: FADA के अनुसार, E20 में बदलाव को लेकर ग्राहकों की हिचकिचाहट ने खरीदारों को CNG, हाइब्रिड और EV की ओर आकर्षित किया. इसका नतीजा ईंधन के इस्तेमाल में एक अहम बदलाव के तौर पर सामने आया है. सेकेंड हैंड कार बाजार में CNG की 24.67%, हाइब्रिड की 8.02% और EV की 7.90% की हिस्सेदारी मिलाकर कुल 40.59% तक पहुंच गई है, जो पेट्रोल की 41.68% हिस्सेदारी से सिर्फ़ 1.09 प्रतिशत अंक कम है. यह अंतर एक साल पहले 13.21 अंक था. आने वाले महीनों में पेट्रोल कारों की सेल में और गिरावट दिखने की उम्मीद है.

स्क्रैप सेंटर में बढ़ी कारों की संख्या: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की 2025 के आखिर की समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, 21 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 123 पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा (Registered Vehicle Scrapping Facility, RVSF) काम कर रहे थे और नवंबर 2025 तक 3.58 लाख गाड़ियां स्क्रैप की जा चुकी थीं. वहीं, 2026 में 30 जनवरी तक, 21 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 129 RVSF काम कर रहे थे. इन सेंटर्स में 4,30,306 गाड़ियां स्क्रैप की गई थीं.

फर्स्ट ओनर कार खरीदार कितने.
फर्स्ट ओनर कार खरीदार कितने. (Photo Credit; Getty Images)

हरियाणा में पेट्रोल गाड़ी की सेल गिरी: फरीदाबाद के स्थानीय यूज्ड कार डीलरों के मुताबिक, पहले पुरानी कार खरीदने वालों में पेट्रोल मॉडल की डिमांड ज्यादा रहती थी. लेकिन, E20 की अनिवार्यता के बाद से खरीददार CNG, डीजल और इलेक्ट्रिक विकल्पों की ज्यादा जानकारी ले रहे हैं. पेट्रोल कार खरीदने से पहले ग्राहक अब गाड़ी के मॉडल ईयर, इंजन की स्थिति और E20 के साथ उसकी कंपेटिबिलिटी के बारे में सवाल कर रहे हैं.

यूज्ड कार डीलर धीरज बताते हैं कि जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान फरीदाबाद में सेकेंड हैंड कारों का कारोबार बढ़ा है और वर्तमान में करीब 3,000 पुरानी कारों की मासिक बिक्री का अनुमान है. इनमें करीब 1,600-1,700 कारें CNG, डीजल और इलेक्ट्रिक श्रेणी की हैं. बाकी में पेट्रोल कारें शामिल हैं. जबकि इसके पहले करीब 2,500 कारों की मासिक बिक्री का अनुमान था, जिनमें लगभग 1,500 पेट्रोल कारें होती थीं.

E20 ने बढ़ाई सावधानी, खत्म नहीं होगा पेट्रोल कार का बाजार: ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट समीर गोयल के मुताबिक E20 को लेकर बनी अनिश्चितता ने ग्राहकों को दूसरे विकल्पों पर विचार करने के लिए जरूर प्रेरित किया है. लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल कारों की मांग पूरी तरह खत्म हो रही है. अच्छी कंडीशन, कम चली हुई और सही मॉडल ईयर वाली पेट्रोल कारों के लिए अभी भी खरीदार मौजूद हैं.

चंडीगढ़ में 20-30% पेट्रोल गाड़ियों के खरीदार कम हुए: चंडीगढ़ के रजिस्ट्रेशन एवं लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) के अधिकारी, संजीव कोहली ने बताया कि जनवरी 2026 से जुलाई 2026 तक चंडीगढ़ नंबर की कुल 15437 पुरानी कारों के स्वामित्व का ट्रांसफर किया गया. इसी तरह जनवरी 2025 से जुलाई 2025 तक कुल 15257 पुरानी कारों के मालिक का नाम बदला.

ये आंकड़े बताते हैं कि कुल पुरानी गाड़ियों की सेल में तो बढ़ोतरी हुई है. हालांकि, कार डीलरों ने बताया कि पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण शुरू होने के बाद से पुरानी पेट्रोल गाडियों के खरीदार डीजल और इलेक्ट्रिक वाहनों पर शिफ्ट हुए हैं. कारोबारी रमनदीप सिंह ने बताया कि ई20 पेट्रोल के कारण पेट्रोल गाडियों के खरीदारों में करीब 20 से 30% तक की कमी आई है. लोग सबसे पहले यही पूछते हैं कि एथेनॉल के मिश्रण से कार का इंजन तो खराब नहीं होगा. लोग अब डीजल गाड़ियों को तरजीह दे रहे हैं.

किस सेगमेंट की कार की ज्यादा सेल.
किस सेगमेंट की कार की ज्यादा सेल. (Photo Credit; Getty Images)

गुजरात में पुरानी पेट्रोल कारों की सेल 14% तक गिरी: गुजरात में मार्च 2025 में पुरानी पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी 84% थी, जो E20 से जुड़ी अफवाहों के कारण मार्च 2026 तक घटकर 70% रह गई. लोगों का डीजल और CNG कारों की ओर झुकाव बढ़ा है. अप्रैल 2020 के बाद की ज्यादातर BS6 कारें E20 के अनुकूल हैं. अप्रैल 2023 से पहले की कारों में माइलेज में केवल 3% से 7% का मामूली अंतर हो सकता है.

झारखंड के सेकेंड हैंड बाजार में मंदी: पुरानी गाड़ियों का कारोबार करनेवाले एक प्रतिष्ठित संस्थान के मैनेजर नीतेश कुमार के अनुसार, एक आउटलेट से पिछले साल तक करीब 40 गाड़ियों की बिक्री हर महीने हुआ करती थी. लेकिन, इथेनॉल युक्त पेट्रोल के आने के बाद से बीते तीन-चार महीनों में सेल 15-20 गाड़ी तक सीमित हो गई है.

छत्तीसगढ़ में सेकेंड हैंड कारों की सेल 11.9% तक गिरी: छत्तीसगढ़ ऑटोमोबाइल रिसेलर्स एसोसिएशन यानी CARA के कार्यवाहक अध्यक्ष विक्रम हुंदल के मुताबिक वर्तमान समय में यूज्ड कार मार्केट कुछ दबाव में है. जनवरी से जुलाई 2025 की तुलना में जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान पुरानी कारों की बिक्री कम हुई है. 2025 में जहां 27,985 कारों की सेल हुई थी वहीं, इस पीरियड में 2026 में 24,667 गाड़ियों की ही बिक्री हुई. जो 3,318 वाहन की कमी और करीब 11.9% की गिरावट दिखाता है.

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