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झारखंड गजब है! शराब और गांजा के बाद अब चूहों ने डोडा किया साफ, आरोपी हुए बरी

रांची पुलिस की लापरवाही के चलते नशीले पदार्थ की तस्करी के आरोप में पकड़े गए दो आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है.

Ranchi Police Negligence
चूहों ने डोडा किया साफ. (कॉन्सेप्ट इमेज-ईटीवी भारत)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : January 3, 2026 at 2:28 PM IST

4 Min Read
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रांचीः राजधानी रांची के नामकुम थाना क्षेत्र में पुलिस की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है. पुलिस के द्वारा जब्त किए गए डोडे को चूहों ने नष्ट कर दिया है. अदालत ने सबूतों की कमी और पुलिस के बयानों में विरोधाभास के चलते दो आरोपियों को बरी कर दिया है.

क्या है पूरा मामला

रांची में बड़े पैमाने पर नशे के तस्करों के खिलाफ कार्रवाई तो हो रही है, लेकिन पुलिस की जांच में लापरवाही की वजह से पकड़े जाने के बावजूद आरोपी आसानी से रिहा हो जा रहे हैं. रांची के ओरमांझी में 200 किलो गांजा चूहों के द्वारा नष्ट किए जाने के बाद एक और मामला सामने आया है. जिसमें खुले आसमान के नीचे डोडा चूर्ण रखने और चूहों के द्वारा डोडा चूर्ण नष्ट कर देने की बात सामने आई है. साथ ही पुलिस के द्वारा पेश किए गए गवाह भी आरोपितों के गुनाह साबित नहीं कर पाए. जिसकी वजह से अदालत ने दो आरोपियों को बरी कर दिया. पूरा मामला रांची के नामकुम थाना से जुड़ा हुआ है.

दरअसल, 31 मई 2019 की रात नामकुम पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि कोलाड गांव के पास डोडा तस्करी हो रही है. छापेमारी में कार्तिक महतो और चुरू लोहरा को पकड़ा गया था, जिनके वाहनों से 45 बोरी डोडा (कुल करीब 675-836 किग्रा) जब्त करने का दावा पुलिस ने किया था. अदालत में यह बताया गया कि जब्त 45 बोरे खुले आसमान में रखे जाने से खराब हो गए, जबकि FSL सैंपल वाली प्लास्टिक बॉक्स चूहों ने कुतर डाला. चार बॉक्स चूहे की चपेट में आए. जिसमें सिर्फ एक ही सील था.

एसएफएसएल रिपोर्ट में डोडा की हुई थी पुष्टि

पुलिस ने दावा किया कि 45 बोरी डोडा (कुल 675 किलो), एक बोलेरो पिकअप वाहन और दो मोटरसाइकिल जब्त की गई थी. जिसके बाद एनडीपीएस एक्ट की धारा 15सी और 29 के तहत नामकुम पीएस केस नंबर 161/2019 दर्ज हुआ. जांच अधिकारी अनिल कुमार सिंह ने चार्जशीट दाखिल की. इसमें अभियोजन पक्ष ने सात पुलिस गवाह पेश किए, जिनमें सूचनाकर्ता प्रवीण कुमार, आईओ अनिल कुमार सिंह शामिल थे. पुलिस के द्वारा पेश किए गए गवाही में काफी विरोधाभास पाया गया. जिसके बाद अदालत ने फैसले में पुलिस की कहानी को झूठा ठहराया .

आरोपियों की बरी होने की वजह

पहला कारण जब्त बोरे न तो सील हुए, न चिह्नित किए गए. दूसरा गवाहों के बयानों में विरोधाभास सामने आया. बयान में कुछ गवाहों ने बोरे का वजन प्रत्येक 15 किलो बताया, लेकिन आईओ ने 836 किलो और एक गवाह ने 200 किलो कहा. तीसरा गिरफ्तारी का समय जब्ती सूची सुबह 4 बजे बनी, लेकिन गिरफ्तारी मेमो सुबह 8:30 बजे का दिखाया गया.

धारा 42 का पालन नहीं

गुप्त सूचना पर कार्रवाई की जानकारी सीनियर पुलिस अधिकारियों को दी जाती है, लेकिन इस कांड में ऐसा नहीं हुआ. गुप्त सूचना लिखित रूप में वरिष्ठ को नहीं भेजी गई. साथ ही कोई भी स्वतंत्र गवाह इस मामले में नहीं था. 16 अक्टूबर 2025 को अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया. अदालत ने कहा कि अभियोजन साक्ष्य से संदेहास्पद, बुनियादी तथ्य सिद्ध नहीं होते हैं, इसलिए दोनों को बरी किया जाता है.

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