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नजीर पेश करते पहाड़ी गांव, नशा किया या परोसा तो जुर्माना और बहिष्कार, देहरादून-उत्तरकाशी के बाद नैनीताल

नशे के खिलाफ उत्तराखंड के कई गांवों में एकजुटता दिख रही है. युवाओं को नशे से बचाने को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है.

FINES FOR DRUG USE
नशे के खिलाफ गांव का बड़ा फैसला (PHOTO- ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : January 3, 2026 at 6:02 PM IST

4 Min Read
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हल्द्वानी (उत्तराखंड): नैनीताल जिले के लालकुआं तहसील क्षेत्र स्थित बिंदुखत्ता का एक गांव है शीशम भुजिया. इस गांव के निवासियों ने नशे के खिलाफ एक बड़ा फैसला लिया है. फैसला ये है कि नशा करने वालों पर 11 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा, साथ ही उनका सामाजिक बहिष्कार भी किया जाएगा. ग्रामीणों ने एक सामूहिक बैठक कर इसके लिए पंचमंडली समिति का गठन किया है.

लालकुआं विधानसभा के बिंदुखत्ता क्षेत्र के शीशम भुजिया गांव के ग्रामीणों ने नशे के खिलाफ जंग छेड़ दी है. गांव के युवाओं को नशे से बचाने के लिए ग्रामीणों ने बड़ा फैसला लिया है. इसके लिए ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से पांच लोगों की एक कमेटी का गठन किया है. पंच कमेटी का फैसला है कि गांव में अगर कोई व्यक्ति नशे का सेवन करता हुआ पकड़ा गया या किसी कार्यक्रम में नशा परोसते हुआ मिला तो उसे पंच मंडली न सिर्फ दंडित करेगी बल्कि जुर्माना भी वसूल करेगी. कमेटी ने मामले में 11 हजार रुपए का जुर्माना और सामाजिक बहिष्कार करने का फैसला लिया है.

पंच मंडली समिति ने यह भी साफ किया है कि-

  • गांव में होने वाले शादी-विवाह, जन्मदिन, धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में शराब पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा.
  • नियमों का उल्लंघन करने पर बिना किसी भेदभाव के कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
  • क्षेत्र में युवा पीढ़ी के नशे की गिरफ्त में आने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए यह कठोर कदम उठाया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ी को इस सामाजिक बुराई से बचाया जा सके.

इस पंच समिति के अध्यक्ष कुंदन सिंह कोरंगा ने बताया कि गांव में बढ़ते नशे के चलन को लेकर ये फैसला लिया गया है. इसके लिए ग्रामीणों द्वारा साल के आखिरी दिन 31 दिसंबर 2025 को एक सामूहिक बैठक की गई थी. जिसके बाद इस समिति का गठन किया गया. सभी के सुझावों के बाद समिति द्वारा ये फैसला लिया गया है.

वहीं, इस फैसले का स्वागत करते हुए एसपी सिटी मनोज कत्याल ने बताया कि नशे के खिलाफ पुलिस अपना काम कर रही है. नशा सामाजिक बुराई है, ऐसे में ग्रामीण नशे पर प्रभावी कदम उठाने के लिए एक कदम आगे आए हैं तो यह एक अच्छा फैसला है. उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ प्रशासन की जंग में अब समाज भी आगे आ रहा है. गांव के लोगों की यह अच्छी पहल है.

उत्तरकाशी और देहरादून में लिया जा चुका है ऐसा ही फैसला: 22 दिसंबर को उत्तरकाशी के भटवाड़ी तहसील क्षेत्र के मानपुर गांव के ग्रामीणों ने गांव में शराब प्रतिबंध करने का निर्णय लिया जा चुका है. निर्णय के तहत मांगलिक और वैवाहिक कार्यक्रम में शराब बिक्री, भंडारण और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है. साथ ही नियमों का उल्लंघन करने पर 21 हजार रुपए तक का जुर्माना तय किया गया है.

देहरादून जिले के जौनसार बावर में 20 नवंबर को खत पट्टी शैली में शामिल 1 दर्जन से अधिक गांव के लोगों ने बैठक कर निर्णय लिया. फैसला किया गया कि गांवों में होने वाली शादियां और अन्य शुभ आयोजनों में महंगे तोहफे लेने देने पर पाबंदी रहेगी. इसके अलावा, शराब और फास्ट फूड भी परोसा नहीं जाएगा. नियमों का उल्लंघन करने पर परिवार पर एक लाख रुपए का जुर्माना और उन परिवार के किसी भी शुभ कार्यक्रम में गांव का कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं होगा.

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