एकनाथ शिंदे से मिले शरद पवार, तो संजय राउत ने कहा- गद्दार नेताओं को इज्जत दे रहे...
शरद पवार की उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से उबाल आ गया है.

Published : July 9, 2026 at 2:57 PM IST
मुंबई : नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (SP) के प्रमुख शरद पवार के विधान भवन में उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के चैंबर में पार्टी बैठक करने के फैसले से महा विकास अघाड़ी (MVA) में नई खींचतान शुरू हो गई है. शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने वरिष्ठ नेताओं पर "गद्दारों" को महत्व देने का आरोप लगाया है.
राउत ने उप मुख्यमंत्री शिंदे से मिलने के लिए पवार की भी आलोचना की. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राउत ने आगे कहा कि वरिष्ठ नेताओं को "गद्दारों" को राजनीतिक महत्व और इज्जत देने से बचना चाहिए.
पवार के राजनीतिक कद को मानते हुए राउत ने कहा, "शरद पवार बेशक एक बड़े नेता और बहुत सम्मानित व्यक्ति हैं. लेकिन, हमारी सरकार गिराने वाले गद्दार की छत के नीचे पार्टी बैठक करना ऐसे कद की साख को कम करता है."
एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र को धोखे और भ्रष्टाचार से भर दिया है. पवार साहब ने बैठक के लिए उनका चैंबर क्यों चुना? क्या पूरा विधान भवन खाली था? उनके पास वाईबी चव्हाण प्रतिष्ठान है. यह हमारे वफादार ज़मीनी कार्यकर्ताओं की पक्की राय है.
एनसीपी प्रमुख के मिलनसार स्वभाव पर तंज कसते हुए राउत ने कहा, "हम अपनी पार्टी की बैठक करने के लिए कभी भी किसी गद्दार के ऑफ़िस में नहीं जाएंगे. हम इतने सहनशील नहीं हैं, न ही हमारा दिल इतना बड़ा है. जो बड़े दिल वाले हैं, उन्हें जैसा करना है, करने दो, लेकिन यह हमें मंज़ूर नहीं है. ऐसे समझौतों की वजह से ही एनसीपी (SP) जनता के बीच अपनी साथ खो रही है."
विपक्षी गठबंधन के अंदर भावनात्मक असर के बारे में बताते हुए राउत ने दावा किया कि पूरा गठबंधन परेशान है. "अगर हम उनकी जगह होते, तो हम भी कभी अजित पवार के चैंबर में बैठक नहीं करते. हम शरद पवार के साथ उनके धोखे को याद रखते और राजनीतिक मर्यादा बनाए रखते."
उन्होंने कहा, "महा विकास अघाड़ी के सभी घटकों को इन बुनियादी सिद्धांतों को बनाए रखना चाहिए."
बुधवार को विधान भवन में हुई उच्च स्तरीय बैठक का जिक्र करते हुए, जो कथित तौर पर महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई थी, राउत ने इसके नतीजे पर सवाल उठाया.
"उस बैठक में असल में क्या हुआ, यह पता नहीं है. मुख्यमंत्री ने राज्य के कितने बड़े नेताओं को बुलाया था? शिवसेना यूबीटी एक बड़ी राजनीतिक पार्टी है और बॉर्डर-विवाद आंदोलन का एक अहम हिस्सा है. यह मामला दशकों से लंबित है.
समाधान क्या है? क्या चर्चा हुई, और अगली बैठक की तारीख क्या है? इन सवालों के जवाब नहीं मिले हैं.
उन्होंने कहा, "शरद पवार का एकनाथ शिंदे के ऑफिस में जाना और वहां अपनी पार्टी की बैठक करना, शिवसेना यूबीटी को सच में दुख पहुंचा है."
शरद पवार पर सत्ताधारी सरकार को सही ठहराने का आरोप लगाते हुए राउत ने राजनीतिक चुनौती दी, “शरद पवार देशद्रोहियों को इज्ज़त दे रहे हैं, और शिवसेना इस वजह से बहुत बेचैन है. अगर आप गद्दारों को इज्जत देते रहेंगे, तो आप अपनी ही पार्टी में हुए दलबदल के खिलाफ बोलने का नैतिक अधिकार खो देंगे."
"दोहरा मापदंड पर सवाल उठाते हुए राउत ने पूछा, "अजीत पवार ने भी धोखा किया. फिर आप कोर्ट क्यों गए और उनके खिलाफ स्टैंड क्यों लिया? हम एकनाथ शिंदे के खिलाफ लगातार लड़ रहे हैं -आप उन्हें महत्व क्यों दे रहे हैं? इससे हमें बहुत दुख हुआ है."
राउत ने साफ किया कि उनका गुस्सा पूरी तरह से राजनीतिक था, व्यक्तिगत नहीं. "शरद पवार के साथ मेरा रिश्ता गहरे प्यार और गर्मजोशी से जुड़ा है, लेकिन जब मेरी पार्टी के स्टैंड की बात आती है तो मैं अडिग रहता हूं. अगर बड़े नेता देशद्रोहियों को इज्जत देते रहे, तो राज्य की छवि को जरूर नुकसान होगा. मैं शरद पवार से कभी भी बात कर सकता हूं, लेकिन एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर यह मामला हमारे लिए बहुत गंभीर है. हम उन लोगों की छत के नीचे कभी नहीं बैठेंगे जिन्होंने आपको धोखा दिया है.”
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