जख्मों पर 'मछली की खाल' का मरहम: गंभीर संक्रमण से तड़प रहे कुत्ते की डॉक्टरों ने ऐसे बचाई जान
डॉक्टर के अनुसार, मछली की खाल में प्राकृतिक कोलेजन, ओमेगा फैटी एसिड और बायोएक्टिव तत्व होते हैं, जो त्वचा की मरम्मत के लिए जरूरी हैं.


Published : January 11, 2026 at 1:13 PM IST
हैदराबादः तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है. यहां एक पालतू कुत्ते का इलाज मछली की खाल (fish skin grafting) के जरिए सफलतापूर्वक किया गया. कुत्ते का शरीर एक गंभीर इन्फेक्शन की वजह से करीब 50 प्रतिशत तक खराब हो चुका था. हैदराबाद के जुबली हिल्स स्थित 'पेट्स केयर सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल' में यह इलाज किया गया.
अस्पताल के संस्थापक और मुख्य पशु चिकित्सक, डॉ. वेंकट यादव ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह कुत्ता बोडुप्पल के एक निवासी का है. कुत्ते को एक गंभीर स्किन इन्फेक्शन हो गया था, जिससे उसके शरीर को काफी नुकसान पहुंचा था.
जब कुत्ते का मालिक 'पेट्स केयर सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल' पहुंचा, तो मेडिकल टीम ने सामान्य पशु चिकित्सा विधियों के बजाय एक आधुनिक रिजेनरेटिव (पुनर्योजी) उपचार पद्धति अपनाने का फैसला किया. इसके तहत कुत्ते के शरीर के प्रभावित हिस्सों पर प्रोसेस्ड मछली की खाल लगाई गई.
डॉ. वेंकट यादव ने बताया कि इस नई तकनीक से दर्द को कम करने और संक्रमण को आगे बढ़ने से रोकने में मदद मिली. उन्होंने समझाया, "मछली की खाल एक अस्थायी त्वचा के रूप में काम करती है और शरीर की प्राकृतिक उपचार प्रक्रिया में मदद करती है. यह ऊतकों (tissues) को तेजी से दोबारा बनाने में मदद करती है और घाव को सुरक्षित रखती है."
डॉक्टर के अनुसार, मछली की खाल में प्राकृतिक कोलेजन, ओमेगा फैटी एसिड और बायोएक्टिव तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं, जो त्वचा की मरम्मत के लिए बहुत जरूरी हैं. यह खाल घाव पर प्राकृतिक रूप से चिपक जाती है, नमी बनाए रखती है और एक सुरक्षा कवच बनाती है, जिससे ऊपर की त्वचा तेजी से दोबारा बनने लगती है.
डॉ. वेंकट यादव ने बताया, "यह तरीका न केवल घाव भरने की प्रक्रिया को तेज करता है, बल्कि जानवर की तकलीफ को भी कम करता है. यह तकनीक उन मामलों में विशेष रूप से उपयोगी है जहां संक्रमण, जलने या चोट के कारण त्वचा का एक बड़ा हिस्सा खराब हो गया हो."
सरकारी पशु चिकित्सा कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल प्रोफेसर लक्ष्मण और पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. शिरीन भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे. उन्होंने अस्पताल के प्रयासों की सराहना की और कहा कि इस तरह की आधुनिक उपचार पद्धतियां भारत में पशु स्वास्थ्य सेवा (एनिमल हेल्थकेयर) में सुधार ला सकती हैं.
प्रोफेसर लक्ष्मण ने कहा कि रिजेनरेटिव मेडिसिन (पुनर्योजी चिकित्सा) पशु चिकित्सा का भविष्य है. उन्होंने बताया, "मछली की खाल जैसे जैविक पदार्थों का उपयोग घावों के इलाज के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है. यह जानवरों को बिना किसी खास जटिलता के तेजी से ठीक होने में मदद कर सकता है."
डॉ. शिरीन ने पालतू जानवरों के मालिकों के बीच जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा, "अक्सर लोग तब इलाज में देरी कर देते हैं जब उनके पालतू जानवर किसी संक्रमण (इन्फेक्शन) से जूझ रहे होते हैं. समय पर चिकित्सा देखभाल और आधुनिक उपचार पद्धतियों के जरिए उनकी जान बचाई जा सकती है."
कुत्ते के इस सफल इलाज ने हैदराबाद के पालतू पशु प्रेमियों और मालिकों में एक नई उम्मीद जगाई है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में इस तरह के आधुनिक उपचारों का इस्तेमाल देश भर के पशु अस्पतालों में बड़े पैमाने पर किया जा सकेगा.
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