लाइन होटलों की चायपत्ती में मिलायी जा रही अफीम! पंजाब-हरियाणा में मसाले की तरह हो रहा डोडा का इस्तेमाल
लाइन होटलों में चायपत्ती और पंजाब-हरियाणा में मसाले की तरह डोडा का इस्तेमाल रहा है. पलामू से नीरज कुमार की रिपोर्ट.

Published : June 25, 2026 at 7:25 PM IST
पलामू: नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे के किनारे बसे लाइन होटलों में डोडा का इस्तेमाल चायपत्ती की तरह हो रहा है, जबकि पंजाब और हरियाणा के इलाकों में इसे मसाले की तरह घरेलू उपयोग में लिया जा रहा है. झारखंड से अफीम और डोडा की तस्करी उत्तर भारत के कई राज्यों तक फैली हुई है. झारखंड पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है और करोड़ों रुपये के नशीले पदार्थ जब्त किए जा चुके हैं.
पलामू पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 100 किलो डोडा बरामद
नवंबर-दिसंबर 2025 में पलामू पुलिस ने डोडा और अफीम के खिलाफ लगातार अभियान चलाया. 2 दिसंबर 2025 को सदर थाना क्षेत्र में की गई कार्रवाई में उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी मोहम्मद चांद और जीशान को गिरफ्तार किया गया. दोनों पर डोडा तस्करी का आरोप है. उनके कब्जे से करीब 100 किलो डोडा बरामद हुआ.
पूछताछ में दोनों आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए. उन्होंने बताया कि नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे के किनारे लाइन होटलों में डोडा को चायपत्ती की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि पंजाब और हरियाणा में बड़ी संख्या में लोग इसे मसाले की तरह घरों में उपयोग करते हैं.
बरेली बना अफीम-डोडा तस्करी का सबसे बड़ा केंद्र
झारखंड से अफीम और डोडा की तस्करी का नेटवर्क उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान समेत कई राज्यों से जुड़ा हुआ है. हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश का बरेली नया हब बनकर उभरा है.

अक्टूबर 2025 में पलामू पुलिस की कार्रवाई में बरेली के तस्कर पकड़े गए थे, जिनके पास ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के सबूत मिले. जून 2025 में भी बरेली में पकड़े गए अफीम तस्करों का संबंध झारखंड से निकला था. जानकारी के अनुसार, झारखंड से डोडा और अफीम बरेली पहुंचाया जा रहा है, जहां से इसे उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में सप्लाई किया जाता है.
पोस्ता के पौधे से कैसे तैयार होता है डोडा?
डोडा पोस्ता (पॉपी) के पौधे से तैयार किया जाता है. पोस्ता के फूल में चीरा लगाकर कच्चा अफीम निकाला जाता है. अफीम निकालने के बाद सूखे फूल को पॉपी हस्क कहा जाता है. इन्हीं सूखे फूलों को पीसकर या भूसे के रूप में डोडा तैयार किया जाता है.

तस्करी का मौसमी चक्र
- दिसंबर से फरवरी तक: पोस्ता के पौधों में चीरा लगाकर कच्चा अफीम निकाला जाता है.
- मार्च-अप्रैल में: सूखे पौधों से डोडा तैयार किया जाता है.
- तस्कर डोडा को स्टॉक करके ग्राहकों का इंतजार करते हैं.
भाव में भारी अंतर
तस्कर स्थानीय स्तर पर डोडा को 1400-1500 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदते हैं. वहीं उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में यह 7,000 से 8,000 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकता है. मुनाफे के इस बड़े अंतर ने तस्करी को आकर्षक बना दिया है. झारखंड पुलिस का दावा है कि डोडा और अफीम की तस्करी पर लगातार नजर रखी जा रही है और ऐसे नेटवर्क को तोड़ने के लिए अभियान जारी रहेगा.
लाइन होटलों और हाईवे पर बढ़ता डोडा का चलन
राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर चलने वाले लाइन होटलों में चाय अब सिर्फ चाय नहीं रह गई है. कई जगहों पर इसमें डोडा (पोस्ता की सूखी पत्तियां और डंठल) मिलाया जा रहा है. लंबी दूरी तय करने वाले ड्राइवर और यात्री थकान मिटाने और ताजगी महसूस करने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. पंजाब-हरियाणा के कुछ इलाकों में तो खाने के स्वाद और नशे के लिए डोडा को मसाले की तरह भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

पोस्ता पौधे का हर हिस्सा बाजार में बिकता है
पोस्ता (अफीम पौधा) के हर भाग का अलग-अलग उपयोग होता है. फूलों से अफीम निकाली जाती है, पौधे से डोडा तैयार होता है, जबकि फल से पोस्ता (खसखस) प्राप्त होती है. डोडा में मॉर्फिन और कोडीन जैसे नशीले तत्व पाए जाते हैं, जो इसे नशे का सस्ता विकल्प बनाते हैं.
- मॉर्फिन की मात्रा: कच्ची अफीम बनाम डोडा
- कच्ची अफीम में 10 से 12 प्रतिशत मॉर्फिन होता है.
- डोडा में 0.2 से 1.5 प्रतिशत तक मॉर्फिन पाया जाता है.
- अगर पौधे पर चीरा लगाकर अफीम निकाली गई हो तो डोडा में मॉर्फिन 0.2-0.5 प्रतिशत रह जाता है, जबकि बिना चीरे के यह 1.5 प्रतिशत से भी ज्यादा हो सकता है.
भारत में अफीम की खेती दो श्रेणियों में बंटी हुई है वैध और अवैध.
वैध अफीम की खेती
केंद्र सरकार मध्य प्रदेश (मंदसौर, नीमच, रतलाम), राजस्थान (चित्तौड़गढ़, झालावाड़, कोटा) और उत्तर प्रदेश (बाराबंकी, फैजाबाद आदि) के चयनित क्षेत्रों में किसानों को लाइसेंस देकर अफीम की खेती करवाती है.

2023-24 में सरकार ने किसानों से 2000 से 3200 रुपये प्रति किलो की दर पर अफीम खरीदी थी. यह पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया है और उत्पादित अफीम का उपयोग दवा उद्योग में होता है खासकर मॉर्फिन, कोडीन जैसी जरूरी दवाइयों के निर्माण में.
अवैध अफीम की खेती
दूसरी ओर, झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जंगली व दूरदराज इलाकों में बिना लाइसेंस की जो अफीम उगाई जाती है, वह पूरी तरह अवैध है. इसकी सम्पूर्ण मात्रा नशे के व्यापार में चली जाती है और अंतरराज्यीय तस्करों के हाथों में पहुंचती है.

डोडा (पोस्ता) का अलग कारोबार
अफीम निकालने के बाद पॉप्पी के सूखे खोखले डिब्बों (पोस्ता हस्क) को डोडा कहा जाता है. यह भी एक अलग और फलफूलता अवैध कारोबार है. झारखंड के इलाकों में डोडा 1200-1500 रुपये प्रति किलो में बिकता है, जबकि यह पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-NCR के ढाबों व नशेड़ियों तक पहुंचकर 7000 से 9000 रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है.

लोग इसे चाय में मिलाकर पीते हैं या दाल-सब्जी में मसाले की तरह इस्तेमाल करते हैं. शुरू में हल्का नशा देने वाला यह पदार्थ धीरे-धीरे गंभीर लत बना देता है और लिवर, किडनी समेत अन्य अंगों को स्थायी नुकसान पहुंचाता है.
ड्राइवरों और यात्रियों की मजबूरी
लंबी यात्रा करने वाले ड्राइवर बताते हैं कि डोडा वाली चाय पीने से थकान नहीं लगती और सफर आसान हो जाता है. पंजाब के ड्राइवर सुरिन्द्र कहते हैं, “सफर के दौरान कभी-कभी एक ही जगह की चाय अच्छी लगती है. डोडा वाली चाय से ताजगी और तंदुरुस्ती महसूस होती है.”
चिकित्सकों की चेतावनी, बेहद खतरनाक आदत
पालामू के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने इस प्रवृत्ति पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि “चाय और मसाले की तरह अगर डोडा का इस्तेमाल हो रहा है तो यह बेहद खतरनाक है. यह स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है, मानसिक स्थिति को कमजोर करता है. एक बार लत लग जाने के बाद इसे छुड़ाना बहुत बड़ी चुनौती बन जाता है. इससे व्यक्ति की कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है. अगर किसी को डोडा वाली चाय दे दी जाए तो धीरे-धीरे उसे इसकी तलब लगने लगती है.”

स्वास्थ्य जोखिम और जागरूकता की जरूरत
डोडा के नियमित इस्तेमाल से नशे की लत लग सकती है, जिसका असर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर पड़ता है. विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को इसके नुकसान के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए. प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को लाइन होटलों तथा हाईवे पर ऐसे मिश्रण की जांच करनी चाहिए. डोडा यात्री और ड्राइवरों को तत्कालीन राहत दे सकता है, लेकिन लंबे समय में यह गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन सकता है. थकान दूर करने के पारंपरिक और सुरक्षित तरीकों को बढ़ावा देने तथा डोडा के अवैध मिश्रण पर नकेल कसने की जरूरत है.
पलामू-गढ़वा-लातेहार में लगातार अभियान, सैकड़ों एकड़ फसल नष्ट
झारखंड के पलामू, गढ़वा और लातेहार जिलों में अफीम व डोडा की खेती और तस्करी के खिलाफ पुलिस का सख्त अभियान जारी है. पिछले दो वर्षों में इन इलाकों में अफीम की खेती में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. पुलिस की कार्रवाई और जागरूकता अभियान के कारण पारंपरिक रूप से प्रभावित क्षेत्रों में भी अवैध खेती कम हुई है.
800 एकड़ से अधिक अफीम फसल नष्ट
2024-25 और 2025-26 में पलामू जिले में अकेले 800 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में लगी अफीम की फसल को नष्ट किया गया. इसी तरह 2025-26 में लातेहार जिले में भी 800 एकड़ अफीम की खेती को पुलिस ने उखाड़ फेंका. जिन इलाकों में अफीम की खेती का लंबा इतिहास रहा है, वहां अब सख्त निगरानी और नियमित सर्वे के कारण खेती लगभग समाप्त हो चुकी है.

करोड़ों का डोडा-अफीम पकड़ा, इंटरस्टेट गैंग पर शिकंजा
इस दौरान अफीम और डोडा के करोड़ों रुपये के कई खेप जब्त किए गए तथा अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया गया. मार्च 2025 में पलामू पुलिस ने 566 किलो डोडा की एक बड़ी खेप पकड़ी थी, जिसकी बाजार मूल्य करोड़ों रुपये में आंकी गई थी.
उत्तर भारत की आसान कनेक्टिविटी बन रही समस्या
पलामू, गढ़वा और लातेहार के इलाके उत्तर भारत से बेहद अच्छी कनेक्टिविटी रखते हैं. यहां से गुजरने वाली ट्रेनें, बिहार-उत्तर प्रदेश की निकटवर्ती सीमा और जीटी रोड की निकटता तस्करों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है. नेशनल हाईवे पर चढ़ जाने के बाद वाहनों को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है.
हाल के दिनों में हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई तस्कर पकड़े गए हैं, जो निजी वाहनों से डोडा और अफीम खरीदने इन इलाकों में पहुंचे थे.
बाहर के लोगों की भूमिका, जांच जारी
पुलिस की कार्रवाई और सर्वे के दौरान स्थानीय लोगों के साथ-साथ राज्य के बाहर के तस्करों का नेटवर्क भी सामने आया है. इन पर कार्रवाई के साथ गहन अनुसंधान चल रहा है.
अफीम और डोडा पोस्त को लेकर कानून
भारत में अफीम, डोडा पोस्त (पॉपी हस्क), कच्चा अफीम और इससे बने सभी नशीले पदार्थों पर पूरी तरह नियंत्रण Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 यानी NDPS एक्ट के तहत है. यह देश का सबसे कठोर ड्रग विरोधी कानून माना जाता है और इसमें कोई जमानत या पैरोल का आसान प्रावधान नहीं है. अगर कोई व्यक्ति 50 किलो से ज्यादा डोडा पोस्त या 2.5 किलो से ज्यादा कच्चा अफीम रखते, बेचते, खरीदते या परिवहन करते पकड़ा जाता है तो केस सीधे 'व्यावसायिक मात्रा' का बनता है. ऐसे मामलों में निचली अदालत से जमानत लगभग नामुमकिन होती है. हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ता है. खेती करना, बीज रखना, परिवहन में मदद करना सभी अपराध इसमें शामिल हैं.
डीआईजी का बयान
किशोर कौशल, डीआईजी, पलामू रेंज ने कहा, “अफीम की खेती में गिरावट आई है. कार्रवाई और जांच के दौरान स्थानीय और बाहर के लोगों का नेटवर्क पकड़ा गया है. राज्य के बाहर के लोगों की भूमिका सामने आई है, जिस पर कार्रवाई के साथ अनुसंधान भी जारी है. अफीम और डोडा के किसी भी प्रकार के इस्तेमाल गैर-कानूनी है. पुलिस सभी गतिविधियों पर नजर रखे हुए है और दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा.” पुलिस का कहना है कि अफीम प्रभावित इलाकों का नियमित सर्वे किया जा रहा है और भविष्य में भी इस पर सख्त निगरानी रखी जाएगी.
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