BHU के डॉक्टरों ने तैयार किया अनोखा APP, मरीजों और तीमारदारों को मिलेगी FREE में विशेष सुविधा, जानें सब कुछ
वाराणसी स्थित BHU के डॉक्टरों ने ऐसा एप तैयार किया है कि जिससे ये पता चलेगा कि डॉक्टर कब और कहां मिलेंगे. सुविधा निःशुल्क है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 10, 2026 at 9:35 AM IST
|Updated : January 11, 2026 at 10:20 AM IST
वाराणसी: चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (IMS-BHU) वाराणसी के डॉक्टर ने 4 साल की मेहनत के साथ मरीजों की सुविधा के लिए एक नया प्लेटफॉर्म काशी प्लस (काशी+) एप तैयार किया है. यहां एक स्थान पर मरीजों को अस्पताल के डॉक्टर, ओपीडी, जांच पर्चा, काउंटर, रिपोर्ट मिलने की टाइमिंग जैसे तमाम प्रश्नों का जवाब मिलेगा.
जी हां! 10 लाख रुपये की लागत से डॉक्टरों की टीम ने एक एप्लिकेशन तैयार किया है, जो मरीजों को निःशुल्क लाभ दे रहा है. इसमें सिर्फ काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ही नहीं, जनपद के सभी बड़े सरकारी अस्पतालों की जानकारी भी उपलब्ध मिलेगी. इसकी सफलतापूर्वक शुरुआत के बाद अब इसे लखनऊ के बड़े सरकारी अस्पतालों में भी शुरू करने की योजना है.
चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (IMS-BHU) के डॉक्टर कमलेश चौहान बताते हैं कि, वे मूलत: मध्य प्रदेश के खरगौन, इंदौर के रहने वाले हैं. उन्होंने कहाकि साल 2016 में मैं बीएचयू आया था. मेरा एमबीबीएस का कोर्स चल रहा था. तब देखा था कि फर्स्ट ईयर में कॉलेज में ही रहना होता है, हॉस्पिटल नहीं ले जाते हैं. सेकेंड ईयर में हॉस्पिटल गए तो देखा कि मरीजों को काफी परेशानी हो रही है. रोज लगभग 8 से 10 हजार लोग आते थे. यह हॉस्पिटल तीन से चार राज्यों को कवर करता है. कई बार हॉस्पिटल में छुट्टी रहती है. मरीज अस्पताल में पहुंच जाते थे, उन्हें ये पता नहीं होता है कि डॉक्टर उपलब्ध हैं या नहीं.

मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखकर बनाया गया एप्लीकेशन
उन्होंने बताया कि, वे मरीज जो दूर-दराज से आते हैं, उन्हें इन सभी चीजों की जानकारी का अभाव रहता है. उनके पास आयुष्मान कार्ड होता है. कई सारी स्कीम्स होती हैं, लेकिन उन्हें जानकारी का अभाव होता है. कई बार अस्पतालों की तरफ से भी इसका प्रचार नहीं किया जाता है कि वे इन सुविधाओं का लाभ ले सकें.
उन्होंने बताया कि "मैंने इस तरह की परेशानियों को देखा, तो इन सभी चीजों को ध्यान में रखकर एक एप्लीकेशन बनाने के बारे में सोचा. इसके बाद IIT-BHU के विद्यार्थियों के सहयोग से हम लोगों ने एक एप्लीकेशन बनाया है, जिसका नाम है ‘काशी प्लस’. यह वर्तमान में लगभग तीन से चार अस्पतालों को कवर कर रहा है. मुख्य रूप से सर सुंदरलाल अस्पताल, जिसमें ट्रॉमा सेंटर भी शामिल है. वहीं, कबीर चौरा, रामनगर, लाल बहादुर शास्त्री हॉस्पिटल भी इसमें शामिल हैं."

10 हजार लोगों ने कर लिया है एप्लीकेशन डाउनलोड
डॉ. कमलेश चौहान बताते हैं कि, टाटा मेमोरियल का कैंसर इंस्टीट्यूट का ब्रांच भी इसमें शामिल है. अभी तक इसे लगभग 10,000 लोगों ने डाउनलोड कर लिया है. हम लोगों ने इसका पायलट प्रोजेक्ट कोरोना में लॉन्च किया था. अब हम इसे आगे के अस्पतालों में भी ले जाना चाहते हैं, ताकिे अधिक से अधिक लोग इसकी सुविधा का लाभ उठा सकें. इसके माध्यम लोगों को अपने आसपास के नजदीकी अस्पताल के बारे में जानकारी मिलेगी. वे यह तय कर सकेंगे कि कौन से सरकारी अस्पताल में जाना चाहिए. इसमें आपातकालीन और सामान्य श्रेणी दोनों ही ऑप्शन दिया जाता है. हम इसमें मरीज की पूरी परेशानी सुनते हैं.
मरीजों को मिलेंगी सभी तरह की जानकारियां
उन्होंने बताया कि," हम मरीज की परेशानी सुनने के बाद उन्हें डिपार्टमेंट बताते हैं. वहां कितने बजे जाना चाहिए, कितने बजे डॉक्टर उपलब्ध होंगे, पर्चा कटवाने के लिए कौन से कमरा संख्या में जाना होगा. कितना इंतजार करना होगा, यह सब भी हम बताते हैं. इसके बाद डॉक्टर ने जो जांच लिखी होगी, उसको लेकर भी हम उन्हें गाइड करते हैं. जांच कितने में होगी. कितने दिनों में रिपोर्ट मिल जाएगी. मरीज को शुरू से अंत तक की सभी जानकारियां दी जा जाती हैं. इतना ही नहीं, अगर मरीज को भर्ती कराना होगा, तो इसके लिए हम उसी जरूरत के अनुसार अलग जानकारी भी देते हैं."

एप्लीकेशन पर 18 से 20 लोगों की टीम कर रही है काम
डॉ. कमलेश चौहान बताते हैं कि, इसका पायलट प्रोजेक्ट हम लोगों ने तीन साल पहले किया था, लेकिन जो मुख्य एप्लीकेशन काशी प्लस को बनाने में कई डिजाइनर्स, टेक्निकल डेवलपर्स की मदद ली गई है. लगभग एक साल से अधिक का समय इसे बनाने में लग गया है. इसके साथ ही, इसमें और भी बदलाव की प्रक्रिया की जा रही है. एआई की भी मदद ली जा रही है. इसमें जो चैट सपोर्ट है, उसे हम अभी मैनुअल कर रहे हैं. आने वाले दो से तीन महीनों में हमारा एआई चैट बोट बन जाएगा, जोकि चैट सपोर्ट में खुद से ही सभी जानकारियां दे दिया करेगा. इस समय हम लोगों की 18 से 20 लोगों की टीम लगी है.
एप्लीकेशन से जोड़े जाएंगे लखनऊ के तीन बड़े अस्पताल
वहीं काशी+ एप की सह-संस्थापक बीएएमएस, एमडी (आयुर्वेद), बीएचयू की डॉ. शिवानी डोगरा ने बताया कि, "आगे की हमारी योजना लखनऊ के तीन बड़े अस्पतालों को इसमें जोड़ने की है. एसजीपीजीआई, केजीएमयू और राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भी इसको लगाया जाएगा. पहले के एप्लीकेशन से लगभग 3 लाख से अधिक मरीजों ने लाभ लिया था. अभी जो नया एप्लीकेशन बना है. इसके 10,000 डाउनलोड्स हैं. इससे रोजाना लगभग 200 से 300 मरीज इसके माध्यम से आ जा रहे हैं. इस एप्लीकेशन को डाउनलोड करने के लिए गूगल प्ले स्टोर पर काशी प्लस सर्च करना होगा. साथ ही, यह आईओएस एप स्टोर पर भी उपलब्ध है.
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