मां ने गेम खेलने के लिए नहीं दिया मोबाइल फोन, 14 साल के बच्चे ने नाराज होकर की आत्महत्या
मृतक बच्चे के पिता ने अन्य अभिभावकों से की भावुक अपील, डीसी कांगड़ा हेमराज बैरवा ने भी जताई चिंता.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 20, 2026 at 3:05 PM IST
|Updated : August 20, 2026 at 3:38 PM IST
धर्मशाला: स्मार्ट फोन और इंटरनेट के दौर में अक्सर ये देखा गया है कि लोग मोबाइल फोन के एडिक्ट हो जाते हैं. खासकर बच्चे इसके सबसे ज्यादा शिकार होते हैं. जो बच्चे छोटी उम्र से ही मोबाइल का ज्यादा यूज करते हैं, अक्सर मोबाइल न मिलने पर उनके व्यवहार में चेंज देखा जाता है. हिमाचल प्रदेश में भी एक बच्चे ने फोन न मिलने पर खौफनाक कदम उठाया है. धर्मशाला के खनियारा क्षेत्र में मोबाइल पर गेम खेलने को लेकर एक दर्दनाक घटना सामने आई है. यहां मोबाइल फोन न मिलने से नाराज एक 14 साल के बच्चे ने आत्महत्या कर ली है.
मां के मोबाइल न देने पर हुआ नाराज
मृतक बच्चे के पिता ने बताया कि बेटा लगातार अपनी मां से मोबाइल फोन मांग रहा था, ताकि वह गेम खेल सके, लेकिन जब उसकी मां ने उसे मोबाइल नहीं दिया तो वो नाराज होकर अपने कमरे में चला गया. उनका कहना है कि परिवार ने ये कल्पना भी नहीं कि थी अपनी नाराजगी में उनका बेटा इतना बड़ा कदम उठा लेगा. उन्होंने बताया कि जब उनकी बेटी घर पहुंची और खाना लेने के लिए रसोई की ओर गई तो उसने अपने भाई को अचेत हालत में पाया. जिसके बाद परिजनों ने फौरन उसे अस्पताल पहुंचाया. जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया.
अन्य अभिभावकों से भावुक अपील
वहीं, मृतक के पिता ने इस दुखद घटना के बाद अन्य अभिभावकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि उनका बेटा तो चला गया, लेकिन किसी और का बच्चा ऐसी घटना का शिकार न हो. उन्होंने अन्य माता-पिता से बच्चों को मोबाइल फोन और गेमिंग की लत से दूर रखने का आग्रह किया. उन्होंने स्कूलों से भी अपील की है कि बच्चों को पढ़ाई और होमवर्क के नाम पर लगातार मोबाइल पर निर्भर न बनाया जाए. उन्होंने कहा कि बच्चों को मोबाइल से दूर रखकर उन्हें खेलकूद और अन्य गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.
मोबाइल फोन पर बढ़ रही निर्भरता
डीसी कांगड़ा हेमराज बैरवा ने कहा कि आजकल छोटे बच्चों में मोबाइल फोन का चलन तेजी से बढ़ रहा है और बच्चे सोशल मीडिया सहित विभिन्न ऑनलाइन गतिविधियों का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कई देशों में बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल को लेकर प्रतिबंध और नियंत्रण की व्यवस्था की गई है. पहले बच्चों के खेलने के लिए घरों के आसपास मैदान और खुले स्थान होते थे. माता-पिता बच्चों को बाहर खेलने के लिए भेजते थे, जिससे वे शारीरिक रूप से स्वस्थ भी रहते थे, लेकिन बदलते समय के साथ ये गतिविधियां कम होती जा रही हैं. ऐसे में बच्चों ने मोबाइल फोन को ही मनोरंजन और खेल का साधन बना लिया है.
"इस समस्या से निपटने के लिए समाज को सबसे पहले अपनी सोच और प्रवृत्ति में बदलाव लाना होगा. प्रशासन भी जागरूकता के लिए समाज के साथ मिलकर काम करने को तैयार है. बच्चों को मोबाइल की बढ़ती निर्भरता से बचाने के लिए अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के सभी वर्गों को मिलकर जागरूकता फैलानी होगी." - हेमराज बैरवा, डीसी कांगड़ा

