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धनबाद के जीव वैज्ञानिक डॉ तापस चटर्जी का दुनिया में बज रहा डंका, उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त

धनबाद के जीव वैज्ञानिक डॉ तापस चटर्जी का डंका पूरी दुनिया में बज रहा है. इन्होंने सूक्ष्म जीवों पर कई शोध किए हैं.

Dr Tapas Chatterjee
जीव वैज्ञानिक डॉ तापस चटर्जी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : February 19, 2026 at 5:34 PM IST

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धनबाद: झारखंड के धनबाद के प्रतिष्ठित जीव वैज्ञानिक डॉ. तापस चटर्जी ने सूक्ष्म जलीय जीवों पर अपने शोध से न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है. उनके शोध ने समुद्री और मीठे पानी के सूक्ष्म जीवों की दुनिया में कई नई जानकारियां दी हैं. जल्द ही इनका 200 वां शोध पत्र जारी होने वाला है.

गोल्ड मेडल से डीएससी तक का सफर

डॉ. तापस चटर्जी की शैक्षणिक यात्रा बेहद प्रेरणादायक रही है. उन्होंने वर्ष 1985 में भुवनेश्वर के रीजनल कॉलेज ऑफ एजुकेशन (एनसीईआरटी) से जीवन विज्ञान में एम.एससी. की डिग्री प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान और गोल्ड मेडल के साथ प्राप्त की. इसके बाद उनका पूरा ध्यान शोध पर केंद्रित हो गया. वर्ष 1992 में उन्होंने उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर से प्राणीशास्त्र (जूलॉजी) में पीएच.डी. की उपाधि हासिल की. शोध में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2014 में इसी विश्वविद्यालय से प्राणीशास्त्र में डॉक्टर ऑफ साइंस (डी.एससी.) की सर्वोच्च डिग्री प्राप्त की, जो किसी भी विश्वविद्यालय की सबसे ऊंची शैक्षणिक उपलब्धि मानी जाती है.

जीव वैज्ञानिक डॉ तापस चटर्जी से बात करते संवाददाता नरेंद्र निषाद (ETV Bharat)

उन्होंने यूजीसी-नेट परीक्षा भी उत्तीर्ण की. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने दक्षिण कोरिया के दाएगू विश्वविद्यालय में पोस्ट-डॉक्टोरल (विजिटिंग रिसर्चर) और ब्रुनेई दारुस्सलाम विश्वविद्यालय में विजिटिंग साइंटिस्ट के रूप में कार्य किया.

140 नई प्रजातियां और 4 नए जीनस की खोज

डॉ. चटर्जी ने अब तक 140 से अधिक नई सूक्ष्म जलीय प्रजातियों (न्यू स्पीशीज) की खोज की है. इनमें से तीन प्रजातियों का नाम भारत के सम्मान में रखा गया है, जो देश के लिए गौरव की बात है. वहीं, दो प्रजातियों का नाम विदेशी वैज्ञानिकों ने उनके सम्मान में डॉ. तापस चटर्जी के नाम पर रखा है. यह किसी वैज्ञानिक के लिए असाधारण उपलब्धि है.

Dr Tapas Chatterjee
जीव वैज्ञानिक डॉ तापस चटर्जी (ETV Bharat)

तापस चटर्जी ने चार नए जीनस (न्यू जेनेरा) की खोज में प्रत्यक्ष योगदान दिया है, जो मुख्य रूप से समुद्री क्रस्टेशियन (Crustacea) समूह से संबंधित हैं. ये खोज हिंद महासागर, प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर सहित विभिन्न महासागरों की जैव विविधता अध्ययन में महत्वपूर्ण हैं. उनके शोध 30 से अधिक देशों के नमूनों पर आधारित हैं. अब तक उनके 199 शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं, जिनमें यूरोप, एशिया, अमेरिका आदि के जर्नल शामिल हैं. अब डॉ चटर्जी का 200 वां शोध पत्र जल्द ही आने वाला है.

Dr Tapas Chatterjee
जीव वैज्ञानिक डॉ तापस चटर्जी (ETV Bharat)

वैश्विक सहयोग और मान्यता

डॉ. चटर्जी का लगभग 50 विदेशी वैज्ञानिकों के साथ सहयोग है, जो एशिया, यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया तक फैला हुआ है. वे कई देशों की यात्रा कर चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने निष्कर्ष प्रस्तुत किए हैं. उनकी विशेषज्ञता हैलाकारिड माइट्स (Halacaridae), सिलिएट एपिबायोंट्स (Ciliate epibionts), क्लैडोसेरा, मेयोफॉना आदि सूक्ष्म जलीय जीवों के वर्गीकरण में है.

धनबाद के इस वैज्ञानिक की मेहनत, प्रतिभा और समर्पण ने उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है. उनके कार्य न केवल विज्ञान जगत को समृद्ध कर रहे हैं, बल्कि युवा शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणा स्रोत भी बने हुए हैं.

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