CYBER CRIME 2025: दुनिया में तेजी से बढ़ा साइबर फ्रॉड, दिल्ली में भी करोड़ों की ठगी, जानें इस साल की बड़ी घटनाएं
साइबर अपराधों पर लगाम और बड़े एक्शन के लिए ये साल याद किया जाएगा.

Published : December 28, 2025 at 6:33 AM IST
|Updated : December 28, 2025 at 6:46 AM IST
नई दिल्लीः साल 2025 अंतिम क्षणों की ओर बढ़ रहा है. ये साल भारत के लिए नई ऊंचाइयों, तरक्की और कामयाबी के लिए याद किया जाएगा तो वहीं कई क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं और मामले सामने आए जिन्होंने देश के लिए चिंताजनक हालात बनाए. ऐसे ही मामले साइबर फ्रॉड से जुड़े है जो दुनिया भर के लिए इस वक्त चुनौती बने हुए हैं. देश की राजधानी दिल्ली में साल भर में ऐसे कई साइबर अपराध के मामले सामने आए जिन्होंने साइबर पुलिस, विभाग और एक्सपर्ट्स की नींदें उड़ा दी.
राजधानी दिल्ली में साइबर अपराध का स्तर अब तक के रिकॉर्ड पर पहुंच गया. सालभर में राजधानी में डिजिटल अरेस्ट, अंतरराष्ट्रीय ठगी, निवेश व ट्रेडिंग ऐप घोटाले, मनी ट्रेल, फिशिंग फैक्ट्री, क्रिप्टो लॉन्ड्रिंग व कॉल सेंटर लोन स्कैम जैसी घटनाओं ने लोगों को झकझोर दिया. इन मामलों में करोड़ों रुपये की ठगी, लाखों फर्जी लेनदेन व अंतरराज्यीय-संघीय नेटवर्क का खुलासा भी हुआ. पुलिस व सीबीआई ने 48 घंटे के मेगा ऑपरेशन, सात राज्यों में छापेमारी व फिशिंग फैक्ट्री बंद करने जैसी कार्रवाई की गई, जिसमें सैकड़ों अपराधियों को गिरफ्तार किया गया. लाखों डेटा व डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए. इन घटनाओं ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि डिजिटल सुरक्षा, सतर्कता व समय पर रिपोर्टिंग ही सबसे बड़ा बचाव है. राजधानी दिल्ली में बढ़ते साइबर अपराध के खतरे के बीच, हेल्पलाइन 1930 व सावधानियों का पालन हर नागरिक के लिए अनिवार्य हो गया है.
राजधानी दिल्ली में साइबर अपराध के 10 बड़े मामले
1. डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 23 करोड़ की ठगी
राजधानी दिल्ली में डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड का अब तक का सबसे बड़ा मामला सामने आया, जिसमें दक्षिण दिल्ली के रहने वाले 78 वर्षीय रिटायर्ड बैंक अधिकारी नरेश मल्होत्रा से साइबर ठगों ने करीब 23 करोड़ रुपये की ठगी कर ली. ठगों ने खुद को मुंबई पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर फोन किया. इसके बाद दावा किया कि पीड़ित का आधार नंबर पुलवामा आतंकी हमले से जुड़ी टेरर फंडिंग में इस्तेमाल हुआ है. डर पैदा करने के लिए उन्हें बताया गया कि वह जांच के दायरे में हैं, एक महीने तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रहना होगा. इस दौरान ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए उनकी गतिविधियों पर नजर रखने का नाटक भी किया और किसी से बात न करने की चेतावनी भी दी. लगातार मानसिक दबाव में आकर पीड़ित ने अलग-अलग खातों से करीब 22.92 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए. हालांकि बाद में सच्चाई सामने आने पर 19 सितंबर दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट द्वारा की जा रही है.

2. ऑपरेशन ‘साइबर हॉक’: 1000 करोड़ के साइबर नेटवर्क पर प्रहार, 700 गिरफ्तार
नवंबर 2025 में दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ 48 घंटे का मेगा अभियान ऑपरेशन साइबर हॉक’ चलाकर बड़े स्तर पर कार्रवाई की. इस दौरान 700 से अधिक साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया. इस आपरेशन से 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा के अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा हुआ. पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, ऑनलाइन ट्रेडिंग, कॉल सेंटर फ्रॉड व म्यूल बैंक खातों के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बना रहे थे. अभियान के दौरान पुलिस ने हजारों मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड व फर्जी दस्तावेज जब्त किए. इस आपरेशन में कई राज्यों व विदेशों से जुड़े लिंक भी उजागर हुए. दिल्ली पुलिस के मुताबिक यह ऑपरेशन अब तक की सबसे बड़ी साइबर कार्रवाई में से एक है, जिसका मकसद संगठित साइबर ठगी नेटवर्क की कमर तोड़ना व लोगों को डिजिटल अपराधों से सुरक्षित करना था.


4. फर्जी ट्रेडिंग APP, फर्जी Whatsapp और TELEGRAM Group से ठगी
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सोशल मीडिया के जरिए संचालित होने वाले एक शातिर गिरोह का भी भंडाफोड़ किया है. यह गिरोह 'VIP स्टॉक ग्रुप' जैसे आकर्षक नामों से व्हाट्सएप व टेलीग्राम पर फर्जी ग्रुप चलाता था. जालसाजी का यह गिरोह पीड़ितों को कम समय में शेयर बाजार से मोटा मुनाफा कमाने का लालच देते थे. इसके लिए ठगों ने बाकायदा फर्जी ट्रेडिंग ऐप तैयार किए थे, जो दिखने में असली लगते थे. निवेशकों को ऐप पर फर्जी प्रॉफिट दिखाते थे, लेकिन जब वे पैसा निकालने की कोशिश करते, तो उन्हें और अधिक टैक्स व फीस के नाम पर ठगा जाता था. इस गिरोह ने अब तक निवेश के नाम पर लोगों से 24 करोड़ रुपये की ठगी की.

“दिल्ली में वर्ष 2025 में सामने आई साइबर अपराध की घटनाओं ने साफ कर दिया है कि डिजिटल दुनिया में कोई भी नागरिक सुरक्षित नहीं है. डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश ऐप, क्रिप्टो लॉन्ड्रिंग व कॉल सेंटर लोन स्कैम जैसी घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि तकनीक का गलत इस्तेमाल कितना विनाशकारी हो सकता है. नागरिकों को यह समझना होगा कि पुलिस या जांच एजेंसियां कभी वीडियो कॉल या अनजान संदेश के जरिए गिरफ्तारी नहीं करती हैं. ऐसे में सतर्क रहना, अनजान लिंक या ऐप से बचना व हेल्पलाइन 1930 पर समय रहते शिकायत दर्ज करना बेहद आवश्यक है. इसके साथ ही, पासवर्ड बदलना, टू स्टेप वेरीफिकेशन का इस्तेमाल व केवल भरोसेमंद प्लेटफॉर्म पर लेनदेन करना सुरक्षा को मजबूत बनाता है. ये मामले केवल चेतावनी नहीं, बल्कि डिजिटल सुरक्षा में जागरूकता का सबक भी हैं.”- वेद भूषण, पूर्व एसीपी दिल्ली पुलिस
5. ऑपरेशन 'साइ Hawk' के तहत 42 साइबर ठग गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने ऑपरेशन 'साइ Hawk' के तहत एक अंतरराज्यीय साइबर सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए 42 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया गया. जांच के दौरान डायनामिक ड्रीम्स नामक एक फर्जी कंपनी का नाम सामने आया, जिसके जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर किया जाता था. पुलिस ने इन अपराधियों के खातों में 254 करोड़ रुपये की बड़ी 'मनी ट्रेल' (लेनदेन) का पता लगाया. यह गिरोह देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय था. गिरोह फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोलकर अवैध धन की लॉन्ड्रिंग कर रहा था. पुलिस अब इस सिंडिकेट के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों व अन्य सहयोगी संस्थाओं की गहनता से जांच कर रही है.

6. सीबीआई का 'फिशिंग फैक्ट्री' पर छापा
सीबीआई ने दिल्ली-एनसीआर में तकनीकी रूप से बेहद उन्नत फिशिंग फैक्ट्री पर छापेमारी कर बड़ा खुलासा किया. यह गैंग आधुनिक 'SIM-Box' तकनीक का इस्तेमाल कर रहा था. इससे एक साथ हजारों लोगों को फ्रॉड मैसेज भेजे जा सकते थे. पुलिस जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने वर्ष 2020 से 2025 के बीच पहचान छुपाकर 20,000 से अधिक अवैध सिम कार्ड हासिल किए थे. इन सिम कार्डों का उपयोग बैंक अधिकारी या सरकारी कर्मचारी बनकर लोगों को फिशिंग लिंक भेजने व उनके खातों को खाली करने में किया जाता था. इस गिरोह के पकड़े जाने से साइबर अपराध के एक बड़े बुनियादी ढांचे को ध्वस्त कर दिया गया है.
7. दिल्ली का बीटेक स्टूडेंट ठगी कर क्रिप्टोकरेंसी में बदलता था कोहरा, 77 करोड़ की हेराफेरी का मामला
साइबर अपराध की दुनिया में तकनीक के गलत इस्तेमाल का एक बड़ा उदाहरण तब सामने आया जब पुलिस ने ठगों को गिरफ्तार किया. इस गैंग में एक बीटेक छात्र भी शामिल था, जो अपनी तकनीकी जानकारी का उपयोग कर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने में कर रहा था. यह गिरोह लोगों से ठगे गए रुपयों को तुरंत क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में बदल देता था, जिससे पुलिस की पहुंच से बाहर होकर पैसा विदेश भेजा जा सके. करीब 77 करोड़ रुपये की इस हेराफेरी में शामिल अपराधी डिजिटल वॉलेट्स का उपयोग कर रहे थे. क्रिप्टोकरेंसी के जरिए से मनी लॉन्ड्रिंग का यह जाल सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा था.

8. संगमविहार में 'फैमिली बिजनेस' लोन स्कैम का पर्दाफाश
दक्षिण दिल्ली के संगम विहार में अपराध का एक अनोखा व चौंकाने वाला मामला सामने आया, जहां एक पिता और उसके बच्चे मिलकर एक अवैध कॉल सेंटर चला रहे थे. यह पारिवारिक गिरोह सोशल मीडिया पर बेहद कम ब्याज दर पर पर्सनल लोन देने के विज्ञापन चलाता था. जब कोई जरूरतमंद इनसे संपर्क करता था तो ये लोग फाइल प्रोसेसिंग, जीएसटी व स्टाम्प ड्यूटी जैसे विभिन्न शुल्कों के नाम पर एडवांस पैसे ऐंठ लेते थे. एक बार पैसे मिल जाने के बाद आरोपी अपने फोन बंद कर लेते थे. दिल्ली पुलिस ने इस कॉल सेंटर को ध्वस्त कर कई मोबाइल फोन व डेटा बरामद किया, जिससे सैकड़ों पीड़ितों की जानकारी मिली है.

9. म्यूल अकाउंट से ठगी, पांच दिन में 5.24 करोड़ के 10,400 से अधिक ट्रांजेक्शन
द्वारका के एक होटल से संचालित हो रहे एक हाई-टेक गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया. इस गिरोह ने पुलिस की कार्यक्षमता को भी हैरान कर दिया. इस गिरोह ने महज 5 दिनों के भीतर 5.24 करोड़ के 10,400 से अधिक ट्रांजेक्शन किए थे. अपराध के इस स्तर को अंजाम देने के लिए वे म्यूल अकाउंट्स (किराए के बैंक खातों) का प्रयोग कर रहे थे, जो गरीब व अनजान लोगों से मामूली रकम देकर लिए जाते थे. यह गिरोह न सिर्फ अंतरराज्यीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय संपर्कों के माध्यम से भी जुड़ा था. इनके पास से दर्जनों एटीएम कार्ड, चेकबुक व सिम कार्ड बरामद हुए हैं, जो इनके विशाल नेटवर्क का प्रमाण हैं.


भारत सरकार के साइबर सुरक्षा कदम
| संस्था | भूमिका |
| CERT-In | राष्ट्रीय स्तर पर साइबर घटनाओं का जवाब |
| NCSC | अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल |
| NCCC | देश के साइबर स्पेस की निगरानी |
| I4C | साइबर अपराधों से निपटना |
| NCIIPC | क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा |
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