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जिम में मौत, डीजे पर डांस करते-करते मौत... कोरोना के बाद भरी जवानी में अचानक क्यों थम रहीं सांसें?

Etv Bharat Explainer: सबसे ज्यादा लोगों ने बुधवार-गुरुवार को दम तोड़ा, पढ़िए- दिल्ली AIIMS की चौंकाने वाली रिसर्च.

दिल्ली एम्स की रिसर्च में कई अहम जानकारियों से उठा पर्दा.
दिल्ली एम्स की रिसर्च में कई अहम जानकारियों से उठा पर्दा. (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : January 7, 2026 at 10:22 AM IST

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हैदराबाद: महाराष्ट्र के पालघर में स्पोर्ट्स इवेंट के दौरान 10वीं की स्टूडेंट रोशनी गिरी और फिर कभी नहीं उठ पाई, इसी तरह यूपी के लखनऊ में छठवीं क्लास के बच्चे अमेय की एग्जाम देते-देते मौत हो गई, फरीदाबाद में तो 23 साल के देवकी नंदन ने डीजे पर नाचते समय अचानक ही दम तोड़ दिया...

हाल के दिनों में चलते-फिरते, उठते-बैठते, जिम में एक्सरसाइज करते हुईं ऐसी कई मौतों ने हम सभी को झकझोरा, खासकर कोरोना महामारी के बाद के सालों में. कभी किसी केस में कोई वजह पता चली तो कई मामलों में कुछ भी स्पष्ट नहीं हो सका, लेकिन इस तरह अचानक हो रही मौतों पर अब एम्स दिल्ली की एक ताजा रिपोर्ट में काफी कुछ चौंकाने वाले फैक्ट्स निकलकर आए हैं.

एम्स ने अपनी ही जैसी सुपर स्पेशियलिटी वाले अन्य मेडिकल संस्थानों के साथ मिलकर तकरीबन साल भर तक यह रिसर्च की. शोध में हेल्थ के 13 एक्सपर्ट विभाग और करीब-करीब 30 विशेषज्ञ डॉक्टर्स शामिल रहे. क्या सडन डेथ्स (अचानक मौतें) के पीछे कोरोना जिम्मेदार है?, क्या कोरोना वैक्सीन जान ले रही?.

मरने वालों में जवान ज्यादा या बुजुर्ग, महिला या पुरुष? क्या मौसम, दिन विशेष, सामाजिक-आर्थिक हालात, बीमारियों और नशे की लत का भी इससे कोई लेना-देना है? आगे आप को ऐसे सारे सवालों के जवाब पढ़ने को मिलेंगे, कुछ ग्राफिक्स के जरिए, कुछ टेक्स्ट के रूप में...

इस रिसर्च का मुख्य मकसद लोगों की एकाएक दम तोड़ने की घटनाओं का एनालिसिस, कारण और रिस्क फैक्टर्स का पता लगाना रहा. क्योंकि 45 साल से कम उम्र के और सेहतमंद दिखने वाले युवाओं की अचानक मौतें एक गंभीर समस्या बनकर उभर रहीं हैं.

सबसे पहले जानिए क्या होती है सडन डेथ : अचानक मौत (SD) को ऐसे समझा जाता है कि जब लक्षण दिखने के एक घंटे के अंदर व्यक्ति की मौत हो जाए, ऐसे हादसों में आसपास अन्य लोगों की मौजूदगी होती है, मसलन कहीं किसी पब्लिक कार्यक्रम में भाग लेते समय, खेलकूद-जिम या डांस करते समय किसी की मौत हो जाना. अचानक मौतों की दूसरी कैटेगरी है जब व्यक्ति की मौत से 24 घंटे पहले उसे आखिरी बार जिंदा देखा गया. यानी दम निकलने के वक्त उसके आसपास कोई और नहीं था.

टीम ने एक साल तक किया गहन शोध.
टीम ने एक साल तक किया गहन शोध. (Graphics credit; ETV Bharat)

क्या महिलाओं पर बेअसर रही सडन डेथ : एम्स की रिसर्च तो यही कहती है. 162 केस स्टडी में सिर्फ 21 महिलाएं ही सडन डेथ की शिकार हुईं. परसेंटेज में बात करें तो यह महज 14.7 फीसदी बनता है. 21 में से 17 महिलाएं यंग ऐज की रहीं यानी कि 45 साल या उससे कम. 46-65 ऐज ग्रुप की केवल 4 महिलाओं ने एक झटके में जान गंवाई. पुरुषों के मामले में अचानक मौतों का यही नंबर और प्रतिशत क्रमवार 141 व 85.3 रहा है.

क्या कम उम्र के लोगों के लिए अधिक खतरा : जी हां, अचानक मौत मरने वाले कुल 180 लोगों में से 103 ऐसे थे, जिनकी उम्र 45 वर्ष या उससे कम थी. 77 लोग 46 से 65 साल के बीच के थे. इस लिहाज से युवाओं और बुजुर्गों का प्रतिशत क्रमशः 57.2 और 42.8 रहा.

कम उम्र में हुई कई युवाओं की मौत.
कम उम्र में हुई कई युवाओं की मौत. (Graphics credit; ETV Bharat)

मरने वाले क्या किसी खास राज्य या इलाके से थे? : एम्स के शोध के मुताबिक लगभग 71.6 फीसदी यानी कि 116 लोग दिल्ली और एनसीआर(राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) के रहने वाले थे. बाकी मामले पड़ोसी राज्यों हरियाणा, पंजाब से संबंधित थे.

उनके सोशियो-इकोनॉमिक हालात कैसे थे? : असमय मौत वाले 130 व्यक्तियों (80.2%) की सामाजिक-आर्थिक स्थिति लोअर एंड मिडिल पाई गई. इनके रोजगार की बात की जाए तो करीब 48 स्किल्ड कामकाजी थे जबकि इतने ही अकुशल कामगार थे. 33 लोग प्रोफेशनल जॉब कर रहे थे, वहीं बेरोजगारों की संख्या भी इतनी ही रही.

क्या स्मोकिंग करने व शराब पीने वाले ज्यादा चपेट में आए? : रिसर्च बताती है कि युवा अवस्था में अकाल मौत के कुल 94 मामलों में से 54 लोग किसी न किसी तरह का धूम्रपान कर रहे थे. इनमें 41 लोग (75.9 फीसदी) रेगुलर स्मोकर्स थे और 13 व्यक्ति (24.1 प्रतिशत) यदा-कदा स्मोकिंग करते थे. मसलन हफ्ते में 3 सिगरेट से कम.

बुजुर्गों में स्मोकिंग का प्रतिशत युवाओं से ज्यादा पाया गया. ज्यादा उम्र के कुल 68 मामलों में से 45 लोगों(66.2%) को स्मोकिंग की लत थी, इनमें से 38 व्यक्ति(84.4) नियमित जबकि 7 लोग(15.6%) कभी-कभार ही बीड़ी-सिगरेट पीते थे.

सडन डेथ के शिकार कई लोग शराब पीने के आदी थे.
सडन डेथ के शिकार कई लोग शराब पीने के आदी थे. (Graphics credit; ETV Bharat)

क्या विशेष मौसम, दिन और घड़ी में अधिक मौतें हुईं? : रिपोर्ट की फाइंडिंग्स से आप खुद ही निष्कर्ष निकाल सकते हैं. अचानक मौतों की घटनाएं वैसे तो हर मौसम में घटीं, लेकिन अगस्त से अक्टूबर (शरद ऋतु) में सबसे ज्यादा 52 जानें गईं. ठंड के मौसम (नवंबर-जनवरी) में 45 लोगों ने दम तोड़ा. इसी प्रकार से गर्मी के सीजन(मई-जुलाई) में 34 और वसंत ऋतु (फरवरी-अप्रैल) में 31 मौतें सामने आईं. सडन डेथ के ज्यादातर हादसे बुधवार और गुरुवार को रिपोर्ट किए गए.

दिल्ली एम्स की रिपोर्ट में सामने आईं चौंकाने वाली जानकारियां.
दिल्ली एम्स की रिपोर्ट में सामने आईं चौंकाने वाली जानकारियां. (Graphics credit; ETV Bharat)

क्या कोरोना की वजह से ऐसी मौतें बढ़ीं? : कोविड हिस्ट्री देखी जाए तो रिपोर्ट में कहा गया है कि 4 युवा और 6 बुजुर्ग कोरोना महामारी के दौरान संक्रमित हो चुके थे. कम उम्र में अचानक मौतों के 94 मामलों में से 77 युवाओं (82.8%) जबकि बुजुर्गों के 64 केसों में से 56 यानी 87.5 फीसदी को कोविड का टीका लगा हुआ था.

क्या मरने वालों को बीमारियां पहले से ही थीं? : रिसर्च इस ओर इशारा करती है कि यंग और ओल्ड, दोनों आयु वर्ग के लोगों में पहले से ही डायबिटीज, हाइपरटेंशन, अस्थमा टीबी, मिर्गी जैसे कुछ न कुछ हेल्थ इश्यूज थे. हालांकि ऐसे स्वास्थ्य समस्याएं बुजुर्गों की तुलना में युवाओं में कम पाई गई थीं.

रिपोर्ट में कई लक्षणों की ओर इशारा किया गया है.
रिपोर्ट में कई लक्षणों की ओर इशारा किया गया है. (Graphics credit; ETV Bharat)

शोध में क्या निकलकर आई अचानक डेथ की वजह? : रिसर्च में युवाओं की अचानक मौतों का सबसे बड़ा कारण कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) निकलकर सामने आया. इस बीमारी में हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियां किन्ही वजहों से संकरी हो जाती हैं. वहीं 46 से 65 साल की कैटेगरी में आने वाले लोगों की भी मौत की वजह यही बना. ज्यादातर लोगों की मौत हार्ट अटैक से होना पाया गया.

एम्स (ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, नई दिल्ली) के फोरेंसिक मेडिसिन और डिपार्टमेंट ऑफ पैथोलॉजी में मई 2023 से अप्रैल 2024 तक यह रिसर्च की गई. इस उद्देश्य से ताकि अचानक मौतों के कारण-निवारण को लेकर भविष्य में मेडिकल संसाधन मजबूत किए जाएं.

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने इस पूरे प्रोजेक्ट को फंडिंग की. जहर खाने से मौत, सुसाइड या एक्सीडेंट में जान गंवाने वाले मामलों को स्टडी में नहीं शामिल किया गया. इस रिसर्च रिपोर्ट को दिसंबर में सार्वजनिक किया गया.

कार्डिएक अरेस्ट के मामले क्यों बढ़ रहे?: वर्तमान में लोगों के रहन-सहन, खान-पान और दिनचर्या भी ठीक नहीं है. इसके कारण पहले की तुलना में कार्डिएक अरेस्ट के मामले बढ़ गए हैं. मौजूदा समय में लोगों को यह भी जानना जरूरी है कि कार्डिएक अरेस्ट और हार्ट अटैक में क्या अंतर होता है. ऐसी स्थिति में शुरुआती पलों में क्या किया जा सकता है?.

जिसे कार्डिएक अरेस्ट आया हो उसके पास बहुत कम समय होता है. यूपी के लखनऊ केजीएमयू के हार्ट विशेषज्ञ प्रो. ऋषि सेठी के अनुसार ऐसे समय में यदि मरीज को तत्काल कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) दे दें तो उसके दिल की धड़कन दोबारा चल सकती है. सीपीआर का तरीका सही होना चाहिए. जोर-जोर से दिया जाना चाहिए. बहुत से लोग धीमे-धीमे (कम प्रेशर) से सीपीआर देते हैं. इससे मरीज की जान को बचाना मुश्किल हो जाता है.

हार्ट अटैक होने पर क्या करें? : वहीं, हार्ट अटैक की स्थिति में माइनर अटैक होने पर मरीज को अस्पताल तक ले जाने का समय होता है. हर व्यक्ति को अपने घर में डिस्प्रिन की टेबलेट रखनी चाहिए. यह दवा रक्त के थक्के को जमने से रोकती है. जिसे हार्ट अटैक पड़ा हो उसे आधी गोली पानी के साथ जबकि आधी चबाकर खाने के लिए उसके मुंह में डाल देनी चाहिए. इससे समय रहते मरीज को अस्पताल पहुंचाने का समय मिल जाता है.

हार्ट अटैक के क्या हैं लक्षण? : डॉ. ऋषि सेठी के अनुसार अचानक हार्ट अटैक के लक्षणों में थकान, सांस लेने में तकलीफ, बेहोशी, चक्कर आना या हल्कापन, दिल की धड़कन तेज होना या सीने में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं. ऐसा हार्ट अटैक आने के एक सप्ताह पहले ही हो सकता है. ऐसे लक्षण दिखने पर चिकित्सक को दिखाना जरूरी होता है.

कार्डिएक अरेस्ट के क्या हैं लक्षण : कार्डिएक अरेस्ट में मरीज की धड़कन अचानक से बंद हो जाती है. इसमें तुरंत लक्षण नहीं आते हैं. ऐसे स्थिति में लोगों को शरीर में हो रहे बदलाव को पहचानना होगा. शरीर पहले से लक्षण दिखाता है लेकिन, व्यक्ति समझ नहीं पाते हैं. उन्हें लगता है कि अगर अधिक पसीना आ रहा है तो इसमें समस्या नहीं. यहीं पर चूक हो जाती है.

क्यों होता है कार्डिएक अरेस्ट : विशेषज्ञ के अनुसार हार्ट फेलियर के कारण कार्डिएक अरेस्ट हो सकता है. हार्ट फेलियर की जटिलता कार्डिएक अरेस्ट है. यह तब होता है जब हृदय की रक्त को प्रभावी ढंग से पंप करने की क्षमता बहुत बुरी तरह से प्रभावित हो जाती है. स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, धूमपान से दूर रहकर और वजन को नियंत्रित कर इससे बचा जा सकता है.

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