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तन्वी की मौत की जांच करेगी हाई लेवल कमेटी, दिल्ली AIIMS ने गठित की समिति

एम्स ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2017 से ही मरीज की जटिल स्थिति के कारण शल्य चिकित्सा संभव नहीं थी.

दिल्ली AIIMS
दिल्ली AIIMS ((फाइल फोटो))
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By ETV Bharat Delhi Team

Published : September 2, 2026 at 9:14 PM IST

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नई दिल्ली: देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली में ईलाज के लिए भर्ती मरीज तन्वी के निधन के मामले ने तूल पकड़ लिया है. मीडिया रिपोर्ट्स में उठाए गए विभिन्न मुद्दों और परिवार की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए एम्स प्रशासन ने एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है. यह समिति अस्पताल में इलाज के पूरे घटनाक्रम, क्लिनिकल रिकॉर्ड्स, जांच रिपोर्टों और इलाज के दौरान बरती गई प्रक्रियाओं की सूक्ष्मता से समीक्षा कर तथ्यों को सार्वजनिक करेगी.

एम्स द्वारा आधिकारिक बयान जारी

संस्थान की मीडिया सेल प्रभारी डॉ. रीमा दादा द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, मरीज तन्वी को जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Condition) था. सबसे पहले 10 अक्टूबर 2012 को उन्हें एम्स के कार्डियोलॉजी ओपीडी में दिखाया गया था, जहां उनकी जांच में 'वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफैक्ट' के साथ 'पल्मोनरी एट्रेशिया' जैसी बेहद जटिल जन्मजात हृदय संबंधी बीमारी की पुष्टि हुई थी. इस गंभीर बीमारी में हृदय से फेफड़ों तक रक्त ले जाने वाला सामान्य मार्ग या तो अनुपस्थित होता है या गंभीर रूप से बाधित रहता है.

एम्स द्वारा जारी आधिकारिक बयान
एम्स द्वारा जारी आधिकारिक बयान (AIIMS)

आरंभिक मूल्यांकन के बाद बच्ची को कार्डियक सर्जरी टीम के पास भेजा गया था, ताकि शल्य चिकित्सा की संभावनाओं का आकलन किया जा सके. वर्ष 2013 के दौरान तन्वी की सीटी एंजियोग्राफी, पारंपरिक एंजियोग्राफी और कार्डियक कैथीटेराइजेशन जैसी उन्नत नैदानिक प्रक्रियाओं के जरिए विस्तृत जांच की गई. इसका उद्देश्य हृदय की शारीरिक बनावट को पूरी तरह समझना और सर्जरी की संभावना तलाशना था.

कार्डियक सर्जरी संभव नहीं

जांच के बाद, 2017 में उपचार कर रही टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची कि मरीज की शारीरिक बनावट और स्थिति की अत्यधिक जटिलता को देखते हुए कार्डियक सर्जरी संभव नहीं है. परिवार को 'मेडिकल मैनेजमेंट' और नियमित फॉलो-अप की सलाह दी गई थी. परिवार को बीमारी के संभावित परिणामों और प्रबंधन के बारे में पूरी तरह अवगत कराया गया था. इसके बाद भी परिवार संस्थान के संपर्क में बना रहा और समय-समय पर अन्य विशेषज्ञों से भी राय ली गई.

एम्स के अनुसार, पिछले साल ही सीटीवीएस (कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी) विभाग के प्रमुख के साथ-साथ एक अन्य वरिष्ठ कार्डियोथोरेसिक सर्जन से भी दूसरी राय ली गई थी, और उन्होंने भी मेडिकल मैनेजमेंट जारी रखने की ही सलाह दी थी. इसके पश्चात, अगस्त 2026 में जब तन्वी की चिकित्सीय स्थिति बिगड़ी, तो उन्हें पुनः एम्स में लाया गया. 24 अगस्त को उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां उनकी स्थिति को देखते हुए 'हार्ट-लंग ट्रांसप्लांटेशन' (फेफड़ा-हृदय प्रत्यारोपण) की संभावनाओं पर भी व्यापक विचार किया जा रहा था.

कार्डियक अरेस्ट से मरीज की मौत

हालांकि, 1 सितंबर 2026 के शुरुआती घंटों में यानी लगभग तड़के 2:50 बजे अचानक मरीज को गंभीर थकान और कमजोरी महसूस हुई, जिसके बाद तीव्र सायनोसिस (शरीर नीला पड़ना) की स्थिति उत्पन्न हो गई और ऑक्सीजन का स्तर गिरकर लगभग 48 प्रतिशत तक पहुंच गया. तुरंत सुबह 3:30 बजे के करीब ऑक्सीजन सपोर्ट शुरू किया गया. इसके तुरंत बाद बच्ची को 'हाइपॉक्सीक स्पेल' का सामना करना पड़ा जिसके कारण कार्डियक अरेस्ट हो गया. उपचार कर रही चिकित्सा टीम द्वारा तुरंत और लगातार पुनर्जीवन के प्रयास किए गए, लेकिन मरीज को बचाया नहीं जा सका और सुबह 5:06 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.

वर्तमान में नियमों के तहत पोस्टमार्टम की प्रक्रिया इसके निष्कर्षों को संपूर्ण क्लिनिकल रिकॉर्ड्स और अन्य प्रासंगिक साक्ष्यों के साथ जांच समिति के समक्ष रखा जाएगा. एम्स प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गठित समिति सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच करेगी और रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी. संस्थान ने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए रोगी की सुरक्षा, पारदर्शिता, साक्ष्य-आधारित नैदानिक निर्णय और जवाबदेही के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है.

पिता ने लगाए गंभीर आरोप

बता दें कि राजस्थान के कोटा से ताल्लुक रखने वाली 15 वर्षीय किशोरी तन्वी ने मंगलवार सुबह एम्स परिसर में दम तोड़ दिया. मृतका के पिता मुकेश ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दिल की जटिल बीमारी से पीड़ित उनकी बेटी पिछले 13 वर्षों से सर्जरी की तारीखों के लिए एम्स के चक्कर काटती रही, लेकिन अस्पताल की टालमटोल नीति के कारण समय पर ऑपरेशन नहीं हो सका. इस अमानवीय देरी और लापरवाही के चलते अंततः उसकी जान चली गई. पिता मुकेश परि‍याणी का कहना है कि यदि समय रहते डॉक्टरों ने सर्जरी कर दी होती, तो आज उनकी बेटी जीवित होती.

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