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रक्षा मंत्री बोले, 'उच्च शिक्षित वर्ग में बढ़ती राष्ट्र-विरोधी प्रवृत्ति चिंताजनक' दिल्ली बम ब्लास्ट का दिया उदाहरण

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक कार्यक्रम में कहा कि 2030 तक भारत विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की क्षमता रखता है.

Defense Minister Rajnath Singh
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (ETV Bharat Udaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 2, 2026 at 5:39 PM IST

5 Min Read
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उदयपुर: देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को शहर के भूपाल नोबल्स यूनिवर्सिटी बीएन कॉलेज के 104वें स्थापना दिवस समारोह में शिरकत की. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि उच्च शिक्षित और प्रतिष्ठित पेशों से जुड़े लोगों का देश और समाज के खिलाफ गतिविधियों में संलिप्त पाया जाना अत्यंत चिंताजनक है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज शिक्षा को केवल डिग्री, नौकरी या पेशेवर सफलता तक सीमित कर दिया गया है, जबकि इसका मूल उद्देश्य व्यक्ति के भीतर संस्कार, चरित्र, नैतिकता, अनुशासन और देशभक्ति की भावना विकसित करना है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल उच्च शिक्षा प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है, यदि उसमें मानवीय मूल्य और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता का अभाव हो. उन्होंने कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक है कि कुछ पढ़े-लिखे और प्रतिष्ठित पेशों से जुड़े लोग भी देश और समाज के खिलाफ गतिविधियों में संलिप्त पाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि दिल्ली में हुए बम ब्लास्ट में गंभीर अपराध में शामिल लोगों में डॉक्टर जैसे शिक्षित पेशेवरों के नाम सामने आए. इससे यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा के साथ-साथ चरित्र निर्माण और नैतिक चेतना कितनी आवश्यक है.

शिक्षण संस्थानों में क्यों जाना पसंद करते हैं राजनाथ सिंह, देखें वीडियो (ETV Bharat Udaipur)

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'मेरे अंदर आज भी शिक्षक जिंदा': रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मैं भी एक शिक्षक रहा हूं. मेरे अंदर आज भी शिक्षक जिंदा है. इस दौरान मजाकिया अंदाज में रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारा राजनीति में आना तो महज एक संयोग रहा है. युवाओं को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने आत्म-सम्मान और अहंकार के बीच अंतर समझाया. उन्होंने कहा कि आत्म-सम्मान व्यक्ति को आत्म-विश्वास और दृढ़ता देता है, लेकिन जब यही भावना अहंकार में बदल जाती है, तो यह व्यक्ति और समाज दोनों के लिए नुकसानदायक हो जाती है. उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे बड़े सपने देखें, लेकिन विनम्रता, संयम और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ें.

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संबोधन के दौरान राजनाथ सिंह ने भारत की बदलती वैश्विक भूमिका पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि आज भारत पर दुनिया की नजर है और यह कोई नारा नहीं, बल्कि एक सच्चाई है. भारत आर्थिक, तकनीकी और सामरिक क्षेत्रों में तेजी से उभर रहा है और 2030 तक दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की पूरी क्षमता रखता है. उन्होंने कहा कि इस परिवर्तनकारी यात्रा में विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहीं से भविष्य के नेतृत्व और नवाचार का निर्माण होता है.

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रक्षा उत्पादन में देश आत्मनिर्भर: रक्षा मंत्री ने आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के सकारात्मक उपयोग पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि डिफेंस स्टार्टअप्स और स्वदेशी तकनीकी नवाचारों के माध्यम से भारत की रक्षा क्षमताएं लगातार मजबूत हो रही हैं और आने वाले समय में देश रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश सेवा केवल सेना या सुरक्षा बलों तक सीमित नहीं है. हर नागरिक अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर, ईमानदारी और निष्ठा के साथ कार्य करके राष्ट्र-निर्माण में योगदान दे सकता है. युवाओं को व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ समाज और राष्ट्र की प्रगति को भी प्राथमिकता देनी चाहिए.

सैनिक स्कूल की मांग पर दिया जवाब: राजनाथ सिंह ने सैनिक स्कूल की मांग को लेकर कहा कि बीएन संस्थान द्वारा संचालित दोनों स्कूलों के लिए निरीक्षण रिपोर्ट सकारात्मक आई है. हालांकि, रक्षा मंत्री ने किसी भी प्रकार का औपचारिक आश्वासन देने से साफ इनकार किया. उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन का सिद्धांत है कि वे बिना ठोस आधार के वादा नहीं करते. राजनाथ सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नेताओं के शब्दों और व्यवहार में अंतर के कारण ही देश में राजनीति और नेताओं के प्रति विश्वास का संकट पैदा हुआ है. उन्होंने कहा कि जनता से वही बात कही जानी चाहिए, जिसे पूरा किया जा सके.

विश्वराज सिंह मेवाड़ क्या कुछ बोले?: कार्यक्रम के दौरान मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य एवं विधायक विश्वराजसिंह मेवाड़ ने भी अपने संबोधन में बिना किसी का नाम लिए कहा कि देश और समाज के महापुरुषों के नाम का राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग नहीं होना चाहिए. उन्होंने ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता जताई, जो महापुरुषों के बारे में हल्के या गैर-जिम्मेदाराना बयान देते हैं.