Explainer: अबू धाबी की जेल में बंद हैं बिहार के 3 युवक, जानें कैसे पहुंचे ये सभी सलाखों के पीछे
बिहार के तीन युवकों के साथ ऐसा क्या हुआ था कि वह कई महीनों से अबू धाबी की जेल में बंद हैं. पढ़ें पूरी खबर

Published : February 11, 2026 at 7:44 PM IST
रिपोर्ट: जितेंद्र कुमार गुप्ता (बेतिया), अटल पांडेय (गोपालगंज), इमरोज अहमद (सिवान)
पटना: सुनहरे भविष्य का सपना आंखों में सजाए कई युवा विदेशों में कमाने जाते हैं और अपने सपनों को मूर्त रूप देते हैं. जब सपने पूरे होते हैं तो परिवार की किस्मत भी बदल जाती है, लेकिन जब वही सपने डरावनी सच्चाई का रूप ले ले तो परिजनों के आंखों में आंसू और डर झलकने लगता है. ऐसा ही कुछ बिहार के तीन युवकों के साथ हुआ है, जो पिछले कई महीनों से अबू धाबी की जेल में बंद हैं और अपनों से मिलने के लिए तड़प रहे हैं.
अबू धाबी जेल में बंद हैं बिहार के 3 युवक: सिवान के दीपक कुमार सिंह, गोपालगंज के रितेश ठाकुर और बेतिया के रवि कुमार पिछले कई महीनों से अबू धाबी के दुबई की जेल में बंद हैं. उनके परिजन मदद के लिए दर-दर की ठोकर खा रहे हैं और अपने बेटों की वतन वापसी की गुहार लगा रहे हैं. ऐसे में ईटीवी भारत संवाददाताओं ने ग्राउंड पर जाकर पूरी सच्चाई जानने की कोशिश की है.
गोपालगंज के रितेश की कहानी: सबसे पहले आपको गोपालगंज के रितेश की कहानी बताते हैं जो पिछले डेढ़ साल से दुबई के फजीरा जेल में कैद हैं. जिले के सदर प्रखंड के हजियापुर वार्ड नंबर आठ निवासी स्व शिवबालक ठाकुर का बेटा रितेश ठाकुर पिछले ढाई साल पूर्व दुबई कमाने गया था, लेकिन किस्मत ने उसे सलाखों के पीछे भेज दिया. इधर उसकी पत्नी और मां का रो रोकर बुरा हाल है.
मां और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल: रितेश की वतन वापसी कराने के लिए लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से हाथ जोड़कर पत्नी और मां गुहार लगा रही हैं. पत्नी पुनिता देवी के आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. पुनिता बताती हैं कि उनके पति रितेश एक छोटा-सा कमरा बनाकर दुबई गये थे. जाते समय कहा था कि कमाकर बेहतर घर बनवाऊंगा, लेकिन आज वह सलाखों के पीछे हैं.

वीजा की अवधि समाप्त होने पर भी नहीं की वापसी : रितेश ठाकुर अपने घर पर रहकर सैलून में काम करता था, लेकिन उसे अधिक पैसे कमाने की चाहत थी, ताकि वह अपना घर बना सके और कर्ज चुका सके. इसलिए 2023 में टूरिस्ट वीजा पर रितेश दुबई गया था. एक साल तक अच्छी कमाई भी की. परिवार के पास पैसे भी भेजे, लेकिन पैसे कमाने के चक्कर में दलालों के चक्कर पड़ गया और टूरिस्ट वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी वह वापस नहीं लौटा. जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया.
दो छोटी बच्चियों को पिता इंतजार: वह सात समंदर पार सिर्फ इसलिए गया ताकि परिवार पर चढ़े पुराने कर्ज को उतार सके. अपनी दो मासूम बच्चियों और पत्नी के लिए एक सुरक्षित छत बना सके. बेटियों की शिक्षा और उनके अच्छे जीवन के लिए पैसे जोड़ सके. इन्हीं सपनों के सहारे वह दुबई पहुंचा. रितेश के घर में दो छोटी बच्चियां अपने पिता की राह देख रही हैं, जिन्हें यह भी नहीं पता कि उनके 'पापा' घर क्यों नहीं आ रहे हैं.

घर की हालत दयनीय: रितेश घर का इकलौता कमाने वाला थ और उसके जेल जाने के बाद पत्नी और बूढ़ी मां की हालत दयनीय है. घर की माली हालत इतनी खराब हो चुकी है कि दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी मुश्किल हो रहा है. डेढ़ साल का समय बीत चुका है, लेकिन कानूनी प्रक्रियाओं और जानकारी के अभाव में यह परिवार असहाय महसूस कर रहा है. विदेश में जेल में बंद होने के कारण न तो सही से बातचीत हो पा रही है और न ही पैरवी के लिए पैसे बचे हैं.
डीएम से पत्नी ने लगायी गुहार: रितेश की पत्नी पुनीता देवी ने जिलाधिकारी से मिलकर आवेदन देकर गुहार लगाई है. पुनीता ने बताया कि मेरे पति रितेश ठाकुर 2023 के जुलाई में रोजी-रोटी के सिलसिले में पासपोर्ट वीजा के साथ दुबई गये थे. एक साल तक ठीक से रहे और कमाकर पैसा भी भेजते थे.
"डेढ़ साल बाद उनका फोन बंद हो गया और उनसे हमारी बात बंद हो गयी. मेरे पति के नहीं आने पर मैं एजेंट से भी मिली, लेकिन एजेंट के द्वारा भी कोई संतोषजनक जवाब नही दिया जा रहा. मैं लगातार दो वर्षों से उनके फोन का इंतजार कर रही थी, लेकिन नहीं आया. कुछ महीने पहले किसी अंजान नंबर से फोन आया था. मेरे पति के द्वारा बताया गया कि मैं दुबई के फजीरा जेल में बंद हूं. मुझे छुड़ाने का व्यवस्था करो."- पुनीता देवी, रितेश की पत्नी

मां की फरियाद: पुनीता ने कहा कि मैं और मेरे परिवार के सभी लोग मेरे पति को छुड़ाने के लिए दर-दर की ठोकर खा रहे हैं. मेरी छोटी-छोटी दो बच्ची है, जिनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है. मेरे समक्ष भुखमरी की समस्या आ गई है. मेरे एवं मेरे पूरे परिवार का देखभाल करने वाले एक मात्र मेरे पति हैं. वहीं मां कमला भी सरकार से मदद की गुहार लगा रही हैं और कहती हैं कि कोई मेरे बाबू को दुबई से बुलवा दीजिए.
"2023 में दुबई गया था. फजीरा जेल में बंद है. मेरा बाबू घर के लिए बहुत कुछ करना चाहता था. सैलून के दुकान में था, वहां से दुबई काम करने गया था."- कमला देवी, रितेश की मां
बेतिया के रवि कुमार की कहानी: बेतिया के संतघाट के रहने वाले कन्हैया कुमार का बेटा रवि कुमार दुबई के अवीर जेल में बंद है. परिवार बेहद ही गरीब है. पिता ने कर्ज लेकर परिवार की गरीबी दूर करने के लिए बेटे रवि को खाड़ी देश भेजा था, लेकिन उस पिता को मालूम नहीं था कि उनका बेटा रवि वहां पर एक बड़ी मुसीबत में फंस जाएगा.
एजेंट ने धोखे से भेजा: रवि की मां शकुंतला देवी ने बताया कि उनके बेटे को बेतिया मनुआपुल निवासी अनवर मियां जो एक एजेंट का काम करते हैं, उन्होंने नौकरी पर 22 मई 2024 को दुबई भेजा था. उन्होंने बताया कि उनके बेटे को 35 हजार रुपये प्रति महीना बोलकर भेजा गया था. बेटे ने वहां पर काम भी करना भी शुरू कर दिया, लेकिन उसे महीने का 17 हजार रुपया ही मिलता था.

"किसी तरह बेटे ने 3 महीने वहां पर नौकरी की. जब मेरे बेटे ने कहा कि मुझे इतना कम पैसा क्यों मिल रहा है तो उसके बाद उसे कंपनी से बाहर निकाल कर कहीं ले जाकर सुनसान जगह पर छोड़ दिया गया. किसी तरह रवि ने हम लोगों से संपर्क किया. उसके बाद रवि वहां के स्थानीय पुलिस थाने में गया, लेकिन पुलिस ने सिर्फ मदद का आश्वासन दिया. उसके बाद वह दुबई के एंबेसी में गया लेकिन वहां भी उसकी किसी ने नहीं सुनी."- शकुंतला देवी, रवि की मां
भारत सरकार से रवि की मां ने लगायी गुहार: रोते हुए मां बताती हैं कि उनके बेटे का मोबाइल और पैसा भी वहां पर छीन लिया गया. उनका बेटा फिर से जब पुलिस थाने में गया तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. बेटे के इंतजार में रोती बिलखती मां सरकार से गुहार लगा रही है कि दुबई जेल में बंद मेरे बेटे को भारत सरकार वापस लाए, मुझे न्याय दिलाए.
लोन लेकर और गहने गिरवी रखकर बेटे को भेजा था दुबई: वहीं रवि के पिता कन्हैया कुमार ठेला चलाते हैं और अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं. कन्हैया कुमार ने बताया कि मैंने कर्ज और गहना गिरवी रखकर बेटे को कमाने के लिए दुबई भेजा था. वहां जाने के बाद बेटे ने दो-तीन महीना काम किया. उसके बाद मेरे बेटे के पीछे कुछ दलाल लग गए हैं और मेरे बेटे को प्रताड़ित करने लगे.
"दुबई में किसी दलाल ने मेरे बेटे को झूठा आश्वासन देकर दूसरे कंपनी में काम दिलाने का झांसा देकर ले गया, लेकिन उसने भी उसे काम पर नहीं लगाया और उसका मोबाइल, पैसा सब ले लिया और उसे ले जाकर ओमान और दुबई के बॉर्डर की तरफ सुनसान जगह बालू की रेत की तरफ छोड़ दिया. किसी तरह से बेटे ने मुझसे संपर्क किया. फिर मैंने बेटे को बैंक से 40 हजार रुपये लोन लेकर भेजा कि दुबई में फिर से कम खोजो, लेकिन वहां पर भी मेरे बेटे के साथ धोखा हुआ."- कन्हैया कुमार, रवि के पिता

सतीश चंद्र दुबे से गुहार: कन्हैया ने बताया कि किसी एजेंट ने नौकरी के नाम पर मेरे बेटे से पैसा ले लिया. मेरे बेटे को ना ही उस एजेंट ने कहीं नौकरी लगाई और ना ही भारत जाने के लिए टिकट बनवाया और उसे फंसा कर जेल भेज दिया. मेरा बेटा 13 महीनों से जेल में है. पिता ने बताया कि हमने भारत सरकार के मंत्री सतीश चंद्र दुबे से मुलाकात की और उनसे गुहार भी लगाया, लेकिन अभी तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है.
PK से मिला पीड़ित परिवार: जब परिजनों को जानकारी मिली कि जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर बेतिया के सर्किट हाउस पहुंचे हुए हैं, तो पीड़ित परिवार ने मनीष कश्यप से बातचीत की. उनका कहना है कि प्रशांत किशोर अगर चाहेंगे तो विदेश मंत्रालय (MEA) और दुबई में स्थित भारतीय दूतावास से बात करके रिहाई का रास्ता निकाल सकते हैं. जिसके बाद जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने परिजनों से बातचीत की और उन्हें हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया.

कागजी कार्रवाई शुरू: सूत्रों के अनुसार, जन सुराज की स्थानीय टीम अब परिवार से दस्तावेज लेकर आगे की कार्रवाई के लिए तैयारी कर रही है ताकि दूतावास तक सही जानकारी पहुंचाई जा सके. वहीं प्रशांत किशोर ने परिवार से पूरी जानकारी हासिल की है और मामले को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया है.
सिवान के दीपक की कहानी: रवि और रितेश की तरह सिवान के दीपक कुमार सिंह के परिवार का भी हाल बेहाल है. जिले के आंदर प्रखंड के कटवार गांव निवासी मनोज सिंह के पुत्र दीपक कुमार सिंह पिछले नौ महीनों से अबू धाबी की जेल में बंद हैं. बेटे की गिरफ्तारी की खबर के बाद से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. परिजन अपने स्तर पर हर संभव प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस राहत नहीं मिल सकी है.

प्रतिबंधित सामान के आरोप में अरेस्ट: दीपक पहले भी अबू धाबी में नासिर अल हाजिरी कॉर्पोरेशन में काम कर चुका था. बहन की शादी के सिलसिले में वह 25 अप्रैल को एक महीने की छुट्टी लेकर सिवान आया था. शादी के बाद 1 जून को वह गोरखपुर से हैदराबाद होते हुए इंडिगो की फ्लाइट से दोबारा अबू धाबी लौट गया, लेकिन वहां पहुंचने के छह दिन बाद परिवार को फोन पर सूचना मिली कि दीपक को प्रतिबंधित सामान के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है.
बिहार से लेकर यूपी तक दौड़ रहा परिवार: दीपक की मां सोना देवी के अनुसार, इस खबर ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है. उन्होंने सिवान के डीएम, स्थानीय विधायक और सांसद से लेकर बिहार व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों तक गुहार लगाई है. यहां तक कि दिल्ली जाकर विदेश मंत्रालय से भी मदद की अपील की, लेकिन करीब 20 दिनों तक प्रयास करने के बावजूद कोई ठोस सहायता नहीं मिली.
1.25 करोड़ का जुर्माना: परिवार को विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार दीपक पर 5 लाख दिरहम यानी लगभग 1 करोड़ 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. परिजनों का सवाल है कि अगर उसके पास कोई प्रतिबंधित सामान था, तो कड़ी सुरक्षा जांच के बावजूद वह भारत से कैसे निकल गया.
"मेरे पोते को फंसाया जा रहा है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम जुटा पाना असंभव है, हमलोग गहरे सदमे और असहाय स्थिति में हैं."- दीपक के दादा

दीपक के परिवार का सवाल: दीपक के परिजनों का कहना है कि प्रतिबंधित सामान ले गया ते गोरखपुर एयरपोर्ट पर उसका सामान कैसे जाने दिया गया? दादा ने सीधे तौर पर पोते को फंसाने का आरोप लगाया है. साथ ही परिवार का कहना है कि अगर हमारे पास इतने पैसे होतो तो दीपक को बाहर काम करने जाने की जरूरत ही क्या थी?
कैसी किया जा सकता है आवेदन?: सबसे पहले दुबई में भारतीय वाणिज्य दूतावास या अबू धाबी में भारतीय दूतावास से संपर्क करना होगा. कैदी खुद या उसके परिवार का कोई सदस्य 'Repatriation of Prisoners Act, 2003' के तहत निर्धारित Form 1 कर सकता है. आवेदन के साथ पासपोर्ट की प्रति, सजा के फैसले की कॉपी और उंगलियों के निशान जैसे दस्तावेज संलग्न करने होते हैं. भारतीय गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय इस अनुरोध की समीक्षा करते हैं और यूएई सरकार के साथ समन्वय करते हैं.
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