दार्जिलिंग चिड़ियाघर में जापान से नया हिम तेंदुआ लाने की तैयारी, जू अथॉरिटी ने बनाई योजना
दार्जिलिंग का पद्मजा नायडू हिमालयन जूलॉजिकल पार्क पशु अदला-बदली प्रोग्राम के तहत जापान से एक हिम तेंदुआ लाने की तैयारी में हैं.

Published : September 1, 2026 at 2:34 PM IST
दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल): हिम तेंदुआ (snow leopard) हिमालय के उबड़-खाबड़ और बर्फ से ढके पहाड़ों का एक दुर्लभ और प्रसिद्ध शिकारी है. इसे अक्सर "पहाड़ों का भूत" कहा जाता है. इसमें अपने बर्फीले परिवेश में पूरी तरह से घुल-मिल जाने की गजब की क्षमता होती है, जिसमें इसकी लंबी, मोटी पूंछ और काले धब्बों वाले गहरे भूरे-सफेद रंग के फर (coat) इसकी मदद करते हैं.
इनका आवास मध्य और दक्षिण एशिया की विशाल पर्वत श्रृंखलाओं में फैला हुआ है, जिसमें भारत, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, मंगोलिया और चीन शामिल हैं. पश्चिम बंगाल में, यह जानवर सिर्फ दार्जिलिंग के पद्मजा नायडू हिमालयन जूलॉजिकल पार्क में ही मिल सकता है.
हालांकि, अब इस पर्वतीय प्रजाति के स्वास्थ्य को लेकर कुछ चिंता बनी हुई है. एक ही वंश में लंबे समय तक प्रजनन के कारण, दार्जिलिंग में हिम तेंदुआ परिवार "इनब्रीडिंग डिप्रेशन" और उससे जुड़ी आनुवंशिक समस्याओं के गंभीर खतरे का सामना कर रहा है. इस स्थिति से निपटने और आनुवंशिक विविधता को बहाल करने के लिए, चिड़ियाघर प्रशासन और जू अथॉरिटी ने जापान से एक "विदेशी साथी" लाने की योजना शुरू की है.

पद्मजा नायडू हिमालयन जूलॉजिकल पार्क दार्जिलिंग के टोपकेदारा में एक समर्पित प्रजनन केंद्र संचालित करता है. वर्तमान में, यहां 13 हिम तेंदुए हैं—जिनमें पांच नर और आठ मादाएं हैं. चिड़ियाघर के स्रोत बताते हैं कि इन हिम तेंदुओं की वंशावली मुख्य रूप से सिक्किम से जुड़ी है. दशकों से कैद में निकटता से संबंधित जानवरों के बीच प्रजनन ने "इनब्रीडिंग डिप्रेशन" (अंतःप्रजनन अवसाद) का एक गंभीर जोखिम पैदा कर दिया है.

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, वर्षों तक एक ही परिवार में लगातार प्रजनन कराने से जानवरों की रोग प्रतिरोधक क्षमता गंभीर रूप से कमजोर हो जाती है. इसके अलावा, आने वाली पीढ़ियों में कई तरह की विकृतियां दिखाई दे सकती हैं, जैसे कि असामान्य शारीरिक संरचना, अविकसित अंग और यहां तक कि त्वचा के रंग में असामान्यताएं. राज्य वन विभाग, पार्क अधिकारियों और चिड़ियाघर प्राधिकरण ने दार्जिलिंग के हिम तेंदुओं को इन खतरों से बचाने के लिए कदम उठाए हैं. नए आनुवंशिक संयोजन (genetic combinations) या विविधता लाने के लिए जापान के प्रसिद्ध तामा जू (Tama Zoo) के साथ शुरुआती बातचीत शुरू हो चुकी है.
प्रस्तावित योजना के अनुसार, जापान से एक मादा हिम तेंदुआ दार्जिलिंग लाया जाएगा. इसके बदले में, उत्तर बंगाल के इस चिड़ियाघर से एक मादा हिम तेंदुआ जापान भेजा जाएगा. जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय लिए जाने की उम्मीद है.

राज्य के वन मंत्री मनोज उरांव ने कहा, "हमारा पहला उद्देश्य चिड़ियाघरों या संरक्षित प्रजनन केंद्रों में लुप्तप्राय जानवरों के स्वस्थ प्रजनन और उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करना है. कैद में एक ही वंश के भीतर लंबे समय तक प्रजनन कराने से जानवरों की शारीरिक जीवन शक्ति और आनुवंशिक संतुलन पर असर पड़ता है. दार्जिलिंग चिड़ियाघर में हिम तेंदुओं के लिए इस जोखिम को कम करने और प्रजनन चक्र (breeding cycle) में नया आनुवंशिक स्वरूप शामिल करने के लिए, हमने एक अंतरराष्ट्रीय पशु आदान-प्रदान कार्यक्रम शुरू किया है. जापान के तामा चिड़ियाघर के साथ शुरुआती बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है. सभी नियमों के पूरा होने और जरूरी मंजूरी मिलने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा."
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के वैज्ञानिकों ने कैद या सीमित वातावरण के भीतर इनब्रीडिंग — यानी आपस में निकटता से संबंधित जीवों के बीच प्रजनन - के विनाशकारी परिणामों पर प्रकाश डाला है. ओडिशा का सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व इसका एक बड़ा उदाहरण है; वहां लंबे समय तक चले अंतःप्रजनन के कारण रॉयल बंगाल टाइगर्स ने अपनी विशिष्ट राजसी उपस्थिति और लक्षण खो दिए हैं, और यहां तक कि आनुवंशिक उत्परिवर्तन (genetic mutations) के कारण काले धब्बों वाले दुर्लभ मेलानिस्टिक टाइगर (काले बाघ) का उदय हुआ है.

सिलीगुड़ी के बंगाल सफारी पार्क में रॉयल बंगाल टाइगर्स को भी ऐसे ही संकट का सामना करना पड़ा था. साल 2016 में सफारी पार्क खुलने के बाद प्रजनन शुरू करने वाले अधिकांश बाघ एक ही वंश या परिवार के थे. एक ही वंश में लंबे समय तक प्रजनन के कारण बाघों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही थी और इनब्रीडिंग डिप्रेशन को लेकर चिंताएं बढ़ रही थीं. इस समस्या से निपटने के लिए - केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) से मंजूरी लेकर अलीपुर चिड़ियाघर से एक रॉयल बंगाल बाघिन को बंगाल सफारी पार्क में स्थानांतरित करने की व्यवस्था की गई थी.
इसके अलावा, दार्जिलिंग चिड़ियाघर से एक साइबेरियन रॉयल बंगाल टाइगर भी लाया जाएगा. इस पहल ने बाघों के बीच आनुवंशिक विविधता सुनिश्चित की है, जिससे नई आनुवंशिक सामग्री के शामिल होने से आने वाली पीढ़ियों को आनुवंशिक जटिलताओं से बचाया जा सकेगा. दार्जिलिंग चिड़ियाघर के अधिकारी अब बंगाल सफारी पार्क के इस सफल मॉडल को अपने हिम तेंदुओं के लिए भी दोहराना चाहते हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि कैद में रखे गए लुप्तप्राय वन्यजीवों के स्वस्थ, मजबूत और टिकाऊ भविष्य को सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका नई आनुवंशिक सामग्री (new genetic material) को शामिल करना है. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, तोपकेदारा में हिम तेंदुआ परिवार अब जापान से आने वाले एक मेहमान का इंतजार कर रहा है.
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