ETV Bharat / bharat

उत्तराखंड में 40 घंटे से 'आफत'वाली बारिश! अस्त व्यस्त जनजीवन, नदियों में बही गाड़ियां

उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ से लेकर मैदान तक जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है.

RAIN IN UTTARAKHAND
उत्तराखंड में बारिश (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : August 18, 2026 at 6:43 PM IST

7 Min Read
Choose ETV Bharat

देहरादून: उत्तराखंड में मौसम ने एक बार फिर मुश्किलें बढ़ा दी हैं. प्रदेश के कई हिस्सों में करीब 40 घंटे से लगातार बारिश का दौर जारी है. पहाड़ से मैदान तक बारिश ने जनजीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है. कहीं नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं तो कहीं भूस्खलन ने सड़कों को बंद कर दिया है. राजधानी देहरादून, ऋषिकेश, पौड़ी, टिहरी, चमोली समेत कई जिलों में हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं. लगातार बारिश के बीच प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं. इतना ही नहीं राज्य के कई जगह पर लोगों को रेस्क्यू तक करना पड़ा.

ऋषिकेश में सड़कें जलमग्न, घरों तक पहुंचा पानी: लगातार बारिश से ऋषिकेश के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई है. कई सड़कें और गलियां पानी में डूबी हुई हैं. चंद्रभागा नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे रहने वाले लोगों की चिंता भी बढ़ गई है. तेज बहाव के बीच वाहनों के फंसने की सूचनाएं सामने आई. कई रिहायशी इलाकों में बारिश और नालियों का पानी घरों तक पहुंच गया. गंगा से सटे क्षेत्रों में भी जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है.

RAIN IN UTTARAKHAND
40 घंटे से 'आफत'वाली बारिश! (ETV Bharat)

प्रशासन ने लोगों से नदी नालों और तेज बहाव वाले स्थानों से दूर रहने की अपील की है. ऋषिकेश में चंद्रभागा नदी कुछ लोगों के लिए इस कदर मुसीबत बन कर आई की उनकी गड़िया बहते हुए मुख्य नदियों तक पहुंच गई. ऋषकेश में कई जगह पर हालात बेहद खराब हैं. इतना ही नहीं गंगा का जलस्तर भी लगातार बढ़ता जा रहा है. एसडीआरएफ प्रभारी कविंद्र साजवान की माने तो फिलहाल कई गड़िया निकाल ली गई हैं. कई जगह पर नदियां और नाले उफान पर हैं.

कई जगहों पर रेस्क्यू किए लोग: देहरादून में यूपीईएस के छह छात्र थान गांव मिसरास पट्टी स्थित स्वारना नदी क्षेत्र में ट्रेकिंग के लिए पहुंचे थे. बताया जा रहा है की ट्रेकिंग पूरी कर छात्र वापस लौट रहे थे, तभी इलाके में अचानक तेज बारिश शुरू हो गई. लगातार बारिश के कारण स्वारना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा. नदी के उफान को देखते हुए छात्रों के लिए वापस लौटना मुश्किल हो गया. वे जंगल के बीच ही फंस गए.

बाद में उन्हें रेस्क्यू किया गया. इसी तरह पुलिस चौकी पशुलोक बैराज से रात करीब 9:22 बजे सूचना मिली कि बीन नदी में एक मैक्स वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया है. उसमें कुछ लोग फंसे हुए हैं. सूचना मिलते ही SDRF रेस्क्यू टीम तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई. घटनास्थल पर पहुंचते ही SDRF जवानों ने बिना समय गंवाए रेस्क्यू अभियान शुरू किया. टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद वाहन में फंसे एक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाला.

कोटद्वार में मकान ढहा, मलबे में दबे लोगों में बच्चे की मौत: लगातार बारिश से पौड़ी जिले के कोटद्वार-द्वारीखाल क्षेत्र के मेहरगांव यानी भलगांव में भारी बारिश के बीच एक मकान ढह गया. हादसे के बाद मलबे में चार लोगों के दबे होने की सूचना से हड़कंप मच गया. सूचना मिलते ही प्रशासन पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें मौके के लिए रवाना हुईं. ग्रामीणों की मदद से एक महिला को सुरक्षित बाहर निकाला गया. राहत-बचाव अभियान के दौरान एक बच्चे का शव बरामद किया गया. मौके पर एंबुलेंस और मेडिकल टीम को भी भेजा गया. हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है. क्षेत्र मे कई घर गिरासु हैं. उनमें रहने वाले लोगों से सुरक्षित जगह पर रहने की अपील भी की जा रही है.

लगातार बारिश और भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए पौड़ी जिलाधिकारी तत्काल आपदा कंट्रोल रूम पहुंची. जिले के अलग-अलग हिस्सों में हालात की समीक्षा की बैरगांव में भूस्खलन की घटना में घायल महिला को प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सतपुली स्थित हंस चिकित्सालय पहुंचाया. जहां उसका उपचार जारी है. डीएम ने बाधित सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर खोलने और सड़क बिजली व पेयजल जैसी आवश्यक सेवाओं की लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं.

सिलगाड़ और लंगूरगाड़ नदियां उफान पर: पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश का असर नदियों के जलस्तर पर भी दिखाई दे रहा है. ऋषिकेश हरिद्वार के साथ साथ देहरादून की भी कई नदियां उफान पर हैं. इसके साथ पौड़ी ओर आसपास मे सिलगाड़ और लंगूरगाड़ नदियों का जलस्तर खतरे की स्थिति तक पहुंच गया है. सरुड़ा गांव में पंचायत घर और खोह नदी के किनारे बने मकानों पर खतरा मंडरा रहा है. वहीं लंगूरगाड़ नदी के बढ़ते प्रवाह से सुभाष बाजार वार्ड का कंडवाल मोहल्ला भी संवेदनशील हो गया है. पुलिस और प्रशासन की टीमें स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.

NH-534 पर भूस्खलन कई जगह आवाजाही प्रभावित: बारिश के साथ पहाड़ों में भूस्खलन का सिलसिला भी तेज हो गया है. राष्ट्रीय राजमार्ग-534 पर कई स्थानों पर मलबा आने से यातायात प्रभावित हुआ है. रपटों में पानी का बहाव बढ़ने के कारण भी आवाजाही जोखिम भरी बनी हुई है. सड़कें बंद होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ जरूरी सेवाओं की आवाजाही पर भी असर पड़ रहा है. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के बुलेटिन के मुताबिक बारिश भूस्खलन और अन्य कारणों से प्रदेश में दो राज्यमार्ग समेत कुल 91 सड़कें बंद हैं. अल्मोड़ा में 5 बागेश्वर में 12, चमोली में 15, चंपावत में एक, देहरादून में सात, नैनीताल में 12, पौड़ी में पांच, पिथौरागढ़ में 11, रुद्रप्रयाग में सात, जबकि टिहरी और उत्तरकाशी में आठ-आठ मार्ग बाधित हैं प्रशासन और संबंधित विभाग बंद सड़कों को खोलने के लिए जेसीबी और अन्य मशीनरी की मदद ले रहे हैं.

उर्गम घाटी में केदार से लेकर कल्पेश्वर मंदिर के पास भूस्खलन: रुद्रप्रयाग में भी केदारनाथ पैदल मार्ग पर भूस्खलन से कई लोग घायल हुए हैं. एक की मौत हुई है. लोग बारिश में भी कई बार इन यात्राओं को कर रहे हैं. इसी के साथ ही चमोली जिले की ज्योतिर्मठ स्थित उर्गम घाटी में पांचवें केदार भगवान कल्पेश्वर महादेव मंदिर के पास भी भारी भूस्खलन हुआ है. पहाड़ी से आए मलबे ने मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र को प्रभावित किया है. लगातार बारिश के कारण यहां हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं. मलबा आने से मंदिर तक श्रद्धालुओं की आवाजाही भी प्रभावित हुई है. रास्ता साफ होने तक श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

RAIN IN UTTARAKHAND
उत्तराखंड में आफत वाला मानसून (ETV Bharat)

नदियों और नालों से दूर रहने की अपील: लगातार बारिश के बीच सीएम धामी ने लोगों से एहतियात बरतने की अपील की है. खासकर नदी-नालों के किनारे जाने तेज बहाव वाले रास्तों को पार करने और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने को कहा गया है. संवेदनशील इलाकों में प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन की टीमें निगरानी कर रही हैं. उत्तराखंड में करीब 40 घंटे से जारी बारिश ने एक बार फिर पहाड़ी राज्य की भौगोलिक चुनौतियों को सामने ला दिया है. नदियों के बढ़ते जलस्तर, भूस्खलन, जलभराव और बंद सड़कों के बीच अब सबसे बड़ी चुनौती लोगों की सुरक्षा और जरूरी सेवाओं को सुचारू बनाए रखना है. आने वाले घंटों में बारिश की स्थिति और संवेदनशील क्षेत्रों में जलस्तर पर प्रशासन की नजर बनी हुई है.

पढ़ें---