झारखंड का ‘दक्ष विश्वविद्यालय’ निकला फर्जी, UGC ने जारी की चेतावनी, जमीनी स्तर पर नहीं है कोई यूनिवर्सिटी
यूजीसी द्वारा जारी फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में झारखंड का दक्ष विश्वविद्यालय भी शामिल है. हालांकि, यह विश्वविद्यालय केवल कागजों पर ही संचालित है.

Published : February 23, 2026 at 3:03 PM IST
रांची: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा देशभर के 32 विश्वविद्यालयों को फर्जी घोषित किए जाने के बाद झारखंड भी इस सूची में शामिल हो गया है. आयोग की ओर से जारी सूची में रांची स्थित कथित दक्ष विश्वविद्यालय (व्यावसायिक एवं जीवन कौशल शिक्षा) का नाम दर्ज है. UGC ने स्पष्ट कर दिया है कि इन फर्जी घोषित संस्थानों द्वारा जारी की जाने वाली डिग्रियां न तो सरकारी या निजी नौकरी के लिए मान्य होंगी और न ही उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए स्वीकार की जाएंगी.
UGC के अनुसार, ये संस्थान विश्वविद्यालय के रूप में कार्य करने का दावा करते हैं, जबकि इन्हें न तो केंद्र सरकार से और न ही संबंधित राज्य सरकार से वैधानिक मान्यता प्राप्त है. आयोग ने छात्रों और अभिभावकों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि किसी भी विश्वविद्यालय या कॉलेज में दाखिला लेने से पहले उसकी मान्यता आधिकारिक वेबसाइट www.ugc.gov.in पर अवश्य जांच लें.

जमीनी स्तर पर नहीं मिला कोई विश्वविद्यालय
सूची में शामिल झारखंड के दक्ष विश्वविद्यालय का पता भास्कर पथ, न्यू पुनदाग, मसीबारी, रांची – 834007 बताया गया है. जब इस पते पर स्थानीय स्तर पर पड़ताल की गई तो वहां ऐसा कोई विश्वविद्यालय संचालित होता नहीं मिला. आसपास के लोगों ने भी इस नाम के किसी शिक्षण संस्थान के अस्तित्व से इनकार किया.
हालांकि ऑनलाइन सर्च करने पर विश्वविद्यालय के नाम से एक वेबसाइट दिखाई देती है, जिसमें विभिन्न पाठ्यक्रमों और डिग्री कार्यक्रमों की जानकारी दी गई है. लेकिन वेबसाइट पर कोई स्पष्ट संपर्क नंबर, अधिकृत कार्यालय या प्रशासनिक व्यवस्था की ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है. इससे यह आशंका और गहराती है कि संस्थान केवल कागजों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक सीमित है.
ऐसे संस्थानों पर तत्काल हो सरकारी कार्रवाई - डॉ. अटल पांडे
इस पूरे प्रकरण पर रांची विश्वविद्यालय के पूर्व सिंडिकेट सदस्य डॉ. अटल पांडे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा दक्ष विश्वविद्यालय नाम का कोई मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय झारखंड में अस्तित्व में नहीं है. यदि कोई संस्था विश्वविद्यालय के नाम पर छात्रों को गुमराह कर रही है, तो उस पर तत्काल सरकारी कार्रवाई होनी चाहिए.
डॉ. पांडे ने यह भी कहा कि उच्च शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह कीई अनियमितता बेहद गंभीर मामला है. सरकार को ऐसे संस्थानों की पहचान कर सख्त कदम उठाने चाहिए. झारखंड में यदि कोई विश्वविद्यालय केवल कागजों पर संचालित हो रहा है और उसे न राज्य सरकार की मान्यता प्राप्त है और न ही केंद्रीय स्तर की स्वीकृति, तो वह सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है.
स्टेट यूनिवर्सिटी एसोसिएशन के पदाधिकारी डॉ राजकुमार ने कहा कि फर्जी विश्वविद्यालय अक्सर छात्रों को आकर्षक विज्ञापनों, त्वरित डिग्री, ऑनलाइन पाठ्यक्रम और कम शुल्क के लालच में फंसाते हैं. कई बार छात्र या अभिभावक बिना मान्यता की जांच किए दाखिला ले लेते हैं, जिसका खामियाजा उन्हें भविष्य में भुगतना पड़ता है. नौकरी या उच्च शिक्षा के दौरान जब डिग्री की वैधता पर सवाल उठता है, तब पूरा करियर दांव पर लग जाता है.
झारखंड में वर्तमान में लगभग 30 से 32 विश्वविद्यालय संचालित हैं. इनमें करीब 12 सरकारी (राज्य एवं केंद्रीय) विश्वविद्यालय और 15 से 18 निजी विश्वविद्यालय शामिल हैं, जिन्हें विधिवत मान्यता प्राप्त है. रांची विश्वविद्यालय, झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय समेत कई प्रतिष्ठित संस्थान राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं. ऐसे में UGC द्वारा फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची जारी किया जाना छात्रों और अभिभावकों के लिए एक गंभीर चेतावनी है.
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के पूर्व वीसी एसएन मुंडा कहते हैं कि जागरूकता ही इस समस्या का सबसे बड़ा समाधान है. किसी भी संस्थान में प्रवेश से पहले उसकी वैधानिक स्थिति की पुष्टि करना अब अनिवार्य हो गया है, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके.
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